पटना : सड़क व सरकारी भवन बनाने में नहीं कटेंगे पेड़
Updated at : 01 Aug 2019 8:35 AM (IST)
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पटना : सड़क और सरकारी भवन बनाने में अब पेड़ नहीं काटे जायेंगे. इसका मकसद अर्बन हीट आइलैंड और अर्बन हाइड्रोलॉजी डिस्टरबेंस को खत्म करना है. आबादी के बीच बन रहे इस संबंध में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने निर्देश जारी किया है. इसके तहत सरकारी निर्माण कार्यों के बीच आने वाले पेड़ों […]
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पटना : सड़क और सरकारी भवन बनाने में अब पेड़ नहीं काटे जायेंगे. इसका मकसद अर्बन हीट आइलैंड और अर्बन हाइड्रोलॉजी डिस्टरबेंस को खत्म करना है. आबादी के बीच बन रहे इस संबंध में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने निर्देश जारी किया है.
इसके तहत सरकारी निर्माण कार्यों के बीच आने वाले पेड़ों को काटने की बजाय अन्य विकल्प तलाशना होगा. इन विकल्पों में पेड़ों के अनुसार सड़क और भवन निर्माण किया जायेगा. इस काम में मदद के लिए वृक्ष संवर्द्धन अधिकारी की नियुक्ति की जायेगी.
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि वृक्ष संवर्द्धन अधिकारी सरकारी निर्माण कार्यों की योजना बनाने के लिए आर्किटेक्ट, डिजाइन कंसल्टेंट और वन प्रमंडल अधिकारी के साथ स्थल निरीक्षण करेंगे. वहां निर्माण कार्य में जितने पेड़ बाधा बन रहे होंगे, उन सभी की संरचनाओं के अनुसार ही निर्माण कार्य की डिजाइन तैयार की जायेगी.
पेड़ काटने में बरती जायेगी सावधानी : विभाग के निर्देश के अनुसार यदि पेड़ सूखें हों, पेड़ को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने पर उनके सूखने का अंदेशा हो या फिर बहुत बड़ा पेड़ हो, उसके आकार के कारण तकनीकी और व्यावहारिक रूप से एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करना संभव नहीं हो. ऐसी स्थिति में पेड़ काटे जा सकते हैं.
अर्बन हीट आइलैंड और अर्बन हाइड्रोलॉजी डिस्टरबेंस का खतरा टलेगा : विभाग के अनुसार बड़े पेड़ों को काटने के बाद उससे पर्यावरण को होने वाली हानि की भरपायी कई छोटे पौधे लगाकर नहीं की जा सकती.
वहीं शहरी इलाकों में आबादी के विस्तार और मकानों की बेतरतीब बनावट और पेड़ों को कटने से अर्बन हीट आइलैंड और अर्बन हाइड्रोलॉजी डिस्टरबेंस की समस्या होने लगी है. बड़े पेड़ों की कटायी रुकने से समस्या नियंत्रित होगी.
क्या है अर्बन हीट आइलैंड और अर्बन हाइड्रोलॉजी डिस्टरबेंस : दरअसल सूर्य की गर्मी जब पक्के मकान अवशोषित कर लेते हैं तो बेतरतीब बनावट के कारण मकान 24 घंटे में ठंडा नहीं हो पाते. ऐसे में उस खास एरिया का तापमान आसपास के तापमान से अधिक रहता है.
इस स्थिति को अर्बन हीट आइलैंड कहते हैं. वहीं पेड़ों की कमी और मिट्टी पर कंक्रीट की परत के कारण शहरी क्षेत्रों में बारिश का पानी जमीन के नीचे नहीं जा पाता. इससे ग्राउंड वाटर लेवल कम होने लगता है.
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