पटना : स्वास्थ्य विज्ञान विवि की होगी स्थापना

Updated at : 24 Sep 2019 8:18 AM (IST)
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पटना : स्वास्थ्य विज्ञान विवि की होगी स्थापना

देश में 11 नये मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की स्थापना का काम शुरू पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया कि राज्य में मेडिकल शिक्षा के संचालन के लिए स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की जायेगी. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव की अध्यक्षता में चार लोगों की कमेटी बनायी गयी है. यह तकनीकी […]

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देश में 11 नये मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की स्थापना का काम शुरू
पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया कि राज्य में मेडिकल शिक्षा के संचालन के लिए स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की जायेगी. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव की अध्यक्षता में चार लोगों की कमेटी बनायी गयी है. यह तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने लिए गठित आर्यभट विवि के तर्ज पर स्वतंत्र विवि होगा. सोमवार को आयुष्मान भारत के पहले वार्षिक उत्सव समारोह में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नौ सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहले से हैं.
11 नये मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की स्थापना का काम शुरू हो गया है. जिस प्रकार से एकल प्रवेश परीक्षा नीट के जरिये पूरे देश में मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में दाखिला लिया जाता है, उसी प्रकार से पूरे देश में एमबीबीएस की फाइनल परीक्षा एक साथ ली जायेगी. यह नेशनल एक्जिट टेस्ट कहा जायेगा. इसके बाद ही डिग्री पानेवाले डॉक्टर प्रैक्टिस कर सकते हैं.
बिहार में 3207 लोगों पर हैं एक डॉक्टर
उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की स्थापना की होती, तो राज्य में प्रति हजार की आबादी पर डॉक्टरों की उपलब्धता अधिक होती. तमिलनाडु में प्रति हजार की आबादी पर चार डॉक्टर हैं, जबकि बिहार में 3207 लोगों पर एक डॉक्टर हैं.
उन्होंने कहा कि बिहार की सकल प्रजनन दर 3.2 है, जबकि पश्चिम बंगाल की 1.6 है. मौके पर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार, बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के सीइओ लोकेश कुमार सिंह, राज्य स्वास्थ्य समिति के इडी मनोज कुमार, अपर निदेशक डाॅ करुणा कुमारी, आइजीआइएमएस के निदेशक डाॅ एनआर विश्वास, पीएमसीएच के अधीक्षक डाॅ राजीव रंजन प्रसाद सहित राज्य के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के अधीक्षक व सिविल सर्जनों ने भाग लिया.
नियुक्तियों के लिए समर्पित होगा यह वर्ष
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि यह वर्ष नियुक्तियों के लिए समर्पित होगा. राज्य में 22 प्रकार के पारा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जायेगी.
साथ ही डॉक्टरों व नर्सों की नियुक्ति कर मानव संसाधन की कमी को दूर किया जायेगा. पीएमसीएच में बननेवाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का इसी माह में टेंडर जारी कर दिया जायेगा. ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजी निवेश करने की नीति तैयार की जा रही है. इसी तरह से 22 जिला अस्पतालों में सिटी स्कैन की सुविधा दी जा रही है.
ओपीडी की तुलना में कम मरीजों का भर्ती होना चिंताजनक : प्रधान सचिव
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने सरकारी अस्पतालों में कम संख्या में मरीजों की भर्ती को लेकर चिंता जतायी. उन्होंने कहा कि जितनी संख्या में मरीज ओपीडी में इलाज के लिए आ रहे हैं, उसके अनुपात में मरीजों की भर्ती नहीं हो रही है. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में प्रति वर्ष 27 लाख बच्चों का जन्म होता है. इसमें करीब ढ़ाई लाख बच्चों का जन्म सिजेरियन ऑपरेशन के माध्यम से होता है.
अभी सरकारी अस्पताल सिर्फ 22-24 हजार सिजेरियन ऑपरेशन ही कर रहे हैं. बाकी ऑपरेशन निजी क्षेत्र में किया जा रहा है. उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के अधीक्षकों व सिविल सर्जनों को छह माह में आशातीत परिणाम देने का टास्क दिया. अस्पतालों की सफाई से लेकर मरीजों के साथ बर्ताव में बदलाव लाने के निर्देश दिये.
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