शैक्षणिक संस्थानों में 200 प्वाइंट रोस्टर फिर से लागू, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीएम को दिया धन्यवाद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Mar 2019 7:25 AM (IST)
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मोदी सरकार ने खारिज किया 13 प्वाइंट रोस्टर पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विश्वविद्यालयों में 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम पर अध्यादेश लाने के केंद्रीय कैबिनेट के फैसले का स्वागत किया है. सीएम ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को धन्यवाद दिया है. गौरतलब है कि सीएम […]
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मोदी सरकार ने खारिज किया 13 प्वाइंट रोस्टर
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विश्वविद्यालयों में 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम पर अध्यादेश लाने के केंद्रीय कैबिनेट के फैसले का स्वागत किया है. सीएम ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को धन्यवाद दिया है. गौरतलब है कि सीएम ने मंगलवार को 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम लागू करने को लेकर जावड़ेकर से फोन पर बात भी की थी.
नयी दिल्ली : लोकसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार ने गुरुवार को अपनी आखिरी कैबिनेट की बैठक में 13 प्वाइंट रोस्टर को खारिज कर दिया. कैबिनेट ने इसकी जगह आरक्षण के पुराने 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम को बहाल करने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी. सरकार के इस फैसले के बाद केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में नियुक्तियों में आरक्षण के लिए दोबारा 200 प्वाइंट रोस्टर लागू होगा.
केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि कैबिनेट ने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के लिए आरक्षण तंत्र संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया. इस अध्यादेश में विभाग या विषय की बजाय विश्वविद्यालय या कॉलेज को इकाई माना गया है.
इस निर्णय से शिक्षक कैडर में सीधी भर्ती के तहत 5000 से अधिक रिक्तियों को भरते समय यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि इससे संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का पूरी तरह से अनुपालन हो सके. साथ ही एससी-एसटी और ओबीसी के लिए नियत आरक्षण प्रावधान का पालन हो सके. बता दें कि 13 प्वाइंट रोस्टर को लेकर एससी-एसटी और ओबीसी संगठनों ने विरोध जताया था. 13 प्वाइंट रोस्टर के मुताबिक, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एससी-एसटी और ओबीसी के लिए सीटें कम हो गयी थीं. इस मुद्दे को लेकर इस साल पांच मार्च को भारत बंद भी बुलाया गया था. मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अश्वासन दिया था कि केंद्र सरकार शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण रोस्टर बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस संबंध में सरकार अध्यादेश लायेगी.
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दिया था 13 प्वाइंट रोस्टर का फैसला, यूजीसी ने 2018 में किया था लागू
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने अप्रैल, 2017 में 13 प्वाइंट रोस्टर को लागू करने का फैसला दिया था, जिसे यूजीसी ने मार्च, 2018 से लागू किया. इसके बाद देश भर में विरोध-प्रदर्शन हो रहा था. इस बीच, केंद्र ने इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने 22 जनवरी 2019 को खारिज कर दिया था. इसके बाद केंद्र ने रिव्यू पिटीशन दायर किया. उसे भी 27 फरवरी को कोर्ट ने खारिज कर दिया.
क्या है 13 प्वाइंट रोस्टर
13 प्वाइंट रोस्टर एक ऐसा सिस्टम है, जिसमें 13 नियुक्तियों को क्रमबध तरीके से दर्ज किया जाता है. इसमें विश्वविद्यालयों और कॉलेज को एक यूनिट नहीं, बल्कि विभाग माना जाता है. यानी इस सिस्टम के तहत शिक्षकों के कुल पदों की गणना विश्वविद्यालय या कॉलेज के अनुसार न करके विभाग या विषय के हिसाब से की जाती है.
ऐसे समझें : किसी विभाग में चार नियुक्ति निकलती हैं, तो उसमें से पहली तीन सामान्य वर्ग के लिए होंगी, जबकि चौथी ओबीसी वर्ग के लिए होगी. इसके बाद जब अगली नियुक्ति आयेगी, तो वे पांच से शुरू होंगी. यानी पांचवी और छठी नियुक्ति सामान्य वर्ग के लिए, तो सातवीं अनुसूचित जाति के लिए. इसी तरह फिर आठवीं, नौवीं और दसवीं नियुक्ति सामान्य और 12वीं ओबीसी के लिए. यह क्रम 13 तक ही चलेगा और 13 के बाद फिर से एक नंबर से शुरू हो जायेगा.
200 प्वाइंट रोस्टर
200 प्वाइंट रोस्टर के तहत पूरे विश्वविद्यालय को एक यूनिट माना जाता है. फिर किसी श्रेणी विशेष के सभी पदों को मिलाकर आरक्षण कोटे का आकलन किया जाता है. इस सिस्टम के तहत हर वर्ग के उम्मीदवार की भागेदारी सुनिश्चित थी. पहले कॉलेज और विश्वविद्यालयों में इसी प्रणाली के तहत नियुक्ति होती थी.
ऐसे समझें : 200 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली के तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 200 पदों पर नियुक्ति की जाती है. इस प्रणाली में आरक्षित वर्ग (एससी-एसटी और ओबीसी) को ज्यादा मौका मिलता है, जबकि 13 प्वाइंट रोस्टर में ऐसा हो पाना संभव नहीं हो पाता था, िजसको लेकर देश भर में एससी, एसटी और ओबीसी संगठन विरोध कर रहे थे.
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