पटना : सक्रिय राजनीति से जुड़े पीयू के कई शिक्षक चुनाव में निभायेंगे बड़ी भूमिका
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Mar 2019 5:14 AM (IST)
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अमित कुमार पटना : पटना विवि में इन दिनों चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ गयी है. विवि के कॉलेजों में ऐसे कई शिक्षक हैं, जो सक्रिय राजनीति में भले नजर न आयें, लेकिन राजनीतिक रूप से कहीं-न-कहीं किसी दल या नेता से जरूर जुड़े हैं. कुछ पार्टियों के छात्र विंग से जुड़े हैं. कुछ राजनीतिज्ञों […]
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अमित कुमार
पटना : पटना विवि में इन दिनों चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ गयी है. विवि के कॉलेजों में ऐसे कई शिक्षक हैं, जो सक्रिय राजनीति में भले नजर न आयें, लेकिन राजनीतिक रूप से कहीं-न-कहीं किसी दल या नेता से जरूर जुड़े हैं. कुछ पार्टियों के छात्र विंग से जुड़े हैं. कुछ राजनीतिज्ञों की पत्नी भी पीयू में शिक्षक हैं.
यही वजह है कि कैंपस में राजनीतिक चर्चाएं खूब हो रही हैं. हालांकि, सांसद के लिए टिकट की दौड़ में कम ही शिक्षक हैं, लेकिन फिर भी इस चुनाव में इन शिक्षकों की राजनीतिक सक्रियता बड़ी रहेगी.
विश्वविद्यालय में कई ऐसे शिक्षक हैं, जो लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं, कुछ एमएलसी और मंत्री तक रह चुके हैं
साइंस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो रामजतन सिन्हा शुरू से ही सक्रिय राजनीति में रहे हैं और कांग्रेस से उनका पुराना नाता है. हालांकि, अभी वे जदयू में चले गये हैं. उनका क्षेत्र जहानाबाद है और इस चुनाव में वे उक्त सीट के लिए पार्टी की मजबूती के लिए काम करेंगे. वे उम्मीदवार की रेस में भी थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला है.
पीएमआइआर विभाग के संजय पासवान एनडीए में नवादा से सांसद व केंद्र में मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में एमएलसी हैं. उनकी राजनीतिक सक्रियता से यूनिवर्सिटी में सभी भली भांति परिचित हैं. जियोलॉजी के बीएन कॉलेज के प्रोफेसर रणवीर नंदन जेडीयू से एमएलसी है. आरके पांडेय एमएलसी है. दोनों राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं. जदयू की प्रवक्ता सुहेली मेहता पहले लोजपा से विधानसभा का चुनाव लड़ चुकी है. अब्दुल कैसर लोजपा में सक्रिय हैं. उनका क्षेत्र खगड़िया है.
इसी तरह आरएलएसपी के सांसद डॉ अरुण कुमार भी राजनीति में सक्रिय है. डॉ अनिल कुमार सिंह मधेपुरा से भाजपा के टिकट पर विधानसभा में लड़ने वाले थे. लेकिन, उन्हें टिकट नहीं मिला. लोकसभा चुनाव में हालांकि वे अपनी पार्टी के लिए मधेपुरा में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. छपरा से एकेडमिक स्टाफ कॉलेज के निदेशक प्रो चंद्रमा सिंह, नालंदा से बीएन कॉलेज के रामबली सिंह सक्रिय राजनीति में हैं.
अरवल से बीएन कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के शिक्षक अशोक कुमार कांग्रेस में तथा इसी विभाग के डीएन सिन्हा लोजपा से गया में सक्रिय राजनीति में हैं. इसके अतिरिक्त रविशंकर प्रसाद, सुशील कुमार मोदी, रामजतन सिन्हा समेत कई राजनीतिज्ञों की पत्नियां यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं. हालांकि, इनका सीधे तौर पर राजनीति में सक्रियता तो नहीं है. लेकिन, राजनीति घरानों से वे ताल्लुक रखती है. पीयू के अलावा पीपीयू के कॉलेजों से भी कई शिक्षक सक्रिय राजनीति में हैं. गुरु गोविंद सिंह कॉलेज पटना सिटी के नवल किशोर यादव एमएलसी है. कई अन्य नेता भी हैं.
राजनीति में तवज्जो नहीं देने का मलाल
राजनीति में सक्रिय भूमिका के बाद भी इन शिक्षकों को मलाल है कि उन्हें पार्टियां तवज्जो नहीं देती. नाम नहीं छापने की शर्त पर ऐसे कई शिक्षक जो राजनीति से जुड़े हैं, वे कहते हैं कि मुख्य राजनीतिक दलों की ओर से इंटलेक्चुअल्स (बुद्धिजीवियों व शिक्षकों) के बजाय बाहुबल व धनबल के लोगों के ऊपर अधिक नजरें इनायत की जाती हैं.
इन शिक्षकों ने कहा कि अगर अच्छे इंटेलेक्चुअल्स को राजनीतिक पार्टियां तवज्जों दें, टिकट दें तो और भी अधिक शिक्षक राजनीति के क्षेत्र में नजर आयेंगे. वर्तमान में जो शिक्षक राजनीति में हैं, उनमें कुछ ने तो अपने दम पर जगह बना ली है, लेकिन ज्यादातर बहुत आगे नहीं बढ़ पाये हैं.
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