पटना : अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक से कमजोर होता है लोकतंत्र : पुनियानी
Updated at : 15 Jan 2019 9:24 AM (IST)
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पटना : अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक से लोकतंत्र कमजोर होता है. देश में अलग तरह के राष्ट्रवाद को थोपा जा रहा है. बीते पांच वर्षों में अल्पसंख्यकों, दलितों और मजदूरों को कमजोर करने का काम किया गया है. इसको लेकर देश भर में अवार्ड वापसी का अभियान भी चला. समाज में ध्रुवीकरण से सांप्रदायिक […]
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पटना : अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक से लोकतंत्र कमजोर होता है. देश में अलग तरह के राष्ट्रवाद को थोपा जा रहा है. बीते पांच वर्षों में अल्पसंख्यकों, दलितों और मजदूरों को कमजोर करने का काम किया गया है. इसको लेकर देश भर में अवार्ड वापसी का अभियान भी चला. समाज में ध्रुवीकरण से सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने की कोशिश हो रही है.
बातें सोमवार को अदालतगंज के जनशक्ति भवन में आयोजन कार्यक्रम में देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता व आइआइटी मुंबई के पूर्व प्रो डॉ राम पुनियानी ने कही. जनशक्ति भवन में समकालीन भारत में लोकतंत्र व धर्मनिरपेक्षता की चुनौतियां विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम में अाये साहित्यकार आलोक धन्वा ने कहा कि समाज में जितने भी बड़े साहित्यकार हुए हैं, चाहे प्रेमचंद्र हो या शरदचंद्र, सबने समाज में गंगा-जमुनी तहजीब को ही बढ़ावा दिया है, लेकिन आज उसे ही तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. कार्यक्रम में केदार दास, नलिन चंद्र, प्रियरंजन, अजय सहित दर्जनों लोग मौजूद थे.
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