पटना : नहीं कटेंगे गर्दनीबाग के पेड़, मशीन से उखाड़कर लगाये जायेंगे गंगा किनारे
Updated at : 08 May 2019 7:10 AM (IST)
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प्रभात रंजन विदेशी एजेंसी से खरीदी जा रही है मशीन, पांच जून तक आ जायेगी पहली मशीन पटना : शहर में पेड़ों की कटाई से खत्म हो रही हरियाली व बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए नगर निगम गंभीर है. विकास कार्यों के दौरान पेड़ों को कटने से बचाने के लिए नगर निगम ने चार से […]
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प्रभात रंजन
विदेशी एजेंसी से खरीदी जा रही है मशीन, पांच जून तक आ जायेगी पहली मशीन
पटना : शहर में पेड़ों की कटाई से खत्म हो रही हरियाली व बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए नगर निगम गंभीर है. विकास कार्यों के दौरान पेड़ों को कटने से बचाने के लिए नगर निगम ने चार से पांच ट्री प्लांटेशन मशीन खरीदने की योजना बनायी है.
यह मशीन बड़े पेड़ों को जड़ से उखाड़ कर उसे दूसरी जगह लगाने में मदद करेगी. इस योजना के तहत विदेशी एजेंसी से बातचीत करने के साथ ही आपूर्ति करने पर सहमति भी बन गयी है. संभावना है कि चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद पांच जून तक पहली मशीन की आपूर्ति कर दी जाये. गर्दनीबाग के सरकारी क्वार्टर को ध्वस्त कर नयी इमारतें बनाये जाने की योजना है. इस योजना की वजह से गर्दनीबाग इलाके में लगे 75 हजार से एक लाख पेड़-पौधों पर संकट है. लेकिन, अब गर्दनीबाग इलाके के एक भी पेड़ काटे नहीं जायेंगे.
ट्री प्लांटेशन मशीन के सहयोग से इन पेड़ों को जड़ से उखाड़ कर गंगा किनारे और रिवर फ्रंट के किनारे इन पेड़ों को लगाया जायेगा, ताकि बाढ़ के पानी की गति को कम कर रिवर फ्रंट की सुंदरता को और बढ़ाया जा सके. वहीं, शहर की हरियाली को भी बरकरार रखा जा सकेगा. ट्री प्लांटेशन की एक मशीन की कीमत 1.25 से 1.50 करोड़ के करीब है. निगम प्रशासन छह करोड़ की लागत से चार से पांच मशीनें खरीद रहा है.
नये पेड़ लगाने की रफ्तार है सुस्त : विकास के नाम पर बेली रोड, मीठापुर, न्यू बाइपास, दीघा, खगौल आदि इलाकों में लाखों की संख्या में पेड़ काटे गये हैं. लेकिन, इन पेड़ों के बदले नये पेड़ नहीं लगाये गये. शहर से हरियाली खत्म होने पर पिछले माह ही हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि कितने नये पेड़ लगाये गये हैं. इस फटकार के बाद निगम प्रशासन ने एक लाख नये पेड़ लगाने की योजना बनायी है, जिस पर काम चल रहा है.
पेड़ों के ट्रांसप्लांट में आने वाली दिक्कतों को कुछ इस प्रकार समझें –
वनस्पति विज्ञानियों का दावा है कि केवल छोटे पेड़ ही एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किये जा सकते हैं. बड़े और पुराने पेड़ों को शिफ्ट करना बेहद असुविधाजनक होता है, क्योंकि पेड़ों की जड़ों में निकलने वाले हेयर रूट को शिफ्ट करना मुश्किल होता है, क्योंकि वे बेहद मुलायम होते हैं. जल्दी टूट जाते हैं. पेड़ की जिंदगी भी इन्हीं हेयर रूट्स पर निर्भर करती हैं. ये रूट्स ही मिट्टी में से नमी लेकर पेड़ की मूसला जड़ तक पहुंचाती हैं.
पेड़ों को जमीन से उखाड़ कर दूसरी जगह लगाने को निगम खरीदेगा चार मशीनें
शहर में अब भी हैं लाखों पेड़
शहर में अब भी लाखों की संख्या में पुराने पेड़ हैं, जिन्हें काटने की योजना बनायी जा रही थी. पर अब इन पेड़ों को काटने के बदले दूसरी जगह शिफ्ट किया जायेगा. इसको लेकर ट्री प्लांटेशन मशीन की खरीदारी कर रहे हैं.
सीता साहू, मेयर, नगर निगम
एक्सपर्ट व्यू
कुछ खास पेड़ों को ही किया जा सकता है विस्थापित
नव विकसित पेड़ों का ट्रांसप्लांट या विस्थापन किया जा सकता है. इनमें वे पेड़ जो हाल ही में व्यस्क हुए हैं, इनकी सफलता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब मिट्टी के नेचर के हिसाब से पेड़ों को शिफ्ट किया जाये. दरअसल सॉयल प्रॉपर्टी (मिट्टी के गुण धर्म) की जांच के बाद ही यह कदम उठाया जाना चाहिए. कई जगहों पर ये काम सफलतापूर्वक किया जा सकता है. इसका स्वागत होना चाहिए.
प्रो रमाकर झा, पर्यावरणविद
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