बिहार के कई इलाकों में हुई बारिश, ओले गिरे, शनिवार को भी रिमझिम बारिश की संभावना

Updated at : 08 Feb 2019 7:11 PM (IST)
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बिहार के कई इलाकों में हुई बारिश, ओले गिरे, शनिवार को भी रिमझिम बारिश की संभावना

पटना : पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर बिहार में पहुंचते ही गुरुवार की रात से शुरू हुई बूंदा-बांदी शुक्रवार को भी जारी रही. अगले 24 घंटे में भी बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है. रात में बरसने के बाद शुक्रवार की सुबह भी गरज के साथ बारिश हुई. कई हिस्सों में ओलावृष्टि होने की […]

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पटना : पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर बिहार में पहुंचते ही गुरुवार की रात से शुरू हुई बूंदा-बांदी शुक्रवार को भी जारी रही. अगले 24 घंटे में भी बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है. रात में बरसने के बाद शुक्रवार की सुबह भी गरज के साथ बारिश हुई. कई हिस्सों में ओलावृष्टि होने की सूचना है. रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला चलता रहा. शुक्रवार को दिन भर आसमान में बादल छाये रहे. पिछले 36 घंटे में पटना में करीब पांच मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी है. आगामी 24 घंटे में भी रिमझिम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है. हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ अब पूरी तरह उत्तरी बिहार शिफ्ट होता नजर आ रहा है. बताया जा रहा है कि करीब चार साल के बाद फरवरी माह में बारिश हुई है. तापमान में असामान्य बदलाव से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं सामने आ सकती हैं, क्योंकि तापमान में उतार-चढ़ाव से कई तरह के वायरल प्रभावी हो सकते हैं.

राजधानी में शुक्रवार को सुबह से लेकर शाम तक कई बार रिमझिम बारिश हुई. करीब पांच से सात किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवा भी चली. इससे मौसम खुशनुमा हो गया. बदले मौसमे से शुक्रवार को दिन का तापमान गुरुवार की तुलना में 6 डिग्री घटकर 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. शाम को तेज और ठंडी हवा चलने की वजह से न्यूनतम तापमान में अच्छी- खासी गिरावट दर्ज की गयी. मौसम विज्ञानियों के मुताबिक असामान्य दशा के कारण पश्चिमी विक्षोभ पटना अंचल की ओर आकर्षित हुआ.

गोपालगंज में गुरुवार की रात से शुरू हुई बूंदा-बांदी शुक्रवार को जारी रही. विजयीपुर, भोरे, कटेया, पंचदेवरी के कुछ हिस्सों में भी ओलावृष्टि हुई. दोपहर में भी बारिश हुई. पश्चिम से आ रही सर्द हवा चलने से ठंड बढ़ गयी. मौसम विज्ञानी डॉ एसएन पांडेय ने बताया कि शनिवार को भी बूंदा-बांदी के आसार बने हुए हैं. छपरा जिले में भी गुरुवार रात से शुरू हुई बारिश शुक्रवार को दिन भर होती रही. शहर में धूप भी नहीं खिली. इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की गयी है. बारिश के बाद छपरा में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. शुक्रवार को दिन में हुई बारिश ने छपरा नगर निगम की व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. बारिश की वजह से शहर में कई जगह जलजमाव हो गया है. भोजपुर जिले में भी बारिश होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. रिमझिम बारिश से आरा जंक्शन पर यात्रियों के लिए बने शेड से बारिश का पानी गिरने से यात्रियों को काफी परेशानी हुई. दो घंटे की बारिश ने यात्रियों को सामान लेकर इधर-उधर भागने पर मजबूर कर दिया. सीवान में भी बारिश से किसानों को लाभ हुआ है, तो कुछ जगहों पर नुकसान भी. कई जगहों पर सरसों खेत में पक कर तैयार होने से किसानों को नुकसान भी हुआ है.

प्राकृतिक असंतुलन बन रहा कारण

मौसम विज्ञानी की माने तो प्रदूषण, जलदोहन और खेतों में रासायनिक खाद के बेतहाशा प्रयोग और अनियोजित विकास से होनेवाले प्राकृतिक असंतुलन ने शीतकालीन बारिश को असमय कर दिया है. इस कारण ठंड के दौरान बननेवाला पश्चिमी विक्षोभ समय से विकसित नहीं हो पाया. क्षेत्रीय चक्रवात की उपस्थिति में तापमान के बढ़ जाने और दक्षिणी पूर्वी नम हवा चलने से पश्चिमी विक्षोभ बनता है. इसी से पोस्ट मॉनसून के बादल छाते हैं, जो सर्दियों में बरसात का कारण बनते हैं. यह स्थिति फरवरी में बन रही है.

किसानों को फायदा और नुकसान दोनों हुआ

फरवरी में बारिश होने से रबी फसलों को जबरदस्त फायदा हुआ है. एक ओर जहां गेहूं, चना, आम, लीची, गन्ना और सब्जी को फायदा हुआ है, तो दूसरी ओर फूल लगे फसल जैसे सरसों, अरहर, मसूर को नुकसान हुआ है. सुबह में हुई बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे है. तो कई उनको अब गेहूं कि फसल की सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी. उन्हें थोड़ा आर्थिक लाभ हुआ है. वहीं, आर्द्रता अधिक होने के कारण आलू में झुलसा रोग पकड़ने की संभावना है. कृषि वैज्ञानिक इसे उत्साहजनक मान कर चल रहे हैं.

मौसम की चेतावनी

बिहार के संदर्भ में अगले चौबीस घंटे पश्चिमी विक्षोभ से प्रभावित हो सकते हैं. इसमें झौंकेदार तेज हवा और बारिश होने की पूरी संभावना है. हालांकि, 10 फवरी से स्थिति सामान्य होने लगेगी. मौसम विज्ञानी डॉ एसएन पांडेय की माने तो प्रदूषण, जलदोहन और खेतों में रासायनिक खाद के बेतहाशा प्रयोग व अनियोजित विकास से होने वाले प्राकृतिक असंतुलन ने शीतकालीन बारिश को असमय कर दिया है. इस कारण ठंड के दौरान बननेवाला पश्चिमी विक्षोभ समय से विकसित नहीं हो पाया. क्षेत्रीय चक्रवात की उपस्थिति में तापमान के बढ़ जाने व दक्षिणी पूर्वी नम हवा चलने से पश्चिमी विक्षोभ बनता है. इसी से पोस्ट मॉनसून के बादल छाते हैं, जो सर्दियों में बरसात का कारण बनते हैं. यह स्थिति फरवरी में बन रही है.

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