पटना : फीस रिफंड में लग रहे महीनों, कागजात भी नहीं देते

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Oct 2018 8:59 AM

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एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में एडमिशन लेने में होती है परेशानी पटना : एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में एडमिशन को लेकर स्टूडेंट्स हमेशा परेशान रहते हैं. ऑरिजनल कागजात लेने से लेकर फीस रिफंड कराने में कई माह लग जाते हैं, लेकिन न फीस रिफंड हो पाता है और न ही ऑरिजनल कागजात मिल […]

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एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में एडमिशन लेने में होती है परेशानी
पटना : एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में एडमिशन को लेकर स्टूडेंट्स हमेशा परेशान रहते हैं. ऑरिजनल कागजात लेने से लेकर फीस रिफंड कराने में कई माह लग जाते हैं, लेकिन न फीस रिफंड हो पाता है और न ही ऑरिजनल कागजात मिल पाते हैं. कुछ इसी तरह का एक मामला पटना यूनिवर्सिटी का भी है. रिया भारती ने 11 जुलाई को मगध महिला कॉलेज में बीबीए में एडमिशन कराया. इसके तुरंत बाद 20 जुलाई को रिया ने पीयू प्रशासन और मगध महिला प्रशासन को पत्र लिख कर दाखिले की राशि वापसी करने का अनुरोध किया था. लेकिन अब तक पटना यूनिवर्सिटी ने रिया भारती की फीस नहीं लौटायी है.
इसी बीच बीएचयू प्रशासन छात्रा से ऑरिजनल कागजात मांग रहा है. ऑरिजनल कागजात भी नहीं मिल पाये हैं. रिया के पिता धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि जुलाई माह से ही फीस वापसी को लेकर लगातार यूनिवर्सिटी और कॉलेज का चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन सफलता नहीं मिल पायी है. राज्यपाल को भी शिकायत की गयी है. लेकिन फीस रिफंड नहीं हो पायी है. इस पर मगध महिला कॉलेज की प्राचार्या प्रो शशि शर्मा ने कहा कि यूनिवर्सिटी में फीस जमा हुआ था. यूनिवर्सिटी जब पैसा भेजेगा तब फीस रिफंड कर दी जायेगी.
यूजीसी के दिये गये निर्देशों का नहीं होता है असर, फीस रिफंड का बनाया गया है नियम
मानव संसाधन विभाग ने तो फीस रिफंड को लेकर नये नियम बना दिये हैं. लेकिन यूजीसी के कई सख्त निर्देश के बाद भी स्टूडेंट फीस रिफंड कराने को लेकर परेशान रहते हैं. यूनिवर्सिटी और कॉलेज के चक्कर लगाने के बाद भी उनकी फीस रिफंड नहीं हो पाती है. इस संबंध में पीयू के अधिकारी ने कहा कि कॉलेज को पैसा जल्द वापस किया जायेगा. रिया भारती की शिकायत मिली थी. इस संबंध में जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी. हालांकि अधिकारी कहते हैं कि फीस रिफंड में लंबी प्रक्रिया हो जाती है. वित्तीय मामला होता है, इस कारण रिफंड का मामला तय प्रक्रिया से ही होगा.
मानव संसाधन विकास विभाग ने बना दिया है नया नियम : हाल में ही मानव संसाधन विकास विभाग ने कहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के दौरान छात्र अक्सर एक संस्थान से दूसरे संस्थान में प्रवेश लेते हैं. लेकिन इस प्रक्रिया में कई संस्थान फीस वापस नहीं करते थे.
इसके साथ उनके ऑरिजनल दस्तावेज भी नहीं देते थे. इस मनमाने रवैये के कारण स्टूडेंट दूसरे संस्थानों में प्रवेश नहीं ले पाते थे. मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को कहा कि कई शिकायतों को देखते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में फीस वापसी को लेकर नये नियम बनाये गये हैं. फीस वापस नहीं करने पर मान्यता पर भी खतरा है.
नये नियमों के अनुसार एडमिशन प्रक्रिया समाप्त होने के 15 दिन पहले प्रवेश रद्द कराता है, तो प्रोसेसिंग फीस काट कर पूरा पैसा वापस मिलेगा. वहीं इस नियम के तहत प्रोसेसिंस फीस के नाम पर कॉलेज अधिकतम सिर्फ पांच हजार रुपये ही काट सकेंगे.
जबकि प्रवेश बंद होने के 15 दिनों के भीतर यदि कोई छात्र प्रवेश रद्द कराता है, तो उसे 90 प्रतिशत फीस वापस दी जायेगी. 15 दिनों से ज्यादा होने पर 80 प्रतिशत और 30 दिन होने पर 50 फीसदी फीस ही स्टूडेंट को वापस की जायेगी.
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