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पटना : यूजीसी अनुदान में अनियमितता पर मांगी रिपोर्ट

Updated at : 30 Jul 2019 9:07 AM (IST)
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पटना : यूजीसी अनुदान में अनियमितता पर मांगी रिपोर्ट

पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य के शिक्षण संस्थाओं को यूजीसी द्वारा दिये गये अनुदानों में की गयी वित्तीय अनियमितता और यूजीसी द्वारा दोषियों पर की जा रही धीमी कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की है. जस्टिस ज्योति शरण और जस्टिस पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने वेटरन फोरम द्वारा इस मामले को लेकर दायर लोकहित याचिका […]

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पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य के शिक्षण संस्थाओं को यूजीसी द्वारा दिये गये अनुदानों में की गयी वित्तीय अनियमितता और यूजीसी द्वारा दोषियों पर की जा रही धीमी कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की है. जस्टिस ज्योति शरण और जस्टिस पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने वेटरन फोरम द्वारा इस मामले को लेकर दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई की.
खंडपीठ ने यूजीसी को तीन महीने की मोहलत देते हुए कहा कि वह इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई कर अगली सुनवाई में कार्रवाई रिपोर्ट पेश करे. यूजीसी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि लगभग 100 करोड़ रुपये या तो इन शिक्षण संस्थाओं से वसूले गये हैं या उपयोगिता प्रमाणपत्र प्राप्त हो चुके हैं. कोर्ट ने यूजीसी से पूछा कि अब तक आपने इन शिक्षण संस्थानों पर क्या कार्रवाई की है. इन कॉलेजों व जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गयी है. कोर्ट ने विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई पर उपलब्ध कराने को कहा.
पटना : पटना उच्च न्यायालय ने अदालती आदेश के एक वर्ष पूरे होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के लिपिकीय संवर्ग में कार्यरत कर्मियों को प्रोन्नति नहीं दिये जाने पर नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर इन चीफ नर्सिंग को छह अगस्त को अदालत में तलब किया है. न्यायाधीश शिवाजी पांडे की एकलपीठ ने सुभाष कुमार सिंह एवं अन्य द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. अदालत को
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बनवारी शर्मा और अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह द्वारा बताया गया कि 7 सितंबर, 2018 को हाइकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत लिपिक के पद पर कार्यरत कर्मियों को वरीय कोटि में प्रोन्नति देने की कार्रवाई करने को कहा था. लेकिन अदालती आदेश के एक वर्ष पूरे होने के बावजूद अभी तक इन लोगों को प्रोन्नति नहीं दी
गयी है. प्रोन्नति नहीं दिये जाने के कारण लिपिक संवर्ग में कार्यरत कर्मियों को काफी परेशानी हो रही है. पिछली सुनवाई पर हाइकोर्ट में दो जिलों के सिविल सर्जन को अदालत में तलब किया था.
अदालत को बताया गया था कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिपिक संवर्ग के लोगों को वरीय कोटि में प्रोन्नति देने के लिए कोई भी निर्देश नहीं दिया है. जब तक दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं होता है, तब तक इन लोगों को प्रोन्नति देना मुश्किल है. इसी मामले पर हाइकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए डायरेक्टर इन चीफ नर्सिंग को अदालत में तलब किया है.
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