केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने की एइएस की समीक्षा, कहा, इवनिंग मिल उपलब्ध कराने पर विचार कर रही सरकार

Updated at : 01 Jul 2019 9:09 AM (IST)
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केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने की एइएस की समीक्षा, कहा, इवनिंग मिल उपलब्ध कराने पर विचार कर रही सरकार

पटना : केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने पटना एम्स और आरएमआरआई के पदाधिकारियों और चिकित्सकों के साथ मुजफ्फरपुर में फैले चमकी बुखार एइएस की स्थिति की समीक्षा की. केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने समीक्षा के बाद बताया कि आगे से इसकी प्रभावी रोकथाम के िलए ज्यादा आईसीयू की स्थापना होगी. अत्याधिक गर्मी के समय […]

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पटना : केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने पटना एम्स और आरएमआरआई के पदाधिकारियों और चिकित्सकों के साथ मुजफ्फरपुर में फैले चमकी बुखार एइएस की स्थिति की समीक्षा की. केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने समीक्षा के बाद बताया कि आगे से इसकी प्रभावी रोकथाम के िलए ज्यादा आईसीयू की स्थापना होगी.
अत्याधिक गर्मी के समय दो महीने तक पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज, ओआरएस और दवाई की पूर्व से उपलब्धता सुनिश्चित होगी. मिड डे मील की तर्ज पर इवनिंग मिल उपलब्ध कराने पर भी सरकार विचार कर रही है. बीमार बच्चों को तुरंत हॉस्पिटल पहुंचाने, बच्चों के लिए दो महीने की टेंपरेरी शेल्टर होम की व्यवस्था, आंगनबाड़ी के माध्यम से न्यूट्रीशनल भोजन की उपलब्धता खाने में फोर्टीफिकेशन को बढ़ावा देना और पर्याप्त पानी की उपलब्धता आदि जैसे सुझाव बैठक में आये हैं.
इसके कार्यान्वयन पर विचार हुआ है. बैठक में राज्य में फैले जानलेवा एइएस के बारे में गठित केंद्रीय मेडिकल टीम की जांच और शोध पर विस्तार से चर्चा हुई. एइएस पर प्रभावी कदम उठाने, आगे से इस पर पूर्ण लगाम लगाने के उपायों पर तैयारी समय पूर्व कर लेने और इस पर पूर्ण नियंत्रण के लिए सभी महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्देश मंत्री ने दिया है. बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि बीमारी फैलने के बाद गठित केंद्रीय टीम मुजफ्फरपुर में लगातार रुक कर रोग फैलने की सभी संभावित जांच और शोध के आधुनिक तरीकों को अपनाया गया है.
आधुनिक मशीनों से प्रभावित बच्चों के बायोकेम, अमोनिया ऐस्टीमेशन, लीवर व मस्क्यूलर इंवॉल्वमेंट, ब्रेन शुगर की सहित ऑर्गन डस्फिंक्शनल होने आदि से संबंधित सभी जांच की गयी है. यह संक्रमण वाला रोग नहीं है. जापानी इंसेफेलाइटिस की भी संभावना कम है. हाइपोग्लाइसीमिया एक महत्वपूर्ण कारण है जिसके कारण प्रभावित बच्चों में शुगर की 90 फीसदी तक की कमी पायी गयी, पर इसमें लीची वाला कारण ज्यादा प्रभावी नहीं है.
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