पटना : मेडिकल के फेल छात्रों ने ओपीडी सेवा की बाधित, 20% मरीजों का नहीं हुआ इलाज
Updated at : 08 Feb 2019 6:48 AM (IST)
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डेढ़ घंटा चला हंगामा. सुरक्षाकर्मी पहुंचे तब हुआ मरीजों का इलाज पटना : इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में फेल मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने गुरुवार को कॉलेज परिसर व ओपीडी में जम कर हंगामा किया. छात्र सुबह 10 बजे ओपीडी पहुंचे और नारेबाजी करते हुए हंगामा शुरू कर दिया, जो करीब डेढ़ घंटे तक चलता […]
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डेढ़ घंटा चला हंगामा. सुरक्षाकर्मी पहुंचे तब हुआ मरीजों का इलाज
पटना : इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में फेल मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने गुरुवार को कॉलेज परिसर व ओपीडी में जम कर हंगामा किया. छात्र सुबह 10 बजे ओपीडी पहुंचे और नारेबाजी करते हुए हंगामा शुरू कर दिया, जो करीब डेढ़ घंटे तक चलता रहा. इस दौरान छात्रों ने कुछ देर के लिए ओपीडी गेट और ओपीडी चेंबर्स के दरवाजे भी बंद कर दिये.
ऐसे में करीब 20% मरीजों का इलाज नहीं हो पाया. कुछ छात्र पैथोलॉजी जांच सेंटर और रेडियोलॉजी सेंटर भी पहुंच गये. वे एक्स-रे रूम को भी बंद करना चाहते थे. हंगामे की खबर सुन अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षाकर्मियों को अलर्ट किया. मौके पर सुरक्षाकर्मी पहुंचे और आंदोलन कर रहे छात्रों को शांत कराया. छात्रों के समर्थन में कई जूनियर छात्र भी फिर से रिजल्ट जारी करने की मांग कर रहे थे.
ओपीडी में हंगामा कर रहे फाइनल इयर के छात्रों का कहना है कि आइजीआइएमएस में इस बार महज 40 प्रतिशत ही रिजल्ट बना है. जबकि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के मुताबिक 65 प्रतिशत रिजल्ट बनना जरूरी है. ऐसे में कॉलेज प्रशासन की पढ़ाई-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं और यही स्थिति रहती है तो अगले साल एमबीबीएस की सीटों पर मान्यता मिलेगी या नहीं इस पर एमसीआइ सवाल खड़ा कर सकता है.
12 सदस्यीय कमेटी का गठन, 15 को जांच रिपोर्ट
पटना : आंदोलन कर रहे छात्रों की मांग को देखते हुए संस्थान के निदेशक डॉ एनआर विश्वास की देखरेख में हुई बैठक में कॉलेज के सभी विभागाध्यक्षों को बुलाया गया. इसके बाद 12 सदस्यों की एक कमेटी बनायी गयी.
इसमें कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ रंजीत गुहा, डीन डॉ केएच राघवेंद्र, रजिस्ट्रार, परीक्षा डीन एवं सर्वाधिक फेल छात्रों वाले विभाग के अध्यक्ष सहित कुल 12 सदस्यों को शामिल किया गया. टीम के सदस्य परीक्षा में फेल छात्रों की कॉपी का फिर से मूल्यांकन करायेंगे.
आइजीआइएमएस के प्रिंसिपल डॉ रंजीत गुहा ने बताया कि कमेटी के सदस्य अपनी देखरेख में छात्रों की कॉपी की जांच करायेंगे. जांच के बाद 15 फरवरी को अपनी रिपोर्ट देंगे. छात्र पास नहीं हुए, तो प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेज को भेजी जायेगी. इसके बावजूद अगर छात्र फेल हुए तो उन्हें सप्लिमेंट्री पेपर देना होगा.
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