IPTA‍@75 : हम विचारों की लड़ाई हार गये तो राजनीतिक जंग भी हार जायेंगे : गौहर रजा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Oct 2018 9:13 AM

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पटना : हमारा समाज रूढ़िवादी परंपराओं की रही है. हमारे पास ऐसी कोई पहचान नहीं रही है, जो पूरे मुल्क को एक सूत्र में बांध कर रख सके, फिर भी हमने आजादी के आंदोलन में एक बड़े लक्ष्य के आगे संकीर्ण भेदों को मिटा कर रख दिया. यह संभवत: उस समय के नेतृत्व की काबिलियत […]

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पटना : हमारा समाज रूढ़िवादी परंपराओं की रही है. हमारे पास ऐसी कोई पहचान नहीं रही है, जो पूरे मुल्क को एक सूत्र में बांध कर रख सके, फिर भी हमने आजादी के आंदोलन में एक बड़े लक्ष्य के आगे संकीर्ण भेदों को मिटा कर रख दिया. यह संभवत: उस समय के नेतृत्व की काबिलियत थी. अब ऐसा नहीं है. लेकिन, हमारे संविधान में वे सभी तत्व मौजूद हैं, जो बहुलता के बावजूद सभी को एक सूत्र में बांध कर रख सकें. यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अगर हम विचारों की लड़ाई हार गये, तो राजनीति की जंग भी हार जायेंगे. उक्त बातें वैज्ञानिक, उर्दू के लेखक, शायर, सामाजिक कार्यकर्ता और डॉक्‍यूमेंट्री फिल्‍म मेकर गौहर रजा ने इप्टा के प्लैटिनम जुबली समारोह के तीसरे दिन भारतीय नृत्य कला मंदिर में आयोजित ‘भारत की संस्कृति एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परिचर्चा में कहीं.

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सेमिनार की शुरुआत करते हुए सुप्रसिद्ध लेखक वीरेंद्र यादव ने कहा कि भारत की संस्कृति को एक रंग में रंगने की कोशिशें पिछले दिनों बहुत तेज हुई हैं. इप्टा के महासचिव राकेश ने शेख सादी की एक कहानी के हवाले से कहा कि किसी काल का सांस्कृतिक रुझान क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी नियंत्रक शक्ति किन हाथों में है.

‘संस्कृति’ संकट विशुद्ध राजनीतिक : शैलेंद्र

झारखंड इप्टा के शैलेंद्र कुमार ने कहा कि हम जिसे ‘संस्कृति’ का संकट बता रहे हैं, वह संकट दरअसल विशुद्ध राजनीतिक है और वह कालखंड के इस दौर में संस्कृति का मुखौटा पहनकर आयी है. सत्ता बहुलवादी संस्कृति को सुविधानुसार अपने सांचे में ढालने के प्रयास में लगी हुई है. यह आवाज को दबाने का नया विमर्श है, जो जीवन की नमी को सोखनेवाला है. फिल्मकार एमएस सथ्यू ने इप्टा के गठन के दिनों की याद करते हुए कहा कि तब भी हमारे सामने कुछ ऐसी ही चुनौतियां थीं. चर्चा में दक्षिण भारत के केपी शशि और बंगाल के रंगकर्मी शमिक बंदोंपाध्याय ने भी हिस्सा लिया. कार्यक्रम के आखिर में इप्टा रायगढ़ की नाट्य आलेख पर केंद्रित ‘रंगकर्म’ पत्रिका का लोकार्पण किया गया. उषा आठले ने पत्रिका का संक्षिप्त परिचय दिया.

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चित्त प्रसाद को समर्पित लगी फोटो प्रदर्शनी

इप्टा राष्ट्रीय प्लैटिनम जुबली समारोह के मौके पर प्रदर्शनियों का भी आयोजन किया गया है. यह प्रदर्शनी भारतीय नृत्य कला मंदिर के बहुद्देश्यीय सांस्कृतिक परिसर की गैलेरी में लगी है. इसमें इप्टा से जुड़े अहम दस्तावेज, संगीत नाटक अकादमी के सम्मान से सम्मानित कलाकारों की तस्वीरें, गांधी जी की 150वीं जयंती पर उनके विचार, कविता पोस्टर और कंधमाल हिंसा पर फोटो शामिल है. तीन गैलेरी में फैली इस प्रदर्शनी का उद्धघाटन मशहूर चित्रकार सवींद्र सावरकर ने किया. इस आयोजन के लिए बहुद्देश्यीय परिसर को मशहूर चित्रकार और इप्टा आंदोलन से जुड़े चित्त प्रसाद को समर्पित किया गया है. मालूम हो कि चित्त प्रसाद ने ही इप्टा का निशान बनाया था.

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