मिशन-2019 : महाराजगंज लोकसभा सीट पर जदयू व भाजपा दोनों की दावेदारी, महागठबंधन में राजद भी तैयार

Updated at : 17 Jan 2019 2:44 AM (IST)
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मिशन-2019 : महाराजगंज लोकसभा सीट पर जदयू व भाजपा दोनों की दावेदारी, महागठबंधन में राजद भी तैयार

पटना : महाराजगंज लोकसभा की सीट एक बार फिर चर्चा में है. एनडीए में भाजपा की कब्जा वाली यह सीट जदयू में जाने की चर्चा है. माैजूदा सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल के भविष्य पर संकट दिख रहा है. यदि महाराजगंज की सीट जदयू को मिली तो संभावना इस बात की है कि सीग्रीवाल को सारण […]

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पटना : महाराजगंज लोकसभा की सीट एक बार फिर चर्चा में है. एनडीए में भाजपा की कब्जा वाली यह सीट जदयू में जाने की चर्चा है. माैजूदा सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल के भविष्य पर संकट दिख रहा है. यदि महाराजगंज की सीट जदयू को मिली तो संभावना इस बात की है कि सीग्रीवाल को सारण की सीट से उम्मीदवार बनाया जाये.
वैसे सारण के मौजूदा सांसद राजीव प्रताप रूडी के टिकट कटने की कोई आधिकारिक घोषणा या संकेत नहीं है. रूडी की उम्मीदवारी बरकरार रही तो सीग्रीवाल के टिकट पर ग्रहण लग सकता है. पिछले चुनाव में यहां से तीन बार सांसद रहे प्रभुनाथ सिंह और भाजपा के जनार्दन सिंह सीग्रीवाल के बीच
चंद्रशेखर ने 1989 में यहां से लड़ा था चुनाव
महाराजगंज उस समय चर्चा में आया जब पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर 1989 के चुनाव में यहां आकर चुनाव लड़े थे और रिकाॅर्ड मतों से जीत हासिल की थी. बाद के दिनों में महाराजगंज में प्रभुनाथ सिंह का दबदबा रहा. सिंह की छवि इलाके में लालू प्रसाद के विरोधी नेता होने की रही है, लेकिन बाद में सिंह राजद में शामिल होकर अपने विरोधियों को भी चौंका दिया था.
2014 के चुनाव में राजद प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे प्रभुनाथ सिंह के खिलाफ भाजपा उम्मीदवार को 3,20645 वोट मिले थे. जबकि, 2,82171 वोट पाकर प्रभुनाथ सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे. जदयू उम्मीदवार मनोरंजन सिंह उर्फ धुमल सिंह को 1,49436 वोट मिले थे.
जदयू के एनडीए में आ जाने से भाजपा को अतिरिक्त वोट का लाभ मिल सकता है. 2004, 1999 और 1998 में महाराजगंज से चुनाव जीतने वाले प्रभुनाथ सिंह 2009 के लोकसभा चुनाव में राजद के उमाशंकर सिंह से करीब तीन हजार मतों से पराजित हो गये थे.
कई मायनों में दिलचस्प रही है यह सीट
इस बार महाराजगंज लोकसभा सीट से टिकट के दावेदारों में जदयू विधायक हेम नारायण साह, विधायक धूमल सिंह, पूर्व मंत्री गौतम सिंह और शैलेंद्र प्रताप सिंह के नाम की चर्चा है.
राजद नेता प्रभुनाथ सिंह के पुत्र व पूर्व विधायक रणधीर सिंह महागठबंधन से दावेदारों की सूची में सबसे ऊपर चल रहे हैं. छह विधानसभा सीटों वाले महाराजगंज संसदीय क्षेत्र के गोरेयाकोठी, बनियापुर व तरैया विधानसभा पर राजद का कब्जा है, तो महाराजगंज व एकमा विधानसभा जदयू के खाते में है.
जबकि, मांझी विधानसभा सीट कांग्रेस के हवाले है. महाराजगंज लोकसभा सीट कई मायनों में काफी दिलचस्प रही है. इस सीट से राजपूत-भूमिहार जाति के नेता ही जीतते रहे हैं. यहां के मतदाताओं ने इस संसदीय क्षेत्र के बाहर के नेताओं को सहजता से स्वीकारा है.
पूर्व पीएम चंद्रशेखर और कांग्रेस के कृष्ण प्रताप सिंह उर्फ नन्हे बाबू, मृत्युंजय प्रसाद सिन्हा हो या फिर उमाशंकर सिंह इसके उदाहरण हैं. इस बार भाजपा में सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और विधान पार्षद सच्चिदानंद राय की चर्चा है. सीवान जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों व छपरा जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर महाराजगंज लोकसभा सीट बनी है.
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