बिहार में झारखंड की तर्ज पर नौकरियों में स्थानीय को 100% आरक्षण की मांग

Updated at : 01 Sep 2019 3:54 AM (IST)
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बिहार में झारखंड की तर्ज पर नौकरियों में स्थानीय को 100% आरक्षण की मांग

पटना : झारखंड के तर्ज प र बिहार में भी सरकारी नौकरियों में स्थानीय आरक्षण की मांग उठने लगी है. झारखंड सरकार द्वारा लागू किये गये नये प्रावधान को लेकर राजद विधायक भोला यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिख कर सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है. झारखंड का हवाला देते हुए राजद […]

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पटना : झारखंड के तर्ज प र बिहार में भी सरकारी नौकरियों में स्थानीय आरक्षण की मांग उठने लगी है. झारखंड सरकार द्वारा लागू किये गये नये प्रावधान को लेकर राजद विधायक भोला यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिख कर सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है.

झारखंड का हवाला देते हुए राजद विधायक ने लिखा है कि वहां की कैबिनेट ने तृतीय, चतुर्थ व अराजपत्रित वर्ग-दो की नौकरियों में सिर्फ स्थानीय अभ्यर्थियों को ही नौकरी देने का निर्णय लिया है. इस तरह से 100 प्रतिशत स्थानीय अभ्यर्थियों को इस आरक्षण के प्रावधान का लाभ मिलेगा.
रोजगार के संकट से जूझ रहे बिहार के युवाओं के साथ दूसरे राज्यों में सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है : भोला यादव के मुताबिक इसके पूर्व भी 16 राज्यों में स्थानीय अभ्यर्थियों के लिए शिक्षा और सरकारी सेवा में आरक्षण का प्रावधान है.
बिहार विधानसभा के 13वें सत्र के दौरान अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से भी सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया गया था. इस संबंध में सरकार का पक्ष रखते हुए ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन को बताया था कि वह वरीय अधिकारियों की टीम ऐसे राज्यों में भेज कर स्थानीय आरक्षण के प्रावधान का अध्ययन करायेंगे.
इस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. रोजगार के संकट से जूझ रहे बिहार के युवाओं के साथ दूसरे राज्यों में सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है. ऐसे में अब समय आ गया है जब राज्य सरकार की नौकरियों में स्थानीय आरक्षण का प्रावधान किया जाये.
क्या है मामला
झारखंड सरकार ने प्रदेश की नौकरियों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की पूरी नौकरियां स्थानीय लोगों के नाम की
इसके लिए जितने भी विज्ञापन निकाले गये थे, सभी को रद्द कर दिया गया और अब नये सिरे से विज्ञापन जारी किये जायेंगे
बिहार सरकार की नौकरियों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.
आरक्षण का लाभ सिर्फ बिहार के युवाओं को मिलता है.
हाल के दिनों में व्याख्याताओं की नियुक्ति में अंग्रेजी समेत कई विषयों में आधे से अधिक लोग दूसरे राज्यों से चयनित हुए.
न्यायिक सेवा की भर्ती में भी दूसरे राज्यों के लोग अधिक नियुक्त हुए हैं.
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