बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले : पीके अग्रवाल

Updated at : 19 Jun 2019 9:29 AM (IST)
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बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले : पीके अग्रवाल

पटना : जनसंख्या के मामले में बिहार देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन कई मोर्चों पर यह पश्चिमी और उत्तरी राज्यों से बहुत पीछे है. यह वर्ष बिहार के लिए एक सपना वर्ष है, क्योंकि एक लंबी प्रतीक्षा अवधि के बाद, इसने राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को देखा है जो राज्य के […]

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पटना : जनसंख्या के मामले में बिहार देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन कई मोर्चों पर यह पश्चिमी और उत्तरी राज्यों से बहुत पीछे है. यह वर्ष बिहार के लिए एक सपना वर्ष है, क्योंकि एक लंबी प्रतीक्षा अवधि के बाद, इसने राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को देखा है जो राज्य के विकास के लिए काम कर रहे हैं. बिहार को आगामी बजट में उम्मीदें हैं.
ये बातें बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने प्रभात खबर से विशेष बातचीत में कहीं. उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2019-20 के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री से कई मुद्दों पर सुझाव और मांगें रखी गयी हैं. उम्मीद है कि वित्त मंत्री चैंबर के सुझाव और मांग पर विशेष ख्याल रखेंगी. राज्य को हमेशा बाढ़ एवं प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है. इससे भी राज्य को काफी नुकसान होता है. अत: बिहार के उत्थान के लिए एक ही विकल्प बचता है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाये.
गैस पाइप लाइन से जोड़ने की जरूरत
उन्हाेंने बताया कि उत्तर बिहार में तेजी से औद्योगिकीकरण के लिए गैस पाइप लाइन से जोड़ने की आवश्यकता है. अभी सूबे में गैस पाइप लाइन का काम केवल दक्षिण और पूर्व बिहार में मुख्य रूप से हो रहा है. अग्रवाल ने बताया कि विनिर्माण क्षेत्र में बिहार काफी पिछड़ा हुआ है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयास के बावजूद बिहार में निवेश के लिए राष्ट्रीय या बहुराष्ट्रीय कंपनियां निवेश के लिए आगे नहीं आयी हैं.
विनिर्माण क्षेत्र में अधिक-से-अधिक पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए पांच सालों के लिए सब्सिडी दी जाये. साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में पूंजी निवेश में रियायत की जो दर है, वह आकर्षक बनायी जाये, जिससे ग्रामीण युवाओं का बड़े शहरों में पलायन रुक सके. अत: बजट में विशेष प्रोत्साहन अनुदान देने का अनुरोध किया है.
उच्च शैक्षणिक संस्थानों की घोर कमी : उन्होंने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में आगे रहने के बावजूद यहां उच्च शैक्षणिक संस्थानों की घोर कमी है. इसके कारण छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे प्रदेशों में जाना पड़ता है. इसलिए यहां उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया जाये.
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