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दो वर्षों में भ्रष्टाचार के दर्ज 165 मामलों में 170 आरोपित 18 हुए बर्खास्त, 29 निलंबित, सिर्फ नौ हो सके दोषमुक्त

Updated at : 30 Jul 2019 7:50 AM (IST)
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दो वर्षों में भ्रष्टाचार के दर्ज 165 मामलों में 170 आरोपित 18 हुए बर्खास्त, 29 निलंबित, सिर्फ नौ हो सके दोषमुक्त

अनुज शर्मा भ्रष्ट अफसरों को सजा दिलाने में जुटी विजिलेंस-इओयू पटना : प्रदेश में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति कारगर साबित हो रही है. राज्य सरकार की एजेंसियां-निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई आैर आर्थिक अपराध इकाई भ्रष्टाचारी अफसरों को कोर्ट से सजा दिलाने में मुस्तैद हैं. पिछले दो […]

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अनुज शर्मा
भ्रष्ट अफसरों को सजा दिलाने में जुटी विजिलेंस-इओयू
पटना : प्रदेश में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति कारगर साबित हो रही है. राज्य सरकार की एजेंसियां-निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई आैर आर्थिक अपराध इकाई भ्रष्टाचारी अफसरों को कोर्ट से सजा दिलाने में मुस्तैद हैं.
पिछले दो सालों में बिहार में रिश्वत लेने के 41, आय से अधिक संपत्ति के 26 और पद के दुरुपयोग के दर्ज 98 यानी कुल 165 मामलों में 170 आरोपित बनाये गये.
इनमें 161 को विशेष अदालतों ने दंडित किया है. सिर्फ नौ अधिकारी-कर्मचारी दोषमुक्त हो पाये. दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों में से 18 को नौकरी से बर्खास्त किया गया. 29 निलंबित चल रहे. 90 कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चल रही है.
दोषी अधिकारियों में सबसे अधिक इंजीनियरों की संख्या है, जबकि सबसे बड़ी 23 साल की सजा स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर राजेश प्रसाद वर्मा आदि को हुई है. निगरानी सूत्रों के मुताबिक रिश्वत लेते हुए पकड़े गये लोक सेवकों में केवल एक ही आरोपमुक्त हो सका है. आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी एक ही अफसर अब तक आरोपमुक्त हो पाया है.
राज्य सरकार ने 2.45 लाख अधिकारियों-कर्मचारियों की संपत्ति को किया सार्वजनिक
दो वर्षों में कार्रवाई
कुल केस दर्ज 165
कुल आरोपित 170
विभागीय कार्यवाही 90
निलंबित 29
बर्खास्त 18
पूरी पेंशन जब्ती 07
अन्य दंड 10
आरोपमुक्त 09
औसतन हर माह एक भ्रष्टाचारी को जेल करा रहा विजलेंस
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो जनवरी 2018 से जून 2019 तक विशेष न्यायालय निगरानी से 14 दोषियों को सजा दिलाने में सफल रहा है.
निगरानी कांड संख्या 11/04 में तीन विभिन्न मामलों में स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर राजेश प्रसाद वर्मा आदि को 23 साल के कारावास की सजा हुई है. 10 हजार रुपये रिश्वत लेने वाले पश्चिमी चंपारण के एडीएम रंजीत प्रसाद सिंह को चार साल और 45 हजार रुपये रिश्वत के साथ पकड़े गये नवादा के डीटीओ को दो साल की कैद की सजा हुई है. 50 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़े गये सीवान के इंस्पेक्टर हनुमान राम को चार साल के कारावास की सजा व 20 हजार जुर्माना लगाया गया है.
राज्य सरकार इस मामले में बेहतर काम कर रही है. जितने भी मामले सामने आये हैं, सभी में आरोपितों के खिलाफ सबूत जुटाकर कोर्ट को समर्पित किया गया है. इसके कारण भ्रष्टाचार के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में इतने मामलों का निबटारा हो पाया है और अधिकतर मामलों में आरोपितों को सजा हो पायी है. यदि स्पेशल कोर्ट सभी जगहों पर गठित हो जाये तो और भी बेहतर परिणाम आयेंगे.
-ललित किशोर, महाधिवक्ता
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