शीतकालीन सत्र : शोर-शराबे व हंगामे के बीच सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
Updated at : 01 Dec 2018 8:14 AM (IST)
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शुक्रवार को 44 मिनट विधान परिषद और 29 मिनट ही चली विधानसभा पटना : विधानमंडल का शीतकालीन सत्र समाप्त होते ही शुक्रवार को विधानसभा और विधान परिषद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. अंतिम दिन की कार्यवाही भी दोनों सदन के सदस्यों के हंगामे, शोर-शराबे, वेल में नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ […]
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शुक्रवार को 44 मिनट विधान परिषद और 29 मिनट ही चली विधानसभा
पटना : विधानमंडल का शीतकालीन सत्र समाप्त होते ही शुक्रवार को विधानसभा और विधान परिषद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. अंतिम दिन की कार्यवाही भी दोनों सदन के सदस्यों के हंगामे, शोर-शराबे, वेल में नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ गयी.
अंतिम दिन विधानमंडल में कैग की साल 2016-17 की सामान्य, सामाजिक और आर्थिक प्रक्षेत्र की रिपोर्ट भी पेश की गयी.
अंतिम दिन विधानसभा 29 मिनट और विधान परिषद 44 मिनट ही चली. शीतकालीन सत्र को जनहित के सवाल से अधिक हंगामे और शोर-शराबे के लिए याद किया जायेगा. शीतकालीन सत्र 26 नवंबर को शुरू हुआ था. सत्र के अंतिम दिन विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई विपक्ष कार्य स्थगन प्रस्ताव के नामंजूर होने पर हंगामा करने लगा. आसन ने कई बार सदस्यों से सीट पर जाने की अपील की, लेकिन विपक्ष वेल में डटा रहा. विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने चार मिनट के बाद भोजनावकाश तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. यही हाल विधान परिषद का भी रहा.
पहली पाली में मात्र 12 मिनट ही सदन की कार्यवाही चली. शोर-शराबे के कारण सभापति ने दो बजे दिन तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. भोजनावकाश के बाद दो बजे जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई विपक्षी सदस्य फिर हंगामा करने लगे. इसी हंगामे के बीच उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कैग की रिपोर्ट पेश की. सदन में पांच मिनट तक हंगामे की स्थिति बनी रही. अध्यक्ष ने शाम चार बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. चार बजे अध्यक्ष के समापन संबोधन के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. विधान परिषद की दूसरी पाली भी हंगामे की भेंट चढ़ गयी. सदन में आधा घंटा तक हंगामा होता रहा. इसके बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया.
विपक्षी सदस्यों ने विधायकों के वेतन-भत्ते वापस लिये जाने की मांग उठाते हुए की नारेबाजी
पटना : विधानमंडल सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने किसानों, भूमिहीनों, वर्किंग क्लास की वेतन बढ़ोतरी व बर्खास्त पुलिसकर्मियों को सेवा में वापस लिये जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. सदन प्रारंभ होने के आधे घंटे पहले ही राजद, कांग्रेस व माले के सदस्य विधानसभा परिसर में इकट्ठा हुए और पोस्टर लहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी. कांग्रेस के सदस्यों ने राहुल गांधी की तस्वीर लगे पोस्टर लहराये, जिन पर किसानों के धान का पैसा वापस किये जाने की मांग की गयी थी.
वहीं, राजद-माले के सदस्यों ने डी बंदोपाध्याय कमेटी की रिपोर्ट लागू करने, बर्खास्त पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी को रद्द करने तथा विधायकों के वेतन-भत्ते वापस लिये जाने की मांग उठाते हुए नारेबाजी की. मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड से संबंधित पोस्टर भी लहराये गये. राजद के भाई वीरेंद्र ने कहा कि गैर मजरुआ जमीन पर बने बड़े भवनों को छोड़ कर गरीबों की झोपड़ियों को उजाड़ा जा रहा है. सरकार बालात्कारियों को संरक्षण दे रही है.
पटना : विधान परिषद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही मात्र 44 मिनट चली. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष द्वारा लाये गये कार्य स्थगन प्रस्ताव पर बहस कराने की मांग को लेकर वेल में पहुंच कर हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही पहली पाली में मात्र 12 मिनट चली.
कार्यकारी सभापति मो हारुण रशीद का विपक्षी सदस्यों से अपनी सीट पर बैठने व सदन चलने देने का आग्रह का भी कोई असर नहीं पड़ा.
हंगामे के दौरान कार्यकारी सभापति ने सदन की कार्यवाही दो बजे भोजनावकाश तक के लिए स्थगित कर दी. भोजनावकाश के बाद सदन की कार्यवाही चार मिनट चलने पर स्थगित होने के बाद पुन: आधे घंटे चली. इस दौरान सीएजी रिपोर्ट, विनियोग विधेयक पारित होने के साथ 10 हजार 463 करोड़ का द्वितीय अनुपूरक बजट पास हुआ. इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गयी.
इससे पहले सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होते ही कांग्रेस के प्रेमचंद्र मिश्रा खड़े होकर एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में महिला बंदी के साथ सुरक्षाकर्मियों द्वारा दुष्कर्म किये जाने का मामला उठाया.
विपक्ष ने उठाया आश्रयगृह का मामला : राजद के सुबोध कुमार ने सरकार द्वारा पोषित व संचालित आश्रयगृहों में रहने वाले बच्चियों व महिलाओं के साथ दुष्कर्म सहित अन्य मामले पर कार्य स्थगन प्रस्ताव पर बहस की मांग की. कार्यकारी सभापति ने नियमन का हवाला देते हुए प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिया. इसके विरोध में विपक्ष वेल में पहुंच कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगा.
बाहर भी प्रदर्शन सदन के बाहर राबड़ी देवी के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. इसमें राबड़ी देवी, सुबोध कुमार, डॉ रामचंद्र पूर्वे, कमरे आलम, राधाचरण साह, खुर्शीद मोहम्मद मोहसीन, कांग्रेस के डॉ मदन मोहन झा व प्रेमचंद्र मिश्रा शामिल हुए.
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