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IPTA@75 : देश में इतिहास को बदलने की हो रही साजिश... हमें अपने हथियारों से देश को बदलना है... देखें वीडियो

Updated at : 01 Nov 2018 9:30 AM (IST)
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IPTA@75 : देश में इतिहास को बदलने की हो रही साजिश... हमें अपने हथियारों से देश को बदलना है... देखें वीडियो

पटना : इप्टा के प्लैटिनम जुबली समारोह का रंगारंग समापन भारतीय नृत्य कला मंदिर में बुधवार को किया गया. इस मौके पर देश भर से आये विभिन्न कलाओं के दिग्गजों और साथियों को शॉल और मधुबनी पेंटिंग के प्रतीक चिह्न भेंट किये गये. समापन के अवसर पर आये लोगों ने इप्टा के संकल्प को पूरा […]

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पटना : इप्टा के प्लैटिनम जुबली समारोह का रंगारंग समापन भारतीय नृत्य कला मंदिर में बुधवार को किया गया. इस मौके पर देश भर से आये विभिन्न कलाओं के दिग्गजों और साथियों को शॉल और मधुबनी पेंटिंग के प्रतीक चिह्न भेंट किये गये. समापन के अवसर पर आये लोगों ने इप्टा के संकल्प को पूरा करने पर जोर दिया. इस मौके पर वक्ताओं ने अपने-अपने विचार भी रखें.

देश में इतिहास को बदलने की हो रही साजिश : रणबीर सिंह

इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणबीर सिंह ने समापन अवसर पर राजस्थान में बदल रहे माहौल को रेखांकित करते हुए कहा कि अब इतिहास को बदलने की साजिश हो रही है. इस बदल रहे माहौल को हमें बदलना है. अंत में उन्होंने नियाज हैदर के एक शेर के साथ अपनी बातें समाप्त की. कहा-

‘था जहां, है वहीं, वो सेठ वो आका नहीं हटता
मेरी गरीबी हट रही है, मगर फाका नहीं हटता.’

हमें अपने हथियारों से देश को बदलना है : एमएस सथ्यू

समापन के मौके पर उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि हमें मिल कर चलना है. सिर्फ खाली हाथ नहीं चलेंगे. हम अपने हथियार लेकर चलेंगे. हमारे हथियार लाठी, तलवार और बंदूक नहीं हैं. हमारी कला है. हमारी शायरी है. हमारा नाटक है. हमारा सिनेमा है. इसको लेकर हम आगे बढ़ेंगे. देश में जो माहौल बिगड़ता जा रहा है, इसे हमें बदलना है. यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. मैं समझता हूं कि यह काम कल्चरली होना चाहिए और यह इप्टा कर सकता है. पटना में इप्टा का इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने के लिए उन्होंने पटना इप्टा की टीम को बधाई भी दी.

दिन-प्रतिदिन जवान होता जा रहा है इप्टा : अखिलेंद्र मिश्रा

समापन के मौके पर उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि शॉर्ट द एज, हायर द एनर्जी, लेकिन यहां उल्टा ही हो गया. हायर द एज, हायर द एनर्जी. 75 वर्ष में ये ऊर्जा, ये उमंग, ये तरंग, ये जोश, विश्व का ऐसा संगठन है, जो (इप्टा) जैसे-जैसे बूढ़ा (75 वर्ष) होता जा रहा है, और अधिक जवान (विस्तृत) होता जा रहा है. इप्टा के 75 साल में तीन बच्चे हुए. नागपुर, अमरावती और कोल्हापुर में इप्टा का जन्म हुआ. इप्टा को तीन बच्चे और मिले, बधाई हो. साथ ही उन्होंने लोगों के समक्ष सवाल उठाते हुए कहा कि उपनिषद कहता है कि- तत्वमसि त्वम् तदसि अहं ब्रह्मास्मि…, अर्थात- वह तू है, तू वह है, मैं ब्रह्म हूं. यानी जब तुम्हारे अंदर ही ब्रह्म है. तुम ब्रह्म के अंश हो. सभी लोगों में ब्रह्म हैं. उसी के अनुसार जी रहा है, चल-बोल रहा है. फिर जो ब्रह्म मेरे भीतर है, वही आपके अंदर है. जब एक ही ब्रह्म सभी के अंदर विराजमान है, तो समाज के अंदर इतना भेदभाव क्यों? इतनी असमानता क्यों? इतना कोलाहल क्यों? इतना मतभेद क्यों? इतना हाहाकार क्यों? इतना शोरगुल क्यों? चिंतनीय विषय है. यह सवाल बार-बार मेरे दिल-ओ-दिमाग में कौंधता है कि ऐसा क्यों है? साथ ही कहा कि संसार में जितने भी धर्म हैं, उनका आधारभूत मूलतत्व एक ही है. तो फिर भी इतना मतभेद, हाहाकार, चोरी-सीनाजोरी-छिछोरी और ना जानें क्या-क्या? अंत में ‘हम होंगे कामयाब…’ के साथ इप्टा के 75 वर्ष पर आयोजित राष्ट्रीय प्लैटिनम जुबली समारोह का समापन किया गया. एमएस सथ्यू ने कहा कि इप्टा के इस समारोह या दूसरे समारोह में भी सिनेमा का सेक्शन भी होना चाहिए था.

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