#GandhiAt150: भितिहरवा में बापू हैं, बा हैं और है गांधी का जीवन-दर्शन

भितिहरवा से लौटकर रजनीश उपाध्याय बिहार के नरकटियागंज से गौनाहा की दूरी करीब 19 किलोमीटर है और अधिकतर जगहों पर टूटी-फूटी और गड्ढों वाली यही एक लेन की सड़क श्रीरामपुर से भितिहरवा के लिए मुड़ जाती है. भितिहरवा तक जाने के लिए कोई सीधी बस सेवा नहीं है. ट्रेन तो है ही नहीं. ऑटो या […]
भितिहरवा से लौटकर रजनीश उपाध्याय
भितिहरवा में जनसहयोग से गांधी की स्मृतियों को सहेज कर रखा गया है. गांधीजी की कुटिया, उनके द्वारा व्यवहार किया गया टेबल और एक चक्की, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे कस्तूरबा प्रयोग में लाती थीं, यहां मौजूद है. हां, स्कूल की एक घंटी भी है. यहां के कर्मचारी मदन महतो आगंतुकों को पुलकित होकर यह बताना नहीं भूलते कि फर्श उसी समय का है, जब इसका निर्माण किया गया था. गांधी स्मारक संग्रहालय में टंगे चित्र इतिहास से रूबरू कराते हैं. मुरली भरहवा के राजकुमार शुक्ल, सेमरा श्रीरामपुर के प्रहलाद राउत और अमोलवा के संत भगत जैसे अनेक मनीषियों की तस्वीरें हैं. 2017 में पंडुई नदी में आयी बाढ़ में आश्रम डूब गया था. तब से संग्रहालय की दीवार का प्लास्टर झड़ने लगा है. इसकी मरम्मत के लिए 1.04 लाख रुपये का प्राक्कलन तैयार हुआ, लेकिन फाइल कहीं दबी रह गयी. शत्रुध्न प्रसाद चौरसिया आशंका जाहिर करते हैं कि यह ऐतिहासिक धरोहर कहीं गिर न जाये. स्मारक संग्रहालय के कर्मियों को चार माह से वेतन भी नहीं मिला है. इसके बावजूद उन्होंने इसे पूरे मनोयोग से सहेज कर रखा है.
भितिहरवा आश्रम की वजह से इलाके के गांव-गांव में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी किसी न किसी रूप में मौजूद रहते हैं. आसपास के गांवों के बड़े-बुजुर्ग गर्व से बताते हैं कि गांधी जी उनके गांव भी आये थे. इस लिहाज से भितिहरवा सामुदायिक जीवन का एक संदेश भी देता है. लेकिन, बड़ा सवाल स्वच्छता के उस संदेश का है, जो यहां स्थापित होने वाली पाठशाला में निहित था. दो साल पहले आश्रम की स्थापना के सौ साल पूरे होने पर जोर-शोर से स्वच्छता के लिए अभियान की शुरुआत की गयी थी. अब यह शिथिल दिख रहा. आसपास के लोगों की अपेक्षा यह भी है कि गांधी स्मारक संग्रहालय को लोगों से जोड़ने के लिए नरकटियागंज या बेतिया से आवागमन की सुविधा मिले.
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