बेतिया राज की 175 एकड़ जमीन को बिहार सरकार कराएगी मुक्त, डिप्टी सीएम ने बताया पूरा प्लान

Updated at : 10 Apr 2026 9:34 PM (IST)
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vijay sinha file photo

विजय सिन्हा की फाइल फोटो

Bihar Bhumi: बिहार सरकार अब दूसरे राज्यों में स्थित बेतिया राज की जमीन को भी अवैध कब्जे से मुक्त कराने की तैयारी में है. 175 एकड़ से अधिक भूमि पर कार्रवाई को लेकर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. इस बात की जानकारी डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने दी है.

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Bihar Bhumi: बिहार सरकार अब बेतिया राज की जमीन को लेकर बड़े एक्शन मोड में है. राज्य के बाहर स्थित संपत्तियों को भी अवैध कब्जे से मुक्त कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने साफ किया कि किसी भी कीमत पर सरकारी जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

दूसरे राज्यों में भी चलेगा अभियान

डिप्टी सीएम ने बताया कि उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में फैली बेतिया राज की जमीन को चिन्हित कर उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा. इसके लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सके.

विशेष अधिकारी की होगी नियुक्ति

सरकार ने तय किया है कि उत्तर प्रदेश में स्थित बेतिया राज की संपत्तियों से जुड़े मामलों के लिए सचिव, राजस्व परिषद को विशेष अधिकारी नामित किया जाएगा. इन्हें वही अधिकार दिए जाएंगे, जो बिहार में विशेष पदाधिकारी को प्राप्त हैं.

आपत्ति दर्ज कराने का मिलेगा मौका

अधिसूचना जारी होने के बाद यदि किसी व्यक्ति या पक्ष को जमीन को लेकर आपत्ति है, तो वह राजस्व परिषद के सचिव के समक्ष आवेदन कर सकेगा. इसके बाद मामले की सुनवाई और निर्णय लिया जाएगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिभोगी जमीन को अपने नाम करवाना चाहता है, तो उसे निर्धारित राशि जमा करनी होगी. इसके लिए संबंधित जिले के समाहर्ता (कलेक्टर) द्वारा मूल्य तय किया जाएगा.

अगर निर्धारित राशि जमा नहीं की जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को कानून के तहत बेदखल कर जमीन का कब्जा सरकार को सौंप दिया जाएगा.

यूपी के कई शहरों में फैली है जमीन

बेतिया राज की कुल 175.53 एकड़ जमीन उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फैली हुई है. इसमें इलाहाबाद में 26.56 एकड़, गोरखपुर में 50.92 एकड़ और कुशीनगर में सबसे अधिक 69.59 एकड़ जमीन शामिल है. इसके अलावा बस्ती, अयोध्या (फैजाबाद), महाराजगंज, मिर्जापुर और वाराणसी में भी जमीन मौजूद है.

सरकार के इस फैसले को अतिक्रमण के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है. इससे न सिर्फ सरकारी जमीन की सुरक्षा होगी, बल्कि अवैध कब्जाधारियों पर भी दबाव बढ़ेगा.

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लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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