नया मोटर वाहन अधिनियम : अधिक जुर्माने की नहीं, जागरूकता की है जरूरत
Updated at : 06 Sep 2019 6:43 AM (IST)
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डॉक्टर से लेकर कारोबारियों तक का जुर्माने के खिलाफ एक सुर नया मोटर वाहन अधिनियम लागू होने के दिन से ही विवाद का विषय बना हुआ है. शुक्रवार से इसको सख्तीपूर्वक लागू कराने के लिए एक सप्ताह का विशेष अभियान शुरू होने वाला है, जिसको लेकर गुरुवार को शहर के लोगों में तरह तरह की […]
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डॉक्टर से लेकर कारोबारियों तक का जुर्माने के खिलाफ एक सुर
नया मोटर वाहन अधिनियम लागू होने के दिन से ही विवाद का विषय बना हुआ है. शुक्रवार से इसको सख्तीपूर्वक लागू कराने के लिए एक सप्ताह का विशेष अभियान शुरू होने वाला है, जिसको लेकर गुरुवार को शहर के लोगों में तरह तरह की चर्चाएं होती रहीं. लोगों का कहना है कि नये मोटर वाहन कानून में जुर्माना राशि व लाइसेंस फीस को बहुत बढ़ा दिया गया है जो उचित नहीं है. प्रभात खबर ने शहर के प्रमुख संगठनों से इस संदर्भ में बातचीत की. बातचीत में हर किसी ने कहा कि जुर्माना में वृद्धि अत्यधिक है और इससे कम वृद्धि से भी काम चल सकता था.
रीजनेबल बनाने का प्रयास
नये मोटर वाहन कानून में जुर्माना राशि व लाइसेंस फी को बहुत बढ़ा दिया गया है जो उचित नहीं है. अत्यधिक वृद्धि को देखते हुए ही राजस्थान, बंगाल, मध्यप्रदेश व गुजरात ने इसे लागू नहीं किया है. इसे सरकार को रीजनेवल बनाने का प्रयास करना चाहिए. यातायात नियमों का पालन के लिए जागरूकता भी बढ़ायी जानी चाहिए.
पीके अग्रवाल, अध्यक्ष, बिहार चेंबर आॅफ कॉमर्स
समय देना चाहिए था
फीस बढ़ा कर अधिक पैसा वसूलना इस विधेयक का एकमात्र मकसद दिखता है. इतना अधिक जुर्माना राशि करने का कोई औचित्य ही नजर नहीं आता है. बिहार सरकार को पहले इसका प्रचार प्रसार के लिए एक समय देना चाहिए. उसके बाद विचार करना चाहिए कि इतना भारी जुर्माना लगाने के लिए बिहार में अनुकूल परिस्थिति है या नहीं है.
राजकुमार झा, महासचिव ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कस फेडरेशन, बिहार
सख्ती जरूरी
राशि बढ़नी चाहिए लेकिन इतनी अधिक नहीं जितनी वृद्धि हुई है. अत्यधिक वृद्धि से इसके दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ जाती है. बिना हेलमेट लगा कर बाइक चलाने वाले कम उम्र के युवकों और युवतियों के लिए यह सख्ती जरूरी दिखती है. उनके पास प्राय: पैसों की कमी होती है. ऐसे में फाइन से बचने के लिए उनमें हेलमेट लगाने की प्रवृति बढ़ेगी.
विभा चरण पहाड़ी, पास्ट प्रेसीडेंट, इनर व्हील क्लब
बिल्कुल गलत निर्णय है
सरकार ने जो बढ़ोतरी की है वह बिल्कुल गलत निर्णय है. इस तरह का कानून ऐसा बनाया जाता है जिससे लोगों में सुधार की संभावना हो, लेकिन इस कानून से लोगों में भय उत्पन्न हो गया है. यह निहायत ही अव्यवहारिक संशोधन है और बिना किसी संस्था से विचार लिए इस तरह का जो संशोधन किया गया है उस पर अविलंब पुनर्विचार करने की आवश्यकता है.
राजेश कुमार, महासचिव, जिला अधिवक्ता संघ, पटना
जरूरत सख्त कानून कीपीएमसीएच इमरजेंसी में डॉक्टर होने के नाते मैंने कितने लोगों को हेलमेट नहीं लगाने से मरते देखा है. एेसे में सख्त कानून की जरूरत थीऔर इस मायने में यह नयाकानून जरुरी है. इससे भी अधिक लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है और हर स्कूल कॉलेज में इसके लिए विशेष सत्र आयोजित होना चाहिए.
डॉ अभिजीत सिंह, वरीय
उपाध्यक्ष , भाषा
लाभ कमाने का धंधा
राशि बढ़ाना सरकार द्वारा वित्तीय लाभ कमाने का धंधा बन गया है. अधिक जुर्माना लेने की बनिस्पत जागरूकता पर ध्यान देना चाहिए. बिना उसके कोई बड़ा सुधार नहीं हो सकता है. अत्यधिक वृद्धि से लोगों में काफीनाराजगी है और यह कारगर नहीं होगा व पुलिस के लिए कमाई का नया जरिया बन जायेगा.
डॉ सचिदानंद कुमार, पूर्व
अध्यक्ष, आइएमए
समझाने की जरूरत
नया मोटर वाहन अधिनियम में जुर्माना राशि बढ़ाने का आंशिक असर पड़ेगा. बिहार में इसको लेकर जागरूकता की भी कमी है. उनके सामाजिक चेतना में विकास लाने की बात होनी चाहिए. जुर्माना को बहुत बढ़ा कर अनुशासन नहीं बढ़ाया जा सकता है बल्कि जागरूकता को बढ़ा कर लाेगों को समझाने की जरूरत है कि ऐसा करके वे अपनी जिंदगी की रक्षा कर रहे हैं.
केदार नाथ पांडे, अध्यक्ष, बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ
चोरी की सजा फांसी नहीं
यह सही है कि कम फाइन होने से लोग ध्यान नहीं देते थे और नियमों का पालन नहीं करने की प्रवृति बढ़ती जा रही थी. लेकिन वृद्धि बहुत ज्यादा है और चोरी की सजा फांसी नहीं हो सकती है. इससे पुलिस के कमाई की गुंजाइश भी बढ़ गयी है. इसलिए सरकार को इतनी अधिक वृद्धि पर पुनर्विचार करना चाहिए.
केके वर्मा, एडीशनल डिसट्रिक्ट सेक्रेटरी, बिहार झारखंड, रोटरी
थोड़ी ज्यादा वृद्धि है
हमारे देश आैर समाज में बिना भय के लोग प्राय: नियमों का पालन नहीं करते हैं. ऐसे में नियमों में सख्ती लाने और जुर्माना राशि में बढ़ोतरी की जरूरत है लेकिन यह वृद्धि उस जरूरत से भी थोड़ी अधिक है. सख्ती के साथ यहां जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है. पुलिस द्वारा नियम की सख्ती के दुरुपयोग की आशंका है. इसके प्रति सरकार को सतर्क होना चाहिए.
केपीएस केसरी, अध्यक्ष, बीआइए
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