पटना : बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की हड़ताल से बैंकिंग कारोबार ठप

Updated at : 27 Dec 2018 9:20 AM (IST)
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पटना : बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की हड़ताल से बैंकिंग कारोबार ठप

पटना : नौ संगठनों के मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ यूनियंस के आह्वान पर बुधवार को प्रदेश के बैंकों में ताले लटके रहे. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के हजारों कर्मचारियों ने भाग लिया. वहीं, दूसरी तरफ हड़ताल की वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना […]

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पटना : नौ संगठनों के मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ यूनियंस के आह्वान पर बुधवार को प्रदेश के बैंकों में ताले लटके रहे. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के हजारों कर्मचारियों ने भाग लिया.
वहीं, दूसरी तरफ हड़ताल की वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. हड़ताल के कारण लगभग 10-12 हजार करोड़ का लेन-देन बाधित हुआ. लोग अपनी बैंक शाखा में आकर लौटते रहे. ज्ञात हो कि इससे पूर्व भी बैंक अधिकारियों ने 21 दिसंबर को हड़ताल की थी. हड़ताल से नकद लेन-देन, चेक क्लीयरेंस व डिमांड ड्राफ्ट जैसी बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह बाधित हुई थी.
सफल रही हड़ताल : इस बीच बिहार प्रोविन्सियल बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन के उप महासचिव संजय तिवारी, भारतीय स्टेट बैंक अधिकारी संघ के महासचिव अजीत कुमार मिश्रा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन के महासचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि हड़ताल पूरी तरह सफल रही.
हड़ताल में उमाकांत सिंह, अरिजीत बोस, अनिल यादव, अमरेश विक्रमादित्य, विजय कुमार राय, रमेश तिवारी, शाह हसन, हसन इमाम (स्टेट बैंक), प्रियरंजन कुमार, उपेंद्र कुमार, अजय सिंह, जेपी दीक्षित (यूनियन बैंक), सुनील कुमार सिन्हा, उत्पलकांत, सुनील कुमार सिंह, विवेक नागर, संजय (इलाहाबाद बैंक), बी प्रसाद (यूको बैंक) शामिल रहे.
विरोध के मुख्य कारक : विरोध के मुख्य कारक के रूप में कर्मचारियों के बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक सहित अन्य बैंकों के प्रस्तावित विलय, लंबे समय से लंबित वेतनवृद्धि, पुरानी पेंशन बहाल करने, बैंकों के निजीकरण, खराब लोन की वसूली के लिए कार्रवाई आदि शामिल हैं. हड़ताल में शामिल कर्मचारियों ने बैंक के अंचल, क्षेत्रीय व बैंक शाखाओं के आगे एकत्र होकर सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की.
हड़ताल के कारण अधिकांश एटीएम बंद रहीं. जबकि, जिन जगहों पर एटीएम को खोला गया, वहां हड़तालियों ने जबरन बंद करा दिया. जिसके वजह से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
अधिकारियों की मानें, तो पटना जिले में लगभग 40 फीसदी से अधिक एटीएम बंद रही. अकेले पटना जिले में 1490 एटीएम लगी है जिसके माध्यम से लगभग हर दिन 200 करोड़ से अधिक की निकासी होती है. वहीं, देर शाम शहर के कुछ एटीएम खुलने से लोगों ने राहत ली.
सीजीएम ने बनाया दबाव : अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार आज स्टेट बैंक के सीजीएम ने हड़ताल में शामिल अधिकारियों पर दबाव बना कर हड़ताल में शामिल नहीं होने की बात कहीं. लेकिन, अधिकारियों ने उनकी बात को अनसुना कर दिया. खासकर स्केल-4 और स्केल-5 के अधिकारियों पर अधिक जोर था.
रिजर्व बैंक में भी सन्नाटा
सार्वजनिक व निजी बैंकों कर्मचारियों व अधिकारियों के हड़ताल में शामिल होने के कारण कैश लेने वाले अधिकारी रिजर्व बैंक नहीं पहुंचे. इस कारण रिजर्व बैंक में भी सन्नाटा सा रहा.
अगर इस हड़ताल का सकारात्मक परिणाम नहीं आया, तो हमें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होना पड़ेगा. जिसके लिए भारत सरकार पूर्णतः जिम्मेदार होगी. .
डाॅ कुमार अरविंद, वरीय उपाध्यक्ष, एआइबीओए
देश में बैंकिंग के विस्तार की जरूरत है. अभी देश में ऐसे हजारों गांव हैं, जहां बैंक नहीं पहुंचा है. इसलिए बैंकों के विस्तार की जरूरत है. इसलिए विलय की आवश्यकता नहीं है.
अजीत कुमार मिश्रा, महासचिव, स्टेट बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन
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