पटना : बालू की किल्लत व मजदूरों की समस्या पर नहीं किसी की नजर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 May 2019 8:59 AM

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अनिकेत त्रिवेदी कभी अवैध खनन, तो कभी वैध पर भी रोक, बीते पांच वर्षों में कई बार हुई है परेशानी पटना : बीते पांच वर्षों में कई बार बालू खनन पर रोक लगने, सरकारी पाबंदियों के कारण बाजार से बालू गायब रहने व बीते वर्षों में बालू के अवैध खनन का मसला चुनावी मुद्दा नहीं […]

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अनिकेत त्रिवेदी
कभी अवैध खनन, तो कभी वैध पर भी रोक, बीते पांच वर्षों में कई बार हुई है परेशानी
पटना : बीते पांच वर्षों में कई बार बालू खनन पर रोक लगने, सरकारी पाबंदियों के कारण बाजार से बालू गायब रहने व बीते वर्षों में बालू के अवैध खनन का मसला चुनावी मुद्दा नहीं पा रहा है.
सत्ता पक्ष के लोग आमजनों तक इस बात को पहुंचाने में रुचि नहीं दिखा रहे कि आने वाले समय में अवैध खनन पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी जायेगी. इससे प्राकृतिक संसाधनों का अनावश्यक दोहन नहीं होगा. वहीं, वैध खनन में भी कोई समस्या नहीं होगी. वहीं विपक्ष भी इस बात को हवा देने में उतना सफल नहीं है कि जिले में लगातार बालू बंदी से निर्माण कार्य में समस्या हुई है और बार-बार लग रहे रोक से मजदूरों को परेशानी होती है. जबकि, पटना साहिब व खास कर पाटलिपुत्र के कई विधानसभा के ग्रामीण इससे काफी नाराज हैं.
सालों भर कई गंगा घाटों पर चलता रहता है अवैध खनन
जिले में बालू के वैध खनन के अलावे अवैध खनन का भी बड़ा
बाजार है. गंगा के सफेद बालू की बिक्री पर रोक लगा दी गयी है फिर भी बाजार में कुछ कम-ज्यादा दामों पर सफेद बालू आसानी से मिल जा रहा है. इसके अलावा सोन से आने वाले लाल बालू का अवैध कारोबार गंगा के रास्ते ही किया जाता है. दीघा से लेकर पटना सिटी के कई घाटों तक सुबह व रात में बालू लदे नावों कोलाया जाता है. गंगा में पानी बढ़ने के साथ कारोबार बढ़ता-घटता रहता है. कुल मिला कर सालों पर अवैध खनन का कारोबार चल रहा है. इसके अलावा पटना जिले के कई गंगा घाटों पर अवैध खनन किया जाता है. वैध खदान में क्षमता से अधिक खुदाई होती है.
तीन मीटर से अधिक खनन होने पर भू-जल पर इसका प्रभाव पड़ता है. इससे सीधे तौर पर 40 से 50 फुट तक भू-जल में गिरावट होती है. गंगा व सोन के घाटों पर अवैध खनन से कटाव व बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही गर्मी के मौसम में पानी और नीचे जाने की संभावना रहती है. बालू पूरे वर्ष चलने वाला रोजगार है. खेतिहर मजदूर भी अपने खाली समय में इससे जुड़े रहते हैं. सरकार के राजस्व का बड़ा भाग बालू से आता है.
मजदूरों को होती है समस्या, निर्माण कार्य भी रुकते हैं
बालू कारोबार से सीधा जुड़ाव आमलोगों व खास कर मजदूरों का होता है. जैसे ही खनन पर रोक लगती है, तो मजदूरों में बेरोजगारी की समस्या हो जाती है. खनन, ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े मजदूर वर्ग सीधे बेरोजगार हो जाते हैं. इसके अलावा बालू पर रोक के कारण निर्माण कार्य भी रुकते हैं. इस कारण निर्माण से जुड़ी अन्य सामग्रियों का कारोबार भी प्रभावित होता है. कुल मिला कर मजदूर वर्ग से जुड़े 50 फीसदी से अधिक लोग बालू से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं.
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