पटना : चिड़ियों व घोंसलों ने रोका नये सरकारी आवासों का निर्माण, जानें पूरा मामला

Updated at : 17 Jul 2019 7:22 AM (IST)
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पटना : चिड़ियों व घोंसलों ने रोका नये सरकारी आवासों का निर्माण, जानें पूरा मामला

अनिकेत त्रिवेदी सिया की आपत्ति : गर्दनीबाग में ऑफिसर्स फ्लैट, तीसरी श्रेणी के कर्मियों के फ्लैट निर्माण का मामला पटना : गर्दनीबाग में अधिकारी, नेता-मंत्री व कर्मचारियों के लिए फ्लैटों के निर्माण का मामला कई वर्षों से चल रहा है. विभागीय सुस्ती के बाद अब जब कुछ प्रोजेक्टों की निविदा फाइनल हो गयी है, तब […]

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अनिकेत त्रिवेदी
सिया की आपत्ति : गर्दनीबाग में ऑफिसर्स फ्लैट, तीसरी श्रेणी के कर्मियों के फ्लैट निर्माण का मामला
पटना : गर्दनीबाग में अधिकारी, नेता-मंत्री व कर्मचारियों के लिए फ्लैटों के निर्माण का मामला कई वर्षों से चल रहा है. विभागीय सुस्ती के बाद अब जब कुछ प्रोजेक्टों की निविदा फाइनल हो गयी है, तब भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है. अब मसला स्टेट इन्वायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट ऑथोरिटी (सिया) की आपत्ति को लेकर रुका हुआ है.
जानकारी के अनुसार गर्दनीबाग के दो प्रोजेक्टों पर सिया को इस बात को लेकर आपत्ति है कि अगर निर्माण होता है, तो वहां के पेड़ों पर रहने वाले पक्षी व उनके घोंसलों का क्या होगा. इसके अलावा बाहर से आने वाले साइबेरियन पक्षियों का क्या होगा. इसको लेकर भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों और सिया के लोगों के साथ बैठक भी हो चुकी है और मामला नवंबर से फंसा हुआ है.
पहले की रिपोर्ट पर आपत्ति : जानकारी के अनुसार बीते वर्ष सिया ने भवन निर्माण विभाग को प्रेजेंटेशन दिखाने के दौरान चिड़ियाें और घोंसलाें पर अध्ययन की रिपोर्ट देने को कहा था. लेकिन, यह लिखित निर्देश नहीं था. इसको लेकर विभाग व निर्माण एजेंसी की ओर से रिपोर्ट भी दी गयी.
मगर अब नये सिरे से रिपोर्ट तैयार करने को कहा जा रहा है. इसके अलावा सिया को दलदली रोड बंद करने को लेकर भी आपत्ति है. वहीं, प्रोजेक्ट पर काम कर रहे विभागीय अधिकारियों के अनुसार गर्दनीबाग के अंदर की सारी सड़कें भवन निर्माण विभाग की हैं. अगर एक सड़क बंद की जा रही है, तो अन्य कई 15-15 फुट की सड़कों को चौड़ाकर 60 फुट भी किया जा रहा है.
चार बड़े आवासीय प्रोजेक्टों का होना है काम
जानकारी के अनुसार गर्दनीबाग में कई छोटे-बड़े आवासीय प्रोजेक्ट हैं. इनमें 752 ऑफिसर्स फ्लैट, 752 तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के फ्लैट बनाये जाने हैं. इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 484 करोड़ है और इसका काम अहलुवालिया कॉन्ट्रैक्टर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को मिला है. वहीं, दूसरे प्रोजेक्ट की लागत लगभग 282 करोड़ और इसका काम यूपी राजकीय निर्माण निगम को दिया गया है. इसके अलावा 52 करोड़ की लागत वाले मंत्री के 20 बंगलाें के निर्माण को लेकर तकनीकी निविदा फाइनल की जा रही है. वहीं, 130 करोड़ की लागत से चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के 450 फ्लैटों का निर्माण किया जाना है.
क्यों जरूरी है सिया की अनुमति
राज्य सरकार अगर कोई भी निर्माण 20 हजार वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में करती है, तो उसको पर्यावरण संरक्षण के आधार पर सिया से अनुमति लेनी पड़ती है.
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