केसीसी धारकों को कर्ज के लिए फसल बीमा की अनिवार्यता नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Jul 2019 3:49 AM (IST)
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पटना : रिजर्व बैंक ने बिहार के केसीसी धारक किसानों को बैंकों से कर्ज के लिए अब पीएम फसल बीमा योजना की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. ये बातें डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने नाबार्ड के 38वें स्थापना दिवस पर पटना स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहीं. उन्होंने कहा […]
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पटना : रिजर्व बैंक ने बिहार के केसीसी धारक किसानों को बैंकों से कर्ज के लिए अब पीएम फसल बीमा योजना की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. ये बातें डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने नाबार्ड के 38वें स्थापना दिवस पर पटना स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहीं.
उन्होंने कहा कि सरकार ने 12.48 लाख रैयतों के साथ 1.71 लाख गैर-रैयत किसानों (बटाइदारों) को भी कृृषि इनपुट सब्सिडी, 88,212 बटाइदारों से धान की खरीद व 1.80 लाख बटाइदारों को बिहार फसल सहायता योजना का लाभ केवल स्व-घोषणा के आधार दिया है. मोदी ने कहा कि बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू नहीं होने से केसीसी किसानों को कर्ज देने में बैंक आनाकानी कर रहे थे. फलतः 2018-19 में 10 लाख नये केसीसी के लक्ष्य के विरुद्ध बैंकों ने मात्र 2.19 लाख को ही कर्ज दिया.
मगर, 11 जुलाई को केंद्र सरकार की पहल पर आरबीआइ ने एक परिपत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि बैंकों को बिहार के केसीसी धारक किसानों को कर्ज देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अनिवार्यता नहीं होगी, क्योंकि बिहार सरकार किसानों से बिना प्रीमियम लिए उन्हें बिहार फसल सहायता योजना से लाभान्वित कर रही है. नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक अमिताभ लाल ने कहा कि बैंक सक्रिय रूप से कृषि तथा ग्रामीण विकास में नीतिगत पहलों के संबंध सरकार और राज्य के लोगों के सहयोगी के रूप में कार्यरत है.
विपक्ष को कुछ अच्छा होता नहीं दिख रहा : मोदी
पटना. डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि एनडीए सरकार हर मोर्चे पर सक्रिय है, लेकिन लोस चुनाव में सूपड़ा साफ होने के बाद जिनकी पार्टी भगवान भरोसे हो गयी, उन्हें बिहार में कुछ अच्छा होता नहीं दिख रहा है. बिहार के हर गांव में बिजली पहुंच गयी, 40 लाख से ज्यादा गरीबों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन मिले, 74 हजार छात्रों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के तहत कर्ज दिये गये, कानून-व्यवस्था की चूलें कसी जा रही हैं. फिर भी उन्हें िबहार में कुछ भी होता नहीं दिख रहा है.
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