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रविवार रहा सीजन का सबसे सर्द दिन, जानें अगले पांच दिनों तक के मौसम का हाल

Updated at : 24 Dec 2018 6:59 AM (IST)
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रविवार रहा सीजन का सबसे सर्द दिन, जानें अगले पांच दिनों तक के मौसम का हाल

पटना : सर्दी धीरे-धीरे बढ़ रही है. रविवार सीजन का सबसे अधिक सर्द दिन रहा. शहर का न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम 7.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. इसके साथ ही अधिकतम तापमान में भी एक डिग्री की गिरावट अायी और अधिकतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके अलावा सामान्य रूप […]

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पटना : सर्दी धीरे-धीरे बढ़ रही है. रविवार सीजन का सबसे अधिक सर्द दिन रहा. शहर का न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम 7.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. इसके साथ ही अधिकतम तापमान में भी एक डिग्री की गिरावट अायी और अधिकतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
इसके अलावा सामान्य रूप से पछुआ हवाएं भी चलीं, इस कारण लोगों को सुबह-शाम सर्दी का अनुभव करना पड़ा.वहीं मौसम विज्ञान केंद्र की मानें तो अगले पांच दिनों तक लगातार तापमान गिरने के आसार हैं. सुबह और शाम कुहरा के साथ धुंध पड़ने की संभावना है. पछुआ हवाएं भी चलेंगी और न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज किया जायेगा. सुबह में बादलों के कारण थोड़ी देर से धूप निकलेगी. मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आगे मौसम साफ होने की संभावना है.
ऐसे गिरा पारा : बीते दिनों हुई हल्की बारिश के बाद से ही शहर के तापमान में गिरावट आ रही है. अधिकतम तापमान में गिरावट आयी, लेकिन जैसे-जैसे आसमान साफ हुआ न्यूनतम पारा गिरने लगा. मौसम वैज्ञानिक कह रहे हैं कि अभी और गिरावट होगी. बीते सोमवार को न्यूनतम तापमान 13.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. वहीं शहर का मंगलवार को न्यूनतम पारा 14.7 डिग्री सेल्सियस, बुधवार को 12.2, गुरुवार व शुक्रवार को 9 और शनिवार को 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. रविवार को सामान्य से तीन डिग्री कम 7.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
तेज हवाओं से बढ़ेगी दक्षिणी बिहार की परेशानी कृषि व फल उत्पादन पर पड़ेगा बुरा असर
पटना : बिहार की भौगोलिक दशा तेजी से बदल रही है. पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें, तो दक्षिण-उत्तरी पूर्वी बिहार में आंधियों की संख्या में इजाफा हुआ है. इसका व्यापक अध्ययन डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी कर रहे हैं. मौसम में बदलाव के संदर्भ में यह बात ज्यादा गंभीर है. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बिहार का यह इलाका तेज हवाओं (हाइ स्पीड विंड) की प्रचंड आपदा झेल रहा है.
फिलहाल बिहार का कुल 86 फीसदी भौगोलिक इलाका तेज हवाओं के दायरे में है. मिनिस्ट्री ऑफ इन्वायरमेंट के मुताबिक राज्य के 27 जिले ऐसे हैं, जो इससे प्रभावित हैं. इनमें से कुछ जिले करीब-करीब शत-प्रतिशत प्रभावित हुए हैं.
आगामी समय में इसका कृषि व फल उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा. सरकारी आंकड़े इसकी गवाही भी देते हैं. जानकारी के मुताबिक 27 जिलों में मुख्य रूप से बांका, जहानाबाद, अरवल, नालंदा, नवादा शामिल हैं. इनमें नवादा शत-प्रतिशत और शेष जिले 70 फीसदी से अधिक प्रभावित हैं. इन जिलों में हवा की औसत रफ्तार 47 मीटर प्रति सेकेंड तक है.
बढ़ती गर्मी और बारिश का नहीं होना है कारण
तेज हवा से सबसे ज्यादा प्रभावित दक्षिणी बिहार का इलाका है. हवा की बढ़ती रफ्तार के पीछे बढ़ती गर्मी और वर्षा का नहीं होना है. इन दोनों कारणों के चलते यह इलाका कम दबाव का केंद्र बन जाता है, जिस कारण इस इलाके में हवा तेज चलती है.
जानकारों के मुताबिक इस भौगोलिक दशा की वजह से संघनन भी नहीं हो पाता, जिसके चलते बरसात और कम होती जाती है. डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ ए सत्तार ने बताया कि बिहार में आंधी की दर बढ़ी है. इसका अध्ययन किया जा रहा है.
तेज हवाओं का ऐसा होगा प्रभाव
1. हवा में मौजूद नमी तेजी से खत्म होगी. इसकी वजह से पारिस्थितिक विसंगतियां जन्म लेंगी.
2. मृदा अपरदन बढ़ेगा. मिट्टी की ऊपरी परत में पाये जाने वाले पोषक तत्व खत्म हो जायेंगे. जमीन ऊसर होती जायेगी, जिसके चलते कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ना तय है.
3. भूजल में तेजी से कमी आयेगी. पेयजल और खेती के लिए पानी की कमी होगी.
बढ़ी ठंड के साथ बढ़ा पेसू का लोड, बढ़ी ट्रिपिंग
पटना : बढ़े ठंड के साथ पेसू का लोड बढ़ गया है. एक माह पहले 315 से 325 मेगावाट के बीच पेसू क्षेत्र की दैनिक बिजली खपत थी जो कि रविवार की सुबह बढ़ कर 423 मेगावाट पर पहुंच गयी. इसकी प्रमुख वजह बढ़े ठंड के साथ हीटर का इस्तेमाल बढना है.
इसी के साथ ट्रिपिंग भी बढ़ गयी है. पटना शहर के एक फ्यूज कॉल सेंटर पर एक माह पहले पांच से 10 ट्रिपिंग कॉल औसतन हर रोज आते थे जो बढ़ कर अब 10 से 15 के बीच पहुंच गयी है. ज्यादातर मामलों में इसकी वजह ओवरलोडिंग पायी जा रही है. इसके कारण कई क्षेत्रों को लो वोल्टेज की समस्या भी झेलनी पड़ रही है.
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