पटना : गरीबों, महिलाओं व कृषि पर पड़ रहा जलवायु परिवर्तन का असर : सुशील मोदी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Jul 2019 8:47 AM
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पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने राज्य में जलवायु परिवर्तन को लेकर हुए विमर्श में आठ घंटे की चर्चा के बाद कहा कि इसका सर्वाधिक असर गरीबों, महिलाओं व कृषि प्रक्षेत्र पर पड़ रहा है. केंद्र सरकार के निर्देश पर जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर राज्य कार्ययोजना तैयार की जा रही है जिसमें 10 विभाग कृषि, […]
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पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने राज्य में जलवायु परिवर्तन को लेकर हुए विमर्श में आठ घंटे की चर्चा के बाद कहा कि इसका सर्वाधिक असर गरीबों, महिलाओं व कृषि प्रक्षेत्र पर पड़ रहा है. केंद्र सरकार के निर्देश पर जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर राज्य कार्ययोजना तैयार की जा रही है जिसमें 10 विभाग कृषि, मत्स्य संसाधन, जल संसाधन, आपदा प्रबंधन, नगर विकास, परिवहन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, उद्योग व खनन आदि शािमल हैं.
मोदी ने कहा कि जल शक्ति अभियान में राज्य के 12 जिलों के 30 प्रखंड को शामिल किया गया था. अब इस अभियान में सभी जिलों को शामिल कर दिया गया है. राज्य सरकार ने पहले ही सभी जलस्रोतों को चिह्नित व उनकी पहचान कर उनके पुर्नस्थापन व उड़ाही का निर्णय लिया है.
सभी पौधे 4 फुट लंबे व 2 वर्ष पुराने होंगे : राज्य में एक 1 से 15 अगस्त के बीच पौधारोपण के तहत 1.75 करोड़ पौधे लगाये जायेंगे. मनरेगा के तहत 50 लाख व वन विभाग सवा करोड़ पौधा लगायेगा. सभी पौधे 4 फुट लंबे व 2 वर्ष पुराने होंगे. शहरी क्षेत्रों में गैबियन के बीच पौधे लगाये जायेंगे तथा बाद में भी उनकी देखरेख व पानी देने की व्यवस्था की जायेगी.
उन्होंने कहा कि सड़क व अन्य निर्माण के दौरान अब कोई पेड़ काटा नहीं जायेगा. पटना के सगुना मोड़ के पास एक एजेंसी के माध्यम से पेड़ों के प्रत्यारोपण का प्रयोग किया जा रहा है. विप के कार्यकारी सभापति हारुण रशीद ने कहा कि यहां के चिंतन को नीचे तक ले जाना होगा. संसदीय कार्यमंत्री श्रवण कुमार ने धन्यवाद दिया.
नदी को जोड़ने पर विचार करना होगा : पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने कहा कि नदी को जोड़ने पर विचार करना होगा. कुटीर व मंझौले उद्योग को बढ़ावा देना होगा. राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए काम करना होगा.
धरती व पर्यावरण को ऐसा बनाएं कि आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहे
विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि धरती व पर्यावरण को ऐसा बनाएं जिससे आने वाली पीढ़ी सुरक्षित रहे. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में परिवर्तन से पूरा विश्व परेशान है. बिहार के लोग हर साल बाढ़ और सुखाड़ से जूझते हैं.
बदकिस्तमती यहां तक होती है कि एक ही समय में बाढ़ और सुखाड़ का सामना करते हैं. बारिश से मीठा पानी मिलता है उसका संरक्षण आवश्यक है. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी अपना गुरु प्रकृति को मानते थे. वे आदि पर्यावरणविद थे.
तालाब व पोखर हों अतिक्रमणमुक्त
इस चर्चा के दौरान कांग्रेस के विधान पार्षद सदानंद सिंह ने सुझाव दिया कि पोखरों और तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कर पुनर्जीवित किया जाये. वृक्षों को काटने पर रोक लगे और छोटी नदियों का संरक्षण किया जाये. वहीं राजद के विधान पार्षद शिवचंद्र राम ने हर घर नल का जल योजना में निम्नस्तर के पाइप लगाने का आरोप लगाया. शक्ति सिंह यादव ने कुआं, तालाब आदि जलस्रोतों की उड़ाही और आहर-पइन को अतिक्रमण मुक्त कराने की सलाह दी.
हर घर नल में लगे बेहतर उपकरण
कांग्रेस के विधान पार्षद विजय शंकर दूबे ने हर घर नल का जल पहुंचाने में बेहतर उपकरण लगवाने व नदी लिंक योजना को लागू करने का सुझाव दिया. जदयू के संजीव श्याम सिंह ने गाेपालगंज जिले, संजय सर्राफ ने दरभंगा में तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की. जदयू की डॉ अंजू गीता ने सीतामढ़ी में नदियाें पर ध्यान देने की सलाह दी. डॉ अतुल कपूर ने मधुबनी, सुपौल, सहरसा व मधेपुरा में वज्रपात की घटनाओं में बढ़ोतरी की जानकारी दी.
सुदामा प्रसाद ने आरओ कंपनियों द्वारा भूजल दोहन की जानकारी दी. भाजपा के रजनीश कुमार ने जल संरक्षण पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि पहले लोग एक कटोरी में पानी लेकर दाढ़ी बनाते थे अब उससे 10 गुना अधिक पानी खर्च कर देते हैं.
विमर्श में इन लोगों ने भी लिया भाग
समीर कुमार महासेठ, एज्या यादव, रामानुज प्रसाद, सच्चिदानंद राय, मेवालाल जौधरी, गुलाम रसुल वलियावी, अनिल सिंह, नीतीन नवीन, कृष्ण कुमार सिंह, राहुल तिवारी, मुनेश्वर चौघरी, विजय प्रकाश, मनोज सिंह, अब्दुल सुभान, विनय वर्मा, अरुण कुमार, राजेश कुमार, पूनम पासवान, महबूव आलम.
पटना : सरकार की जिम्मेदारी है बाढ़ प्रबंधन और बचाव
पटना : जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी बाढ़ प्रबंधन और बचाव के साथ मध्यम व वृहद सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की है. अब तक 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता सृजित की गयी है.
इस वर्ष 77 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजन का लक्ष्य है. वहीं, इस वर्ष एक लाख बारह 12 हेक्टेयर में ह्रासित सिंचाई क्षमता को पुर्नस्थापित करने का लक्ष्य है. जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने शनिवार को राज्य में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न अापदाजनक स्थिति पर विमर्श पर कहा कि राज्य में 70 फीसदी से अधिक क्षेत्र यानी 38 में से 28 जिले बाढ़ प्रभावित हैं.
दूसरी तरफ पिछले वर्ष 534 में से 280 प्रखंडों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ा. पिछले हफ्ते तक कम बारिश से सूखे की आशंका थी, अभी अधिकतर नदियां खतरे के निशान से उपर बह रही है. यह जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है. विश्व में 24 फीसदी बंजर भूमि है ,जबकि भारत में बंजर भूमि 30 फीसदी हो गयी है.
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