पटना : घरौंदों में इलाज करेगी मोबाइल मेडिकल यूनिट
Updated at : 13 May 2019 8:43 AM (IST)
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सफाईकर्मियों को अलग से मेडिकल सेवा देने वाला पहला स्मार्ट सिटी बनेगा पटना पटना : देश के 100 स्मार्ट शहरों में पटना पहला ऐसा शहर बनने जा रहा है, जहां की स्लम बस्तियों (घरौंदों) में विशेष चिकित्सा सेवाएं दी जायेगी. इसमें सबसे पहले मोबाइल मेडिकल वैन यूनिट शुरू की जायेगी. जून माह से यह सुविधा […]
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सफाईकर्मियों को अलग से मेडिकल सेवा देने वाला पहला
स्मार्ट सिटी बनेगा पटना
पटना : देश के 100 स्मार्ट शहरों में पटना पहला ऐसा शहर बनने जा रहा है, जहां की स्लम बस्तियों (घरौंदों) में विशेष चिकित्सा सेवाएं दी जायेगी.
इसमें सबसे पहले मोबाइल मेडिकल वैन यूनिट शुरू की जायेगी. जून माह से यह सुविधा प्रारंभ हो जायेगी. पहले चरण में शहर की दस स्लम बस्तियों के लिए ये सेवा शुरू की जायेगी. इसके अलावा इन बस्तियों में बेहतर पेयजल, शौचालय और बिजली सुविधाएं भी दी जायेगी.
इन सेवा और सुविधाओं का विस्तार द यूनाइटेड नेशन पाॅपुलेशन फंड (यूएनएफपीए) के तकनीकी सहयोग से किया जायेगा. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक यह मोबाइल यूनिट पहले चरण में रक्तचाप से लेकर दूसरे सभी तरह की सभी जांच और इलाज नि:शुल्क करेगी. इस यूनिट में यूएनएफपीए के प्रशिक्षित एक्सपर्ट काम करेंगे. इसके अलावा दूसरी सुविधाओं का विस्तार किया जायेगा.
यह समूची योजना ‘ स्मार्ट व संवेदनशील पटना ‘ कार्यक्रम के तहत प्रभावी की जायेगी. इस कार्यक्रम के तहत शहर के 110 स्लम बस्तियों में पहले दस बस्तियों में विभिन्न आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जायेगा. ये बस्तियां हैं, अदालतगंज, चीना कोठी, मंदिरी नाला, दीघा, आंबेडकर नगर, आर ब्लॉक, संदलपुर और आशियाना.
यूएनएफपीए की एक्सपर्ट टीम का स्लम में चल रहा सर्वे
इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बिजली, पानी और दूसरी सुविधाओं का विस्तार किया जायेगा. हालांकि, सर्वेक्षण में स्लम बस्तियों की दयनीय दशा का खुलासा हुआ है. उदाहरण के लिए शहर के बीचों-बीच मौजूद हरिजन बस्ती, केदार मोहल्ला आदि में स्लम में 700 घर हैं.
इन घरों के बीच केवल दो हैंडपंप हैं. सभी चूंकि बीस फुट गहरे पाइप से जुड़े हैं, इसलिए पीला पानी निकलता है. दरअसल 30 फुट तक की गहराई में शहर का भूजल कई प्रकार के बैक्टिरयल संक्रमण से प्रभावित है. शौच के लिए एक ही सुलभ शौचालय है. सुबह चार बजे से शौच के लिए लंबी कतार लगती है. यूएनएफपीए के सर्वे में इस बात का पता चला है कि शहर के सीवरेज सफाईकर्मियों की नयी पीढ़ी बेहद असुरक्षित है. वह परंपरागत तरीकों से सफाई नहीं करना चाहती. उन्हें भी गंदगी से घृणा है. लिहाजा रात तीन से सूर्योदय से पहले तक काम करना पसंद करते हैं.
सफाईकर्मियों की दशा हो बेहतर
पूरे देश सहित पटना में सफाई कर्मचारियों के पास अपने कार्य को अंजाम देने के लिए कोई आधुनिक सुविधा नहीं है. शहर के सफाई के लिए जिम्मेदार लोग ही गंदगी में जी रहे हैं. इन सबको बेहतर काम करने के लिए जरूरी प्रशिक्षण यूएनपीएफए मुहैया करायेगा. निगम के साथ हमारा एग्रीमेंट है. निगम जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है. मोबाइल यूनिट अगले हफ्ते शुरू होने की संभावना है.
नदीम नूर, मुख्य निदेशक, यूएनएफपीए, बिहार
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