पटना : संस्कृत व संस्कृति के बगैर नहीं होगा नये भारत का निर्माण : राज्यपाल

Updated at : 08 Jul 2019 8:41 AM (IST)
विज्ञापन
पटना : संस्कृत व संस्कृति के बगैर नहीं होगा नये भारत का निर्माण : राज्यपाल

पटना : स्वतंत्र भारत में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर राजभवन में राष्ट्रीय शास्त्रार्थ सभा हुई. इसमें मिथिला, काशी व दाक्षिणात्य के विद्वानों ने ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, व्यापि लक्षणं व ब्रह्सूत्र शांकर भाष्य पर शास्त्रार्थ किया. राष्ट्रीय शास्त्रार्थ सभा का उद्घाटन राज्यपाल लालजी टंडन ने किया. राज्यपाल ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से […]

विज्ञापन
पटना : स्वतंत्र भारत में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर राजभवन में राष्ट्रीय शास्त्रार्थ सभा हुई. इसमें मिथिला, काशी व दाक्षिणात्य के विद्वानों ने ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, व्यापि लक्षणं व ब्रह्सूत्र शांकर भाष्य पर शास्त्रार्थ किया.
राष्ट्रीय शास्त्रार्थ सभा का उद्घाटन राज्यपाल लालजी टंडन ने किया. राज्यपाल ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से भारतीय संस्कृति का विकास होगा. साथ ही अपनी सांस्कृतिक परंपरा के प्रति शासन का आदर-भाव भी दृष्टिगोचर होगा. संस्कृत व संस्कृति के बगैर नये भारत का निर्माण संभव नहीं है. संस्कृत व संस्कृति का अर्थ लोग नहीं जानते हैं.
संस्कृति एक सरिता है. कोई भी व्यक्ति अपनी जड़ से कटता है, तो वह नष्ट हो जाता है. संस्कृत वट वृक्ष के समान है. मिथिला, काशी व दक्षिण की पांडत्य परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि शास्त्रार्थ हमारे देश की परंपरा रही है. पश्चिम में डिबेट की कोई गुंजाइश नहीं है.
कार्यक्रम में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सर्वनारायण झा ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए विषय वस्तु से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ की परंपरा वैदिक युग से है. मिथिला में शास्त्रार्थ में महिलाओं का भी उतना ही बड़ा योगदान था, जितना पुरुषों का. शास्त्रार्थ के दौरान ही कामेशवर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय पंचांग का राज्यपाल ने िवमोचन किया. कार्यक्रम में विधान परिषद के कार्यकारी सभापति प्रो हारूण रशीद भी मौजूद थे.
तीन विषयों पर हुआ शास्त्रार्थ
राष्ट्रीय शास्त्रार्थ सभा में तीन विषयों पर चर्चा हुई. इसमें मिथिला के प्रो शशिनाथ झा व प्रो सुरेश्वर झा के बीच ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या पर चर्चा हुई. काशी के प्रो वशिष्ठ त्रिपाठी व प्रो रामपूजन पांडेय के बीच व्यापि लक्षणं (स्वाभाविक संबंध) पर चर्चा हुई. दक्षिण भारत से आये प्रो श्रीपाद सुब्रह्ण्यम व प्रो पी आर वासुदेवन के बीच ब्रह्सूत्र शांकर भाष्य (ईश्वर समदर्शी व दयालु नहीं) पर शास्त्रार्थ हुआ. इससे पहले राजेंद्र मंडपम में राज्यपाल सहित अन्य अतिथियों को पाग पहना व शॉल ओढ़ा कर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन प्रतिकुलपति प्रो सीपी सिंह ने किया.
राज्यपाल ने विद्वानों को अंगवस्त्रम व स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया. कार्यक्रम में लोकायुक्त एसके शर्मा, विधान पार्षद दिलीप कुमार चौधरी, पटना विश्वविद्यालय के कुलपति रास बिहारी सिंह, नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ आरके सिन्हा, राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार आदि उपस्थित थे.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन