विकास की पटरी पर बिहार सबसे आगे

Updated at : 12 Feb 2019 8:15 AM (IST)
विज्ञापन
विकास की पटरी पर बिहार सबसे आगे

पटना : बिहार एक बार फिर देश का सर्वाधिक विकास दर वाला राज्य बन गया है. बिहार ने वर्ष 2007-08 से लगातार रेवेन्यू सरप्लस (राजस्व अधिशेष) वाले राज्य का दर्जा बरकरार रखा है. 2017-18 में राज्य की विकास दर 11.3% रही, जो देश में सबसे अधिक है. 2016-17 के दौरान विकास दर 9.9% रही थी. […]

विज्ञापन
पटना : बिहार एक बार फिर देश का सर्वाधिक विकास दर वाला राज्य बन गया है. बिहार ने वर्ष 2007-08 से लगातार रेवेन्यू सरप्लस (राजस्व अधिशेष) वाले राज्य का दर्जा बरकरार रखा है. 2017-18 में राज्य की विकास दर 11.3% रही, जो देश में सबसे अधिक है. 2016-17 के दौरान विकास दर 9.9% रही थी. विकास दर में बढ़ोतरी बेहतर वित्तीय प्रबंधन का सूचक है.
बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने 2018-19 की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट पेश की. उन्होंने बताया कि 2017-18 के दौरान बिहार की विकास दर 11.3% आंकी गयी, जो देश में सर्वाधिक है. इस अवधि में राष्ट्रीय विकास दर 7% रही है. जबकि 2016-17 के दौरान राज्य की विकास दर 9.9% रही थी. इसका मतलब हुआ कि सभी स्रोतों से राज्य की हुई कुल आमदनी में कैपिटल (पूंजीगत) व्यय या खर्चों को काटने के बाद काफी रुपये बच जाते हैं, जिनका उपयोग मूलभूत संरचनाओं के विकास में किया जा रहा है.
राज्यपाल के अभिभाषण के बाद वित्त मंत्री ने सदन पटल पर 13वीं आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट रखी. सदन के बाहर विधान परिषद में आयोजित प्रेस वार्ता में वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में दो नये क्षेत्र कौशल विकास और बाल विकास को भी शामिल किया गया है. 2013-14 के दौरान राज्य का रेवेन्यू सरप्लस छह हजार 441 करोड़ रुपये था, जिसमें 2017-18 के दौरान तीन गुनी से भी अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गयी और इसके 21 हजार 312 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. इसके अलावा राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 2017-18 के दौरान चार लाख 87 हजार 628 करोड़ रहा है, जो 2016-17 के दौरान चार लाख 25 हजार 888 से 61 हजार 740 करोड़ से ज्यादा है.
प्रति व्यक्ति आय में 11% बढ़ोतरी
आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के मुताबिक राज्य में प्रति व्यक्ति आय में भी बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. 2017-18 के दौरान प्रति व्यक्ति आय 31 हजार 316 रुपये रही है, जबकि 2016-17 में यह 28 हजार 580 रही है.
इसमें करीब 11% की वृद्धि दर्ज की गयी है. राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में बढ़ोतरी होने की वजह से प्रति व्यक्ति आय में भी बढ़ोतरी हुई है. राज्य ने बेहतर वित्तीय प्रबंधन का परिचय देते हुए अपने राजकोषीय घाटा को एफआरबीएम एक्ट के तीन प्रतिशत के मानक के अंदर रखा है. वर्तमान में यह 2.9% है.
सबसे अधिक ग्रोथ सेवा क्षेत्र में
राज्य में सबसे ज्यादा विकास दर तृतीयक (टर्सियरी) क्षेत्र में 14.6% दर्ज की गयी है. इस क्षेत्र में नौकरी, रोजगार समेत अन्य क्षेत्र मुख्य रूप से आते हैं. सबसे कम करीब एक प्रतिशत की ग्रोथ रेट प्राइमरी सेक्टर यानी कृषि और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में दर्ज की गयी है.
हालांकि, राज्य में कृषि आधारित उद्योगों में सबसे ज्यादा 19.20% वृद्धि दर्ज की गयी है, जो राष्ट्रीय ग्रोथ रेट (3.6 प्रतिशत) से पांच गुना अधिक है. इस दौरान वित्त विभाग के प्रधान सचिव डॉ एस सिद्धार्थ, आद्री के सदस्य सचिव डॉ शैबाल गुप्ता, प्रो पीके घोष मौजूद थे.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन