गुरु से मिले रामविलास चरण छू लिया आशीष, दुशाला ओढ़ा किया सम्मानित, भेंट किये फल व 50 हजार नकद

Updated at : 13 Aug 2019 7:25 AM (IST)
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गुरु से मिले रामविलास चरण छू लिया आशीष, दुशाला ओढ़ा किया सम्मानित, भेंट किये फल व 50 हजार नकद

पटना सिटी : केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान सोमवार को खल्ली छुआ कर पढ़ाई की शुरुआत कराने वाले शिक्षक कन्हैया प्रसाद से मिलने पानदरीवा गली गुजरी बाजार स्थित उनके आवास पर पहुंचे. जहां मंत्री के इंतजार में बैठका में बैठे शिक्षक कन्हैया प्रसाद के पास आकर पहले उनका चरण स्पर्श किया. फिर कुशल- क्षेम पूछ दुशाला […]

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पटना सिटी : केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान सोमवार को खल्ली छुआ कर पढ़ाई की शुरुआत कराने वाले शिक्षक कन्हैया प्रसाद से मिलने पानदरीवा गली गुजरी बाजार स्थित उनके आवास पर पहुंचे. जहां मंत्री के इंतजार में बैठका में बैठे शिक्षक कन्हैया प्रसाद के पास आकर पहले उनका चरण स्पर्श किया. फिर कुशल- क्षेम पूछ दुशाला ओढ़ा कर गुरुजी को सम्मानित किया. मंत्री फूलों के गुलदस्ता, परिवार व गुरुजी के लिए वस्त्र व फलों की टोकरी लेकर पहुंचे थे.

लगभग एक घंटा तक ठहरे मंत्री ने पुरानी बातों को याद करते हुए साथ रहे फुफेरे भाई वीरेंद्र पासवान की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि इससे भी पूछते थे, तो यह नहीं बता पाता था. खैर जब पता चला तो मिलने की इच्छा हुई, आज चले आये. मंत्री ने गुरुजी को 50 हजार की राशि भी सहायता के लिए प्रदान की. मंत्री का स्वागत करने के लिए लोजपा नेताओं की टोली पहुंची थी.

अतीत को याद कर भावुक हुए शिक्षक कन्हैया प्रसाद
मंत्री को पास बैठा देख शिक्षक कन्हैया प्रसाद अतीत को याद कर भावुक हो उठे. शिक्षक कहते हैं कि यह खुशी की बात है कि यह मिलने आये हैं. शिक्षक बताते हैं कि रामविलास जी 1952 में नदी के किनारे पर स्थित जगमोहरा स्कूल में पढ़ाई करने के लिए अपने भाई पशुपति कुमार पारस व फुफेरे भाई वीरेंद्र के साथ आते थे. उन्होंने बताया कि वे नरहन से एक साल पहले यहां आकर रह रहे हैं.
पीएम करेंगे विमोचन, किताब में गुरुजी का भी है नाम
गुरु से मिल भावविभोर हुए रामविलास पासवान ने कहा कि उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें सबसे पहले गुरुजी का वर्णन है. इस पुस्तक का विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराना है. मंत्री ने कहा कि उस जमाने में बोर्ड नहीं होता था, जमीन पर ही पिता जी के कहने पर खल्ली छुआने का काम कराया गया. घर से पांच किलो मीटर दूर दो नदी पार कर स्कूल जाते थे.मंत्री ने कहा कि 1954 तक गुरुजी से कक्षा चार तक पढ़ाई की.
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