स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26: फाइव स्टार की रेस में पटना, पोर्टल के जरिए लोग दे रहे फीडबैक
पटना नगर निगम
Patna News: स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 देश में चल रहा है. पोर्टल के जरिए लोग अपना फीडबैक दे रहे हैं. इस दौरान वे 13 सवालों के जवाब दे रहे हैं. पटना की बात करें तो यह फाइव स्टार की रेस में है. इस बार रैंकिंग में सुधार की संभावना जताई जा रही है.
Patna News: (अनिकेत त्रिवेदी, पटना) पटना सहित देशभर के नगर निकायों में स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है. सिटिजन फीडबैक के लिए पोर्टल भी शुरू कर दिए गए हैं. वोग अपने शहर को लेकर 13 सवालों के जरिए फॉर्म भर रहे हैं. फील्ड असेस्मेंट भी 26 अप्रैल से शुरू हो गया है. जीएफसी और ओडीएफ प्रमाणन का इवैल्यूएशन भी मई महीने में शुरू होने की उम्मीद है. इस साल स्वच्छ सर्वेक्षण का सब्जेक्ट ‘स्वच्छता की नई पहल-बढ़ाएं हाथ, करें सफाई साथ’ है.
पटना नगर निगम को मिल चुका है ये स्थान?
पटना नगर निगम को पिछले साल 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में 44 शहरों में 21वां स्थान मिला था. गंगा किनारे बसे शहरों में चौथा स्थान मिला और जीएफसी में 3-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई थी. स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 में आरआरआर यानी रीयूज, रिड्यूस और रीसाइकिल थीम पर काम किया गया था.
लेगों की सुविधा के लिए पिंक टॉयलेट, लू कैफे, निगम नीर और मेनहॉल एम्बुलेंस की गाड़ियां, वेस्ट गाड़ियों से तैयार किया. इसके अलावा सफाई व्यवस्था में विशेष काम किया है. इससे रैंकिंग में सुधार की उम्मीद है.
असेस्मेंट टीम के लिए यहां की जा रही निगरानी
स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान असेस्मेंट टीम के लिए 53 शौचालयों की स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही है. लेकिन वाटर प्लस का दर्जा पहले ही मिल चुका है. यह ओडीएफ का एडवांस सर्टिफिकेशन है. निगम की ओर से पाटलिपुत्र अंचल में 11, नूतन राजधानी में 19, बांकीपुर में 10, कंकड़बाग में 7 और अजीमाबाद और पटना सिटी में 2-2 शौचालय चिन्हित किए गए हैं. गार्बेज फ्री सिटी बनाने के लिए करीब 85 कूड़ा प्वाइंट समाप्त किए गए हैं, जबकि पिछले साल 650 प्वाइंट हटाए गए थे.
जीएफसी में फाइव स्टार और टॉप 20 में रैंक आने की उम्मीद
पटना नगर निगम के अनुसार, इस बार रैंकिंग में सुधार की पूरी संभावना है. जीएफसी में फाइव स्टार और टॉप 20 में स्थान मिलने की उम्मीद है. इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण 12,500 अंकों का है, जिसमें स्कोरिंग मैट्रिक्स को 10 सेक्शन और 54 इंडिकेटर्स में बांटा गया है.
पटना के लिए सबसे बड़ी चुनौती कचरा प्रोसेसिंग और सेग्रीगेशन थी. लेकिन, इस बार निगम की टीम ने इस पर काफी काम किया है. अलग-अलग कचरे के लिए प्लांट हैं. अंचलों में भी कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाए जा रहे हैं. सिटीजन फीडबैक के अंक भी इस बार 500 से बढ़ाकर 1000 कर दिए गए हैं.
मंदिरी नाला रैंकिंग बेहतर करने में करेगा मदद
पटना स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत मंदिरी नाला का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जिससे क्षेत्र का विकास हुआ है. सड़क, लाइटिंग और पेंटिंग के जरिए इलाके को आकर्षक बनाया गया है और साफ-सफाई भी बेहतर हुई है. विद्यापति मार्ग स्थित खटाल गली, खाओ गली और आसपास की गलियों को भी विकसित किया गया है.
जानकारी के मुताबिक, यहां आर्टिस्टिक पेंटिंग, सेल्फी प्वाइंट और ट्री प्लांटर बनाकर इसे आकर्षक बनाया गया है. राजापुर पुल के पास स्थित पार्क के विकास के लिए 49.77 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं, जहां पेवर ब्लॉक, मरम्मत और आधुनिक लाइटिंग का काम चल रहा है.
अब एसटीपी से होकर गंगा में जा रहा सीवेज का पानी
राजधानी में बुडको की ओर से 6 एसटीपी संचालित किए जा रहे हैं. दीघा, कंकड़बाग, बेउर, सैदपुर, करमलीचक और पहाड़ी इलाकों में स्थित इन संयंत्रों में घरों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ कर गंगा में प्रवाहित किया जा रहा है. स्वच्छता सर्वेक्षण में एसटीपी को भी असेस्मेंट का हिस्सा बनाया गया है.
आधुनिक सुविधाएं और सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती
शहर को रेड और येलो स्पॉट मुक्त बनाने के लिए निगम ने सोलर पावर्ड हाइटेक टॉयलेट्स की सुविधा शुरू की है. अन्य शौचालयों और यूरिनल के रखरखाव की जिम्मेदारी तय की गई है. व्यावसायिक इलाकों में और सब्जी मंडियों में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ सघन अभियान चलाया जा रहा है. नियमों के उल्लंघन पर 500 रुपये तक जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. साथ ही, होम कंपोस्टिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि रसोई के कचरे से घर पर ही खाद बनाई जा सके.
स्कूल-कॉलेजों और घरों में चला जागरूकता अभियान
पटना नगर निगम की आईईसी टीम शहर के सभी अंचलों में डोर टू डोर अभियान चला रही है. बांकीपुर, पाटलिपुत्र, अजीमाबाद, पटना सिटी, नूतन राजधानी और कंकड़बाग के कई वार्डों में लोगों को गीला, सूखा, सेनेटरी और घरेलू हानिकारक कचरे के पृथक्करण की जानकारी दी जा रही है. लोगों से अपील की जा रही है कि वे कचरे को अलग-अलग करके ही कलेक्शन गाड़ियों को दें, ताकि वैज्ञानिक प्रबंधन संभव हो सके.
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By Preeti Dayal
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