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गर्मी की मार, खेतों में दरार, सूख गये बिचड़े

Updated at : 21 Jun 2019 4:19 AM (IST)
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गर्मी की मार, खेतों में दरार, सूख गये बिचड़े

अजय कुमार, मसौढ़ी : माॅनसून पूर्व बारिश नहीं होने से अनुमंडल के तीनों प्रखंडों मसौढ़ी व धनरूआ एवं पुनपुन के किसानों चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं . इनके चेहरे मुरझाने लगे हैं .पिछले वर्ष भी औसत से कम वर्षा होने की वजह से लक्ष्य से काफी कम पैदावर हुई थी .इस वर्ष […]

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अजय कुमार, मसौढ़ी : माॅनसून पूर्व बारिश नहीं होने से अनुमंडल के तीनों प्रखंडों मसौढ़ी व धनरूआ एवं पुनपुन के किसानों चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं . इनके चेहरे मुरझाने लगे हैं .पिछले वर्ष भी औसत से कम वर्षा होने की वजह से लक्ष्य से काफी कम पैदावर हुई थी .इस वर्ष तो अब तक बारिश नहीं होने से अधिकतर किसान धान के बिचड़े अब तक नहीं डाल पाये हैं, जबकि बिचड़ा डालने का उपयुक्त समय रोहनी नक्षत्र समाप्त हो अद्रा नक्षत्र प्रारंभ हो गया है .इधर, बारिश के अभाव मे कुछ किसानों द्वारा निजी मोटर व सबमर्सिबल पंप से लगाये गये बिचड़े भी मुरझाने लगे है .
भू- जल स्तर इतना नीचे चला गया है कि सबमर्सिबल मोटर को छोड़ कर कोई भी मोटर नहीं चल पा रहा है .इधर, कृषि जानकारों का कहना है कि अद्रा नक्षत्र भी बिचड़ा डालने के लिए उपयुक्त है, अगर अभी से भी बारिश हो जाती है, तो किसान अपने खेत में बिचड़े को डाल धान की खेती कर सकते हैं. फिलहाल किसानों के खेत में पड़ रही दरार व उड़ रहे धूल ने उनकी चिंता बढ़ा दी है और वे अब इंद्र देवता की ओर निहार रहे हैं .
अनुमंडल के तीनों प्रखंडों के लोग मुख्यतः कृषि पर ही आश्रित हैं. पिछले वर्ष भी हुई कम बारिश के कारण लक्ष्य से काफी कम पैदावर ने इस वर्ष भी अब तक बारिश नहीं होने से उनकी चिंता को और बढ़ा दिया है . कृषि विभाग की मानें तो अनुमंडल के तीनों प्रखंडों में इस वर्ष कुल 23600 हेक्टेयर में धान की रोपनी का लक्ष्य रखा गया है
.इसके आलोक में 2360 हेक्टेयर मे धान का बिचड़ा खेतों में पड़ जाना चाहिए था , लेकिन माॅनसून की बेरुखी व निजी संसाधनों की कमी के साथ साथ भू-जल स्तर के नीचे चले जाने की वजह से अब तक मात्र 355 हेक्टेयर में ही बिचड़े डाले गये हैं .पानी की कमी की वहज से डाले गये बिचड़े की भी हालत खराब है. अधिकतर खेतों में दरार पड़ गये है और बिचड़े सूखने लगे हैं.
बािरश नहीं होने से िदक्कत
इस वर्ष अब तक माॅनसून नहीं आने की वजह से अनुमंडल मे धान का बिचड़ा किसानों द्वारा बहुत कम डाला गया है .मौसम को देखते हुए जगह- जगह चौपाल लगाकर कम पानी में अधिक उत्पादन के लिए किसानों को कई प्रकार की जानकारी दी जा रही है .
राजीव कुमार अनुमंडल कृषि पदाधिकारी
अनुमंडल के तीनों प्रखंडों की स्थिति
धान की रोपनी का लक्ष्य 11400 हेक्टेयर
बिचड़े लगाने का लक्ष्य 1140 हेक्टेयर
अब तक लगा बिचड़ा 70 हेक्टेयर, मात्र 6 प्रतिशत
धान की रोपनी का लक्ष्य 7200 हेक्टेयर
बिचड़े लगाने का लक्ष्य 720 हेक्टेयर
अब तक लगा बिचड़ा 210 हेक्टेयर, 30 प्रतिशत
धान की रोपनी का लक्ष्य 5000 हेक्टेयर
बिचड़े लगाने का लक्ष्य 500 हेक्टेयर
अब तक लगा बिचड़ा 75 हेक्टेयर, 15 प्रतिशत
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