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पटना : प्रदेश में 13 हजार से भी अधिक आंगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं के मानदेय पर ''ब्रेक''

Updated at : 25 Dec 2018 9:09 AM (IST)
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पटना : प्रदेश में 13 हजार से भी अधिक आंगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं के मानदेय पर ''ब्रेक''

मानदेय एप पर भेजे गये विवरण से हुआ खुलासा पटना : प्रदेश की 13 हजार से अधिक आंगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं के मानदेय पर ‘ब्रेक’ लग गया है. आंगन मानदेय एप के माध्यम से उपस्थिति का ब्योरा लिया जा रहा है. बाल विकास पदाधिकारियों की ओर से एप पर जो ब्योरा दिया गया है, उसी से इसका […]

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मानदेय एप पर भेजे गये विवरण से हुआ खुलासा
पटना : प्रदेश की 13 हजार से अधिक आंगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं के मानदेय पर ‘ब्रेक’ लग गया है. आंगन मानदेय एप के माध्यम से उपस्थिति का ब्योरा लिया जा रहा है.
बाल विकास पदाधिकारियों की ओर से एप पर जो ब्योरा दिया गया है, उसी से इसका खुलासा हुआ है. समेकित बाल विकास सेवाएं (आइसीडीएस) निदेशालय के डायरेक्टर ने इस बाबत सभी जिला प्रोग्राम पदाधिकारी और सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को चेतावनी भी दी है.
लंबित डाटा की जांच अविलंब
करें : आइसीडीएस के निदेशक आलोक कुमार ने सभी जिला प्रोग्राम पदाधिकारियों और सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अविलंब इस समस्या का निराकरण किया जाये. उन्होंने यह भी हवाला दिया है कि अक्सर सेविका और सहायिकाओं के आंदोलन का एक कारण समय से मानदेय का भुगतान नहीं करना भी है.
उन्होंने कहा है कि आंकड़ों की जांच कर आंगन मानदेय एप पर ऑनलाइन किया जाये, ताकि मानदेय का भुगतान हो सके. उन्होंने बताया है कि 13574 सेविकाओं-सहायिकाओं की बैंक विवरणी में कमी, डाटा सत्यापन नहीं होने के कारण मानदेय लंबित है.
निदेशक ने दी चेतावनी
आंगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं के मानदेय रुकने के बाद निदेशक ने संबंधित पदाधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक को चेतावनी भी दी है. उन्होंने कहा है कि डीबीटी योजना के तहत मानदेय एवं राज्य भत्ता का भुगतान उपस्थिति के ब्योरा के आधार पर किया जा रहा है. इसके लिए बाकायदा विशेष एप बनाया गया है. अक्सर देखा जा रहा है कि बार-बार याद दिलाने के बाद भी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी की ओर से आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं का समय से उपस्थिति का विवरण नहीं भेजा जा रहा है.
निदेशक ने सभी जिला प्रोग्राम पदाधिकारियों और सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों से कहा है कि लंबित मामलों का निराकरण 15 जनवरी से पहले कर लिया जाये. साथ ही पूरा डाटा एप पर अपलोड किया जाये.
ताकि मानदेय का भुगतान किया जा सके. इसके इतर अन्य मामलों में भी डाटा अपडेट कर लिये जाये, ताकि भविष्य में किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़े. ऐसा नहीं किया गया तो नये साल पर जनवरी से परियोजना की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, संबंधित पंचायत की महिला पर्यवेक्षिका एवं परियोजना में तैनात डाटा इंट्री ऑपरेटर का वेतन-मानदेय रोका जायेगा.
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