पटना : ड्रॉप आउट कम करने को लेकर अभिभावकों से मिलेंगे प्राचार्य
Updated at : 18 Feb 2019 8:53 AM (IST)
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पटना : स्कूलों में एडमिशन लेने के बाद शिक्षा से दूरी बनाने की समस्या खत्म नहीं हो रही है. प्राथमिक स्तर पर छात्र तो माध्यमिक स्तर पर ज्यादा छात्राएं पढ़ाई छोड़ (ड्रॉप आउट) रही हैं. सीधे तौर पर देखा जाये तो आधे से अधिक विद्यार्थी माध्यमिक में पढ़ाई छोड़ देते हैं. इस समस्या को देखते […]
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पटना : स्कूलों में एडमिशन लेने के बाद शिक्षा से दूरी बनाने की समस्या खत्म नहीं हो रही है. प्राथमिक स्तर पर छात्र तो माध्यमिक स्तर पर ज्यादा छात्राएं पढ़ाई छोड़ (ड्रॉप आउट) रही हैं. सीधे तौर पर देखा जाये तो आधे से अधिक विद्यार्थी माध्यमिक में पढ़ाई छोड़ देते हैं. इस समस्या को देखते हुए शिक्षा विभाग नये सिरे से तैयारी को अंजाम दे रहा है. अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों के अभिभावकों से प्राचार्य को व्यक्तिगत रूप से मिलने के निर्देश दिये हैं. इसके लिये स्कूलों का लगातार निरीक्षण भी किया जायेगा.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2016-17 में माध्यमिक कक्षा में 56.6 प्रतिशत बच्चों ने स्कूल छोड़ा है. इसमें 53.1 फीसदी छात्र और 59.4 फीसदी छात्राएं शामिल हैं. वर्ष 2012-13 में यह आंकड़ा और ज्यादा था. 65.2 प्रतिशत लड़कियों व 59.5 प्रतिशत लड़कों ने पढ़ाई छोड़ी थी.
प्राथमिक कक्षा में 2016-17 में 22.4 प्रतिशत लड़कों व 22 प्रतिशत लड़कियों ने पढ़ाई छोड़ी है. उच्च प्राथमिक में पहुंचते ही लड़कियां स्कूल छोड़ने में आगे हो जाती हैं. 2016-17 में 38.1 प्रतिशत लड़कों ने व 46.8 प्रतिशत लड़कियों ने पढ़ाई छोड़ी है. दूसरी ओर, पिछले पांच वर्षों में बिहार में शिक्षा पर खर्च लगातार बढ़ा है.
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