छह कमरों में पढ़ते हैं 1800 विद्यार्थी

Updated at : 28 Jul 2019 7:50 AM (IST)
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छह कमरों में पढ़ते हैं 1800 विद्यार्थी

पटना : वाणिज्य कॉलेज में क्लासरूम के लिए सिर्फ छह कमरे हैं, जबकि उक्त कमरों में कुल तीन कोर्सों बीकॉम, एमकॉम व बीबीए के तहत 1800 सौ पढ़ रहे हैं. वहीं, बीकॉम में वोकेशनल के तहत 400 सीटें और भी बढ़ा दी गयी हैं. लेकिन उक्त छात्रों को पढ़ाने के लिए कॉलेज के पास अब […]

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पटना : वाणिज्य कॉलेज में क्लासरूम के लिए सिर्फ छह कमरे हैं, जबकि उक्त कमरों में कुल तीन कोर्सों बीकॉम, एमकॉम व बीबीए के तहत 1800 सौ पढ़ रहे हैं. वहीं, बीकॉम में वोकेशनल के तहत 400 सीटें और भी बढ़ा दी गयी हैं.

लेकिन उक्त छात्रों को पढ़ाने के लिए कॉलेज के पास अब एक इंच भी जगह नहीं है. कॉलेज के प्राचार्य ने 400 नयी सीटों की व्यवस्था के लिए हाथ खड़े कर दिये हैं और कहा है कि सरकार भवन बनाकर देगी तभी इनकी पढ़ाई शुरू होगी अन्यथा नहीं.
कॉलेज का अपना भवन नहीं : कॉलेज का भवन भी अपना नहीं है. पटना कॉलेज के ही एक भवन में उक्त कॉलेज ने शरण ले रखी है. उसी भवन में दो अन्य पीजी विभाग भी चलते हैं. साथ ही कॉलेज का कार्यालय और प्राचार्य का कक्ष, इग्नू की ऑफिस सब उसी में चलता है.
दो शिफ्ट से तीन शिफ्ट करने की स्थिति में कॉलेज नहीं हैं क्योंकि न तो कॉलेज स्टाफ और शिक्षकों की उतनी संख्या है और न ही उतनी ताकत ही है कि वे तीन शिफ्ट में काम कर सकें.
कॉलेज में शिक्षकों की भी भारी कमी है. मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ चार नियमित शिक्षक हैं. यही दो-दो शिफ्ट में पढ़ाते हैं. बीकॉम व एमकॉम में गेस्ट फैकल्टी की भी बहाली नहीं हुई है.
क्या कहते हैं विद्यार्थी व प्राचार्य
हर सत्र के चार सौ छात्रों को दो सेक्शन में बांट कर पढ़ाया जाता है. कॉलेज में एक बैच में दो सौ छात्र एक साथ पढ़ाये जाते हैं. सभी छात्र आते हैं, तो क्लास में सूई के बराबर भी जगह नहीं बचती.
अभिनव कुमार पांडेय, कॉलेज काउंसेलर, छात्र संघ
गर्ल्स वाशरूम भी कॉलेज में नहीं है. गर्ल्स कॉमन रूम में एक वॉटर कूलर था जो कि कई वर्षों से खराब है.
प्रतिभा कुमारी, बीकॉम पार्ट थ्री
यहां है जगह की कमी
हमारे पास पर्याप्त जगह नहीं है. नयी सीटों के लिए व्यवस्था हम नहीं कर सकते हैं. सैदपुर में हमारे पास जमीन है. आधी जमीन साइंस सिटी में अधिग्रहित हो चुकी है. सरकार वहां भवन बनाकर देगी तभी नये सीटों का नामांकन व क्लास शुरू होगा. अन्यथा हम इस स्थिति में नहीं हैं कि उन्हें पढ़ा सकें.
प्रो चंद्रमा सिंह, प्राचार्य, वाणिज्य कॉलेज
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