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पटना : सभी थाने कब तक होंगे कंप्यूटराइज्ड

Updated at : 04 Sep 2019 9:12 AM (IST)
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पटना : सभी थाने कब तक होंगे कंप्यूटराइज्ड

सख्ती. हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में बताने का दिया आदेश पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में यह बताने को कहा है कि राज्य के सभी पुलिस थाने कब तक कंप्यूटराइज्ड हो जायेंगे. जस्टिस शिवाजी पांडेय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने ओम प्रकाश कुमार द्वारा इस संबंध में […]

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सख्ती. हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में बताने का दिया आदेश
पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में यह बताने को कहा है कि राज्य के सभी पुलिस थाने कब तक कंप्यूटराइज्ड हो जायेंगे. जस्टिस शिवाजी पांडेय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने ओम प्रकाश कुमार द्वारा इस संबंध में दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. कोर्ट को याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि पुलिस थानों में जो केस डायरी लिखी जाती है, वह हाथ से लिखी जाती है. इसे पढ़ना मुश्किल होता है.
हाथों से डायरी लिखने के कारण कोर्ट में न्यायिक व्यवस्था में भी कठिनाई होती है. इस मामले में राज्य सरकार की ओर से जो जवाब आया, उसमें पैसों की कमी के अलावे विशेषज्ञों की कमी की बात कही गयी, जो कंप्यूटर पर काम कर सकें .कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित करते हुए सरकार से यह जानकारी मांगी है.
कैश फॉर जस्टिस मामले में अब 23 सितंबर को होगी सुनवाई
पटना. पटना हाइकोर्ट ने कैश फॉर जस्टिस प्रकरण में रिश्वत मांगते कोर्ट कर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने के लिये दायर लोकहित याचिका पर अब 23 सितंबर को सुनवाई की जायेगी.
न्यायाधीश शिवाजी पांडेय एवं न्यायाधीश पार्थ सारथी की खंडपीठ ने हाइकोर्ट के अधिवक्ता दिनेश द्वारा दायर लोकहित याचिका पर मंगलवार को आंशिक सुनवाई की. खंडपीठ ने हाइकोर्ट प्रशासन को कहा कि वह अगली सुनवाई तक संबंधित कोर्ट कर्मियों, जिनके खिलाफ टीवी चैनलों में घूस मांगने की बात दिखायी गयी है, उनके खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही की अद्यतन स्थिति की जानकारी कोर्ट में उपलब्ध करायी जाये. अधिवक्ता दिनेश ने कोर्ट से कहा की नवंबर 2017 में पटना सिविल कोर्ट कर्मियों द्वारा रिश्वत मांगने और कोर्ट के आदेश की सौदेबाजी करने का स्टिंग ऑपरेशन पूरे देश ने देखा है. इस घटना को दो वर्ष बीत गये, लेकिन आज तक इस मामले में संलिप्त कोर्ट कर्मियों के खिलाफ कोई एफआइआर तक दर्ज नहीं हुई है. हाइकोर्ट की तरफ से यह आश्वस्त किया गया है कि इस मामले में संलिप्त एक भी कर्मी को बख्शा नहीं जायेगा.
हाइकोर्ट ने पिछली सुनवाइयों में भी यह इंगित किया था कि अनुशासनात्मक कार्रवाई की अंतिम रिपोर्ट को देखने के बाद ही, हाइकोर्ट प्राथमिकी दर्ज करने के संदर्भ में अंतिम निर्णय लेगा. वहीं, हाइकोर्ट प्रशासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई अंतिम दौर में है. स्टिंग ऑपरेशन करने वाले रिपब्लिक चैनल से स्टिंग ऑपरेशन की सीडी प्राप्त कर ली गयी है. हाइकोर्ट ने पूरी कार्रवाई की अद्यतन जानकारी अगली सुनवाई यानी 23 सितंबर तक प्रस्तुत करने का आदेश हाइकोर्ट प्रशासन को दिया.
स्कूलों को अपग्रेड करने के तरीके पर हाइकोर्ट हैरान
पटना. पटना हाइकोर्ट ने स्कूलों के अपग्रेड करने के तौर तरीके पर राज्य सरकार से चार सप्ताह में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया. अदालत को उस समय हैरानी हुई जब जानकारी मिली कि जिन 290 स्कूलों को अपग्रेडकिया गया, उनमें से 80 प्रतिशत स्कूल बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के रेगुलेशन, 2011 का पालन नहीं करते हैं. इसके बावजूद स्कूलों को अपग्रेड कर दिया गया. बुद्धदेव महतो एवं अन्य लोगों ने लोकहित याचिका दायर कर यह आरोप लगाया था. मंगलवार को न्यायाधीश शिवाजी पांडेय एवं न्यायाधीश पार्थ सारथी की दो सदस्यीय खंडपीठ ने सुनवाई की. वरीय अधिवक्ता शशि अनुग्रह नारायण ने कोर्ट को बताया कि सूचना के अधिकार के तहत 290 अपग्रेड
किये स्कूलों की जानकारी ली गयी. इसमें 80 प्रतिशत ऐसे स्कूल हैं, जिनकेपास भूमि बहुत कम है. कुछ स्कूलों में एक दो शिक्षक ही हैं. कुछ स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. जिन स्कूलों के संचालकों की पहुंच थी, उन्हें अपग्रेड कर दिया गया.
स्मार्टफोन की खरीदारी में अनियमितता पर दें जवाब
पटना. पटना हाइकोर्ट ने आइसीडीएस योजना के तहत स्मार्ट फोन की खरीदारी में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय व न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने शशि कुमार की जनहित याचिका को सुनते हुए उक्त आदेश दिया. कोर्ट को बताया गया कि करीब 34 हजार स्मार्ट फोन 9100 रुपये प्रति पीस के हिसाब से खरीदे गये, जबकि बाजार में इनकी कीमत 6500 रुपये ही है. यह सार्वजनिक धन की लूट है. कोर्ट को यह भी बताया गया कि फिर इस योजना के तहत 73 हजार स्मार्ट फोन खरीदे जाने की योजना है.
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