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पटना : अगले साल तक पनबिजली की 25 परियोजनाएं करने लगेंगी काम

Updated at : 28 Feb 2019 8:01 AM (IST)
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पटना : अगले साल तक पनबिजली की 25 परियोजनाएं करने लगेंगी काम

पटना : राज्य में अगले साल मार्च तक 12 नयी जल परियोजनाओं का काम पूरा हो जायेगा. ऐसे में सभी 25 जल विद्युत परियोजनाओं से सौ मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन हो सकेगा. हाल ही में जल विद्युत निगम की बैठक में इन सभी परियोजनाओं को चलाने के लिए नये मॉडल की स्वीकृति दी गयी […]

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पटना : राज्य में अगले साल मार्च तक 12 नयी जल परियोजनाओं का काम पूरा हो जायेगा. ऐसे में सभी 25 जल विद्युत परियोजनाओं से सौ मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन हो सकेगा. हाल ही में जल विद्युत निगम की बैठक में इन सभी परियोजनाओं को चलाने के लिए नये मॉडल की स्वीकृति दी गयी है.
इसके अनुसार प्रति यूनिट बिजली उत्पादन के आधार पर ठेकेदारों को परियोजनाओं को चलाने की जिम्मेदारी दी जायेगी. इन सभी परियोजनाओं से बेतिया, गया, औरंगाबाद, अरवल, रोहतास, और बक्सर जिले को फायदा होगा. जल विद्युत निगम के सूत्रों का कहना है कि पुरानी 13 जलविद्युत परियोजनाएं सोन और गंडक नदी पर हैं. इनसे प्रतिदिन 56 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है.
मरम्मत के अभाव में इनकी हालत खराब थी. अब सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए नयी नीति बनाकर बिजली उत्पादन शुरू करवाया है. इनमें अरवल, ढेलाबाग, नासरीगंज, सेबारी, श्रीखिंडा, जयनगरा, वेलसार, अगानूर, सोन पूर्वी नहर बारूण, डेहरी में सोन पश्चिमी नहर, त्रिवेणी, वाल्मीकि नगर और कटनिया जलविद्युत परियोजनाएं शामिल हैं.
नये मॉडल पर होगा काम
बिहार राज्य जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक सह ब्रेडा के निदेशक आलोक कुमार ने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं की देखरेख, संचालन और बिजली उत्पादन की जिम्मेदारी नये मॉडल के आधार पर होगी. इन परियोजनाओं का संचालन करने वाली कंपनियों को प्रति यूनिट बिजली उत्पादन की दर से पैसा मिलेगा. पहले यह पैसा तय खर्च के आधार पर दिया जाता था.
नयी जल विद्युत परियोजनाएं
राज्य में 12 नयी जल विद्युत परियोजना सोन और गंडक नदी पर बन रही है. इनमें तेजपुरा, डेहरा, सिपाहा, टहरना, रामपुर, नटवार, अमेठी, मथौली, बरवल, राजपुर, वालीदाद और डेहरी स्कैप चैनल शामिल हैं.
पटना : ऊर्जा मंत्रियों का सम्मेलन खत्म, रिन्यूअल परचेज ऑब्लिगेशन पर दिया गया जोर
पटना : ऊर्जा मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन बुधवार को नयी दिल्ली में संपन्न हो गया. इसमें बिहार के ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव व्यस्तता के कारण शामिल नहीं हो सके. उनकी जगह बिहार से राज्य जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक सह ब्रेडा के निदेशक आलोक कुमार और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजीवन सिन्हा शामिल हुए. इस सम्मेलन में सभी राज्यों से रिन्यूअल परचेज ऑब्लिगेशन पर ध्यान देने के लिए कहा गया.
इस सम्मेलन के दौरान पहले दिन मंगलवार को देश भर के पावर डिस्ट्रीब्यूशन, ट्रांसमिशन और थर्मल पावर प्लांट पर चर्चा हुई. दूसरे दिन बुधवार को ऊर्जा संरक्षण, इनर्जी एफिसिएंशी और रिन्यूअल इनर्जी पर चर्चा हुई. मालूम हो कि रिन्यूअल परचेज ऑब्लिगेशन के तहत सभी राज्यों को तय मात्रा में अपने यहां बिजली उत्पादन करना अनिवार्य है. ऐसा नहीं करने पर जुर्माना देना होगा.
सामान्य रूप से राज्य में इस्तेमाल होने वाली बिजली का 17 फीसदी बिजली उत्पादन का लक्ष्य केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के लिए रखा है. वहीं, बिहार के लिए विनियामक आयोग ने केंद्रीय एजेंसी की अनुमति पर राज्य में होने वाले पूरे इस्तेमाल का 11.50 फीसदी लक्ष्य रखा है.
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