पटना : दो हजार 465 पंचायतों में नहीं है कोई प्लस टू स्कूल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Jan 2019 7:50 AM
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सभी पंचायतों में प्लस टू स्कूल खोलने के लिए मांगे गये प्रस्ताव पटना : राज्य की सभी आठ हजार 448 पंचायतों में कम से कम एक प्लस टू स्कूल खोलने की योजना राज्य सरकार की है. इसमें मानक को पूरा करने वाले मिडिल स्कूल को भी उत्क्रमित करते हुए प्लस टू स्कूल बनाने का प्रावधान […]
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सभी पंचायतों में प्लस टू स्कूल खोलने के लिए मांगे गये प्रस्ताव
पटना : राज्य की सभी आठ हजार 448 पंचायतों में कम से कम एक प्लस टू स्कूल खोलने की योजना राज्य सरकार की है. इसमें मानक को पूरा करने वाले मिडिल स्कूल को भी उत्क्रमित करते हुए प्लस टू स्कूल बनाने का प्रावधान है. पिछले तीन-चार साल से इसके लिए प्रयास चल रहे हैं, लेकिन अब भी राज्य में दो हजार 465 पंचायतें ऐसी हैं, जहां कोई प्लस टू स्कूल नहीं हैं.
बचे इन पंचायतों में प्लस टू स्कूल खोलने या मिडिल स्कूल को उत्क्रमित करने के लिए शिक्षा विभाग ने नये वर्ष में सभी जिलों को तेजी से प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है. इसके लिए राज्य सरकार ने नियम में संशोधन भी कर रखा है. इसके तहत पहले उन्हीं मिडिल स्कूल को प्लस टू में उत्क्रमित करने के लिए चयनित किया जायेगा, जिनके पास कम से कम एक एकड़ जमीन है. अब इस प्रावधान को संशोधित करते हुए 75 डिसिमल जमीन कर दिया गया है.
जिन मिडिल स्कूलों के पास 75 डिसिमल जमीन भी है, उनका चयन भी प्लस टू स्कूल में उत्क्रमित करने के लिए कर लिया जायेगा. इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार करने के लिए जिला और राज्य स्तर पर दो कमेटी बनी हुई है. जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में बनी कमेटी जमीन के मानक को पूरा करने वाले स्कूल का चयन संबंधित पंचायत में करने के बाद इससे संबंधित प्रस्ताव का अनुमोदन अंतिम स्तर पर कराने के लिए इसे माध्यमिक शिक्षा निदेशक के स्तर पर गठित कमेटी के पास भेजेगी. यही कमेटी अंतिम रूप से इसकी अनुमति प्रदान करती है. किसी पंचायत में नया प्लस टू स्कूल खोलने के लिए भी 75 डिसिमल जमीन की आवश्यकता है, जिसका प्रस्ताव भी जिला स्तरीय कमेटी के स्तर से भेजा जा सकता है.
अब तक उत्क्रमित हुए स्कूलों की हालत खराब
बीते वर्ष के दौरान राज्य में 387 पंचायतों में मिडिल स्कूलों को प्लस टू में उत्क्रमित किया गया था. चार-पांच साल पहले राज्य में करीब दो हजार 700 प्लस टू स्कूल थे. पिछले तीन-चार साल के दौरान उत्क्रमित प्लस टू स्कूलों की संख्या में करीब चार हजार की वृद्धि हुई है.
परंतु इन नव उत्क्रमित प्लस टू स्कूलों की हालत काफी खराब है. इनके पास पर्याप्त जगह नहीं है. जमीन है, तो भवन नहीं हैं. छात्रों को बैठने के लिए उचित संख्या में कमरें नहीं हैं. किसी उत्क्रमित प्लस टू स्कूल में लैब और लाइब्रेरी नहीं है. स्कूलों का जिस तेजी से उत्क्रमित किया जा रहा है, उतनी तेजी से इनमें सुविधाएं बहाल नहीं की जा रही हैं. इससे छात्रों को काफी परेशानी होती है.
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