बिहार में गंगा में हर किमी में दो डॉल्फिनें बना रहीं अपना घर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Dec 2018 9:04 AM
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राजदेव पांडेय पटना : राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिनों ने तमाम चुनौतियों के बाद भी गंगा नदी को अपना प्रिय घर बनाये रखा है. बिहार में 1313 से अधिक डॉल्फिनें हैं. अकेले गंगा में 566 किमी के दायरे में 1098 से अधिक डॉल्फिन पायी गयी हैं. इनमें चौसा (बक्सर) से मोकामा (पटना) तक 288 किमी […]
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राजदेव पांडेय
पटना : राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिनों ने तमाम चुनौतियों के बाद भी गंगा नदी को अपना प्रिय घर बनाये रखा है. बिहार में 1313 से अधिक डॉल्फिनें हैं. अकेले गंगा में 566 किमी के दायरे में 1098 से अधिक डॉल्फिन पायी गयी हैं.
इनमें चौसा (बक्सर) से मोकामा (पटना) तक 288 किमी के बीच 333 और मोकामा से मनिहारी (गंगा में बिहार-झारंखड सीमा क्षेत्र) के बीच 278 किमी के बीच 765 डॉल्फिनें मिली हैं. आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो साफ हो जाता है कि गंगा में प्रति किमी दो डॉल्फिन हैं. इसके अलावा राज्य के गंडक और घाघरा के बहाव क्षेत्र में क्रमश: 150 और 65 डॉल्फिन हैं.
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक समूचे बिहार में डॉल्फिनों का सर्वेक्षण कराया गया है. गंगा में अकेले पटना से मोकामा तक 151 डॉल्फिनें दिखायी दी हैं. यह आंकड़ा कई मायने में उत्साहजनक है. यह देखते हुए कि गंगा में पहले से ज्यादा वैध और अवैध व्यावसायिक दखल बढ़ा है. मालूम हो कि डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित करने के बाद यह सर्वेक्षण पहली बार कराया गया है. हालांकि, यह सर्वेक्षण अप्रकाशित है. आंकड़ों में आंशिक संशोधन संभव है.
चुनौतियां भी बढ़ीं : मीठे पानी की ये जलीय जीव अब कई चुनौतियों का सामना भी कर रही है. सर्वेक्षण के दौरान डॉल्फिन की जिंदगी के लिए घातक साबित होने वाली कई चुनौतियाें की भी पहचान की गयी है. इनमें कुछ खास चुनौतियां इस प्रकार हैं
क्रूज का परिचालन
वर्तमान में हल्दिया से इलाहाबाद तक शुरू किये गये जलमार्ग में अब हेवी क्रूजों का संचालन हो रहा है. इन्हें संचालित करने के लिए की जा रही ड्रैजिंग से डॉल्फिन के रहने के क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं. दरअसल गंगा में बरसाती दो से तीन माह छोड़ दें, तो अक्सर पानी कम रहता है. इसके चलते नदी की सतह पर से रेत को हटाना पड़ता है. इससे डॉल्फिन के रहने का क्षेत्र प्रभावित होता है.
सेंड माइिनंग : रेत के अवैध खनन ने डॉल्फिन की गतिविधियों को खास तौर पर प्रभावित किया है. रेत ढोने वाली अधिकतर नावें विशालकाय और मशीन से चलने वाली हैं. इनकी ध्वनि और ईंधन दोनों से ही डॉल्फिन का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है.
गांगेय डॉल्फिन से जुड़े विशेष तथ्य
सर्वे में डॉल्फिनों की संख्या उत्साहजनक पायी गयी है. इससे पता चलता है कि गंगा का पानी अब भी जलीय जीवों के लिए अमृत है. यह हमारी सबसे बड़ी संपदा है. चिंता की बात यह है कि अब डॉल्फिन के जीवन में लोगों का दखल बढ़ता जा रहा है. खासतौर पर अवैध माइनिंग और ड्रेजिंग ने उनके रहवासों के लिए संकट खड़ा किया है. सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा.
-डाॅ गोपाल शर्मा, वैज्ञानिक (जलीय जीव), प्रभारी ऑफिसर, पटना
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