बालू-गिट्टी की खरीद-बिक्री के लिए नयी नियमावली का प्रारूप तैयार

Updated at : 10 Nov 2018 3:30 AM (IST)
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बालू-गिट्टी की खरीद-बिक्री के लिए नयी नियमावली का प्रारूप तैयार

पटना : बालू-गिट्टी का अवैध खनन, परिवहन और भंडारण रोकने व इसकी खरीद व बिक्री के लिए नयी नियमावली का प्रारूप तैयार किया गया है. इसकी समीक्षा और सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद लागू होने से आम उपभोक्ताओं को इसका फायदा मिलेगा. साथ ही सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी भी होगी. खान एवं भूतत्व विभाग […]

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पटना : बालू-गिट्टी का अवैध खनन, परिवहन और भंडारण रोकने व इसकी खरीद व बिक्री के लिए नयी नियमावली का प्रारूप तैयार किया गया है. इसकी समीक्षा और सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद लागू होने से आम उपभोक्ताओं को इसका फायदा मिलेगा. साथ ही सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी भी होगी.
खान एवं भूतत्व विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि एक अक्टूबर से राज्य में बालू का खनन शुरू होने के बाद से विभाग को कई अनियमितताओं की लगातार शिकायतें मिल रही हैं. इसमें मूल समस्या अब भी महंगी दर पर आम लोगों को बालू मिलने की है, जबकि राज्य में पर्याप्त मात्रा में बालू उपलब्ध है.
नियमावली के प्रारूप में क्या है : नये नियमावली के प्रारूप में लघु खनिजों के खनन, परिवहन और भंडारण से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल किया गया है. इसमें मुख्य रूप से अधिकारियों की शक्तियां और जिम्मेदारी, खनन पट्टा लेनेसंबंधी नियम, समयावधि, पर्यावरण सुरक्षा, अवैध खनन, परिवहन और भंडारण रोकने, उसके लिए जुर्माने और कानूनी प्रावधान सहित अन्य नियम समाहित हैं.
समीक्षा व सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद होगी लागू
खान एवं भूतत्व विभाग ने पिछले साल नियमावली बनाया था और राज्य सरकार ने इसे लागू किया था, लेकिन इसके विरोध में पटना हाईकोर्ट में केस हुआ. कोर्ट ने उस नियमावली पर रोक लगा दी थी.
इसके बाद से पुरानी नियमावली से ही लघु खनिजों का खनन, परिवहन और भंडारण हो रहा था.
नियमावली की क्यों है जरूरत
बिहार में लघु खनिजों के खनन, भंडारण और परिवहन के लिए राज्य सरकार ने 2013 में खनन नीति बनायी थी. उसमें संशोधन और अवैध बालू खनन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने वर्ष 2017 में नये नियम बनाये. इसे 10 अक्टूबर 2017 को बिहार गजट में प्रकाशित किया गया था.
14 नवंबर को बालू-गिट्टी की रेट जारी की गयी, लेकिन बालू घाटों के बंदोबस्तधारियों और परिवहनकर्ताओं ने इस पर आपत्ति जतायी. उन्होंने इसके विरोध में पटना हाईकोर्ट में केस फाइल की और हाईकोर्ट ने इस नियमावली पर रोक लगा दी. बाद में बिहार सरकार ने यह नियमावली वापस ले ली. इसके बाद से अब तक पुरानी नियमावली से ही सारा कामकाज हो रहा है.
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