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‘बाल अधिकार यात्रा’ में बोले राज्यपाल- शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक कठिनाई बाधा नहीं

Updated at : 16 Nov 2018 7:10 PM (IST)
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‘बाल अधिकार यात्रा’ में बोले राज्यपाल- शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक कठिनाई बाधा नहीं

पटना : जैसे सबके अधिकार हैं वैसे ही बच्चों को भी शिक्षा का अधिकार प्राप्त है. आप सभी बच्चों को शिक्षित होना है, देश बदल रहा है और आज जो व्यवस्था है जिसके अंतर्गत शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक कठिनाई बाधा नहीं है. शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कई योजनाएं क्रियान्वित की जा रही […]

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पटना : जैसे सबके अधिकार हैं वैसे ही बच्चों को भी शिक्षा का अधिकार प्राप्त है. आप सभी बच्चों को शिक्षित होना है, देश बदल रहा है और आज जो व्यवस्था है जिसके अंतर्गत शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक कठिनाई बाधा नहीं है. शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कई योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं. उक्त बातें, राज्यपाल लाल जी टंडन ने राजभवन के समीप राजेंद्र बाबू के प्रतिमा–स्थल पर प्रभात खबर व यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विश्व बाल दिवस के उपलक्ष्य में ‘बाल अधिकार यात्रा’ कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान कही.

राज्यपाल ने कहा कि इस साल 2018 के ‘विश्व बाल दिवस’ का विषय है– ‘‘कैसे स्कूलों को बच्चों के लिए सुरक्षित एवं खुशनुमा बनाया जाये.’’ उन्होंने कहा कि इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य सभी बच्चों के जीवन को बेहतर बनाना, उनके अधिकारों को सुनिश्चित करना और उन्हें अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने का हक दिलाने में उनकी मदद करना है. राज्यपाल ने बच्चों से कहा कि शिक्षा का आकाश अनंत है, जहां तक जाना है जाएं. देश और समाज की भी जवाबदेही है कि बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा उपलब्ध करायी जाए. उन्होंने कहा कि बच्चों का अधिकांश समय विद्यालय में बीतता है, इसलिए वहां का पर्यावरण स्वस्थ एवं स्वच्छ रहना चाहिए. आपसी सद्भाव, अनुशासन एवं गुरुजनों के प्रति सम्मान आदि गुणों को बच्चे आत्मसात करें तो उनका जीवन आगे चल कर काफी सुखी होगा और विकास के कई अवसर प्राप्त होंगे.

उन्होंने कहा कि बच्चे ज्ञान और परिश्रम से आगे चलकर समाज एवं देश के निर्माण में अच्छे नागरिक की भूमिका निभाएं. शिक्षित बच्चे ही आगे चलकर विद्वान, वैज्ञानिक, डॉक्टर आदि बनते हैं. दुनिया में जितने तरह के आविष्कार हो रहे हैं, उसमें वे आगे चलकर भागीदार बनते हैं और अपने देश और समाज का मान बढ़ाते हैं, जिससे खुशहाली और सम्पन्नता आती है. किताबी ज्ञानों के साथ–साथ, संस्कार की भी जरूरत पड़ती है. संस्कार का तात्पर्य है कि आप का भी समाज के प्रति कुछ कर्तव्य है. पहला कर्तव्य है कि आप अपनी शिक्षा को पूरी करें, लेकिन अपने जीवनशैली में स्वच्छता के प्रति बदलाव भी लाये. अपने परिवेश के आस–पास के वातावरण को स्वच्छ रखना आपका कर्तव्य है. हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को विद्यालय के बाहर भी प्रेरणा दें कि वे अच्छे नागरिक बन सकें.

कार्यक्रम में यूनिसेफ के बिहार चीफ असदुर रहमान ने कहा कि हर वर्ष इसका आयोजन किया जाता है. भारत सरकार ने भी इस मुहिम को अपनाया हुआ है. प्रभात खबर भी इसके लिए धन्यवाद का पात्र है. वहीं, प्रभात खबर के बिहार स्टेट हेड अजय कुमार ने कहा कि स्कूलों को कैसे विकसित किया जाये, यह समाज की जिम्मेदारी है. यह सब कि जिम्मेदारी है कि बच्चे सुरक्षित कैसे पहुंचे. हम वक्त-वक्त पर ऐसी पहल करते हैं.

बच्चों के मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने की पहल हो रही है : उपमुख्यमंत्री
बाल अधिकार यात्रा के दूसरे चरण में राजधानी वाटिका में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि इस तरह के आयोजन से हर्ष होता है. विश्व बाल दिवस का आयोजन हो रहा है. राज्य के सभी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय की सुविधा की पहल की जा रही है. नल-जल योजना का विस्तार स्कूलों तक किया जा रहा है. बच्चों के मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने की पहल हो रही है. बच्चे भी कर्तव्य को समझें. आप सभी से आग्रह है कि वह छोटी-छोटी चीजें जैसे पौधों को लगाने पर भी ध्यान दें. कम से कम एक पौधा लगाये और उसे संरक्षण दे. आज देश में कई जगहों पर जल का संकट है. जरूरत के अनुसार ही पानी का उपयोग करें. स्कूलों, घरों में पानी को बचाये साथ ही ऊर्जा को भी बचाये. बिजली ऑफ है या ऑन, इस बात का भी ख्याल रखे. नदियों, तालाब को प्रदूषित होने से बचाना है.

बच्चों ने लगाये नारे
आयोजन में हिस्सा ले रहे विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह से हिस्सा लिया और खूब नारे लगाये. इन बच्चों ने अपने हाथों में कई तख्तियां पकड़ी थी. जिस पर परेशानियों को है निबटाना, जितना हो पढ़ना सीखें, भेदभाव से लड़ना सीखें तथा ऐसा स्कूल जहां न कोई स्पेशल हो, न कोई डर हो जहां खुल कर रह सके जैसे कई और नारे लिखे हुए थे. सभी बच्चों को ब्लू रंग के स्टॉल्स दिये गये थे. जिनको उन्होंने अपने गले में धारण किया था. बाल अधिकार यात्रा के तहत हिस्सा ले रहे बच्चों से राजभवन से राजधानी वाटिका तक रैली भी निकाली. आयोजन में पद्मश्री सुधा वर्गिस, यूनिसेफ की निपुण गुप्ता, अविनाश उज्जवल के अलावा बड़ी संख्या में स्कूली छात्र, शिक्षक व अन्य लोग उपस्थित थे.

क्या है बाल अधिकार यात्रा
विश्व बाल दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाली बाल अधिकार यात्रा बच्चों के अधिकारों की वकालत के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है. हर साल 20 नवंबर को पूरी दुनिया में विश्व बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है. वर्ष 1954 में संयुक्त राष्ट्रसंघ ने 20 नवंबर को विश्व भर के बच्चों के बीच एकता और सजगता को प्रोत्साहित करने के लिए विश्व बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी. 1989 में इसी दिन संयुक्‍त राष्‍ट्र की महासभा ने बच्‍चों के अधिकारों के घोषणापत्र को मान्‍यता दी थी. उसी दिन के उपलक्ष्‍य में 20 नवंबर को विश्व बाल दिवस के रूप में चुना गया.

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