पटना : भारत-नेपाल सीमा सड़क 2020 तक होगी तैयार, इस परियोजना के तहत राज्य में बनेंगे 121 पुल
Updated at : 13 Jun 2019 9:25 AM (IST)
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पटना : देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना के रास्ते में राज्य में कुल 121 पुल परियोजनाएं हैं. इनके निर्माण का कार्य चल रहा है. इस पर करीब नौ अरब 84 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है. इस परियोजना के रास्ते के छह जिलों पश्चिम […]
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पटना : देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना के रास्ते में राज्य में कुल 121 पुल परियोजनाएं हैं.
इनके निर्माण का कार्य चल रहा है. इस पर करीब नौ अरब 84 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है. इस परियोजना के रास्ते के छह जिलों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया और किशनगंज में इन पुलों का निर्माण होना है. केंद्र सरकार ने इस सड़क को मार्च 2022 तक बनाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन बिहार सरकार इसे दिसंबर 2020 तक ही पूरा करने की कोशिश में है.
पथ निर्माण विभाग के सूत्रों का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा पर बिहार में 557 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाना है. हालांकि, करीब 679 किलोमीटर लंबी यह सड़क पश्चिम चंपारण के मदनपुर से किशनगंज के गलगलिया तक सात जिलों से होकर गुजरेगी. इनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया, सुपौल और किशनगंज शामिल हैं.
सबसे पहले 2010 के दिसंबर में पहले राज्य के रूप में बिहार द्वारा डीपीआर बनाकर बजट केंद्र को भेजा गया था. सड़क निर्माण में देरी का करण भूमि अधिग्रहण की समस्या है. भारत-नेपाल सीमा पर सात जिलों के बीच 365 गांवों में 2894 एकड़ भूमि का अधिग्रहण होना है. इसकी प्रक्रिया चल रही है.
ग्रामीण सड़कें होंगी चकाचक
पटना : सूबे की जर्जर हो चुकी ग्रामीण सड़कें जल्द ही चकाचक होंगी. ग्रामीण कार्य विभाग ने इसकी कार्ययोजना बना ली है. अगले दो साल में 44 हजार किलोमीटर सड़क दुरुस्त करने की जिम्मेदारी विभाग ने उठाया है.
चालू वित्तीय वर्ष में 17500 किलोमीटर सड़कें दुरुस्त होनी हैं. पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विभागीय मंत्री शैलेश कुमार के साथ समीक्षा की थी. एक किलोमीटर सड़क के मेंटेनेंस पर 25 से 30 लाख रुपये खर्च होंगे. जहां जरूरत महसूस होगी वहां सड़क चौड़ी भी की जायेगी. ट्रैफिक लोड के अनुसार सड़क को मजबूत भी किया जायेगा. राज्य में ग्रामीण कार्य विभाग के पास 1.24 लाख किलोमीटर सड़क है. इसमें से 44 हजार किलोमीटर सड़कें ऐसी हैं, जो पांच साल के रखरखाव के समय सीमा से या तो बाहर हो गया है या फिर जर्जर हो चुकी है. ग्रामीण कार्य विभाग ने अपनी सड़कों के रखरखाव के लिए मेंटनेंस पॉलिसी बनायी है.
इसी पालिसी के तहत सड़कों का अब रखरखाव होना है. इस साल 17500 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत होनी है. इसके बाद दो साल में बची हुई सड़कों का रखरखाव होगा. नयी मेंटेनेंस पॉलिसी में ठेकेदार को सड़क की मरम्मत तो करनी ही है साथ ही पांच सालों तक उसका रखरखाव भी करना है.
तीस लाख खर्च होंगे एक किमी सड़क दुरुस्त करने में
एक किमी सड़क दुरुस्त करने में 25 से 30 लाख रुपये खर्च होंगे. सड़क की मरम्मत में सुरक्षा मानकों का पूरा ख्याल रखा जायेगा. सड़कों के किनारे पौधरोपण होगा.
साइनेज भी लगाये जायेंगे. अभी वैसी सड़क को लिया गया है, जो मुख्य सड़क को जोड़ने वाली है या फिर अस्पताल या बड़े सरकारी कार्यालय को जोड़ने वाली सड़कें हैं. ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़कों के रखरखाव के लिए चिंतित हैं. 2020 तक सभी खराब सड़कों को ठीक कर लिया जायेगा. सड़क के रखरखाव में मानक और गुणवत्ता का ख्याल रखा जा रहा है.
भवन निर्माण में शिकायत निवारण समिति गठित
पटना : भवन निर्माण विभाग में विभागीय शिकायत निवारण समिति का गठन किया गया है. समिति में अध्यक्ष सहित तीन सदस्य व एक समन्वयक सदस्य शामिल हैं. समिति के समक्ष विभाग में लंबित सेवांत लाभ, प्रोन्नति, समादेशवाद, अवमाननावाद से संबंधित मामले के निबटारे के लिए रखा जायेगा. इस पर समिति उचित निर्णय लेगी. समिति की बैठक प्रत्येक दूसरे माह के प्रथम सोमवार को आयोजित होगी. अगर इस दिन अवकाश रहेगा दूसरे कार्यदिवस को बैठक होगी.
लोकेश सिंह ने संभाला उद्योग सचिव का कामकाज
पटना : लोकेश कुमार सिंह ने बुधवार को राज्य के उद्योग सचिव का कामकाज संभाल लिया. पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर विभाग के कामकाज व योजनाओं की जानकारी ली.
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