रामधारी सिंह दिवाकर को 2018 का श्रीलाल शुक्ल इफको स्मृति साहित्य सम्मान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Oct 2018 8:20 AM
पटना : इंडियन फारर्मस फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड यानी इफको की ओर से हिंदी साहित्यकार रामधारी सिंह दिवाकर को वर्ष 2018 का ‘श्रीलाल शुक्ल इफको स्मृति साहित्य सम्मान’ दिया जायेगा. खेती-किसानी को अपना साहित्यिक आधार बनानेवाले दिवाकर को 31 जनवरी, 2019 को नयी दिल्ली में आयोजित होनेवाले कार्यक्रम में सम्मानित करने की घोषणा की गयी है. […]
पटना : इंडियन फारर्मस फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड यानी इफको की ओर से हिंदी साहित्यकार रामधारी सिंह दिवाकर को वर्ष 2018 का ‘श्रीलाल शुक्ल इफको स्मृति साहित्य सम्मान’ दिया जायेगा. खेती-किसानी को अपना साहित्यिक आधार बनानेवाले दिवाकर को 31 जनवरी, 2019 को नयी दिल्ली में आयोजित होनेवाले कार्यक्रम में सम्मानित करने की घोषणा की गयी है. सम्मानित साहित्यकार को प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र के साथ 11 लाख रुपये राशि दी जायेगी.
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अररिया जिले के नरपतगंज गांव में मध्यमवर्गीय किसान परिवार में जन्म लेनेवाले दिवाकर ने दरभंगा के मिथिला विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त होने के बाद बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, पटना के निदेशक भी रहे.अपनी रचनाओं के लिए जाने-जानेवाले दिवाकर की कहानी पर फिल्म का निर्माण भी किया जा चुका है.
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दिवाकर की रचनाओं में ‘नये गांव में’, ‘अलग-अलग परिचय’, ‘बीच से टूटा हुआ’, ‘नया घर चढ़े’ सरहद के पार’, धरातल’, माटी-पानी’, ‘मखान पोखर’, ‘वर्णाश्रम’, झूठी कहानी का सच’ (कहानी संग्रह)’, ‘क्या घर क्या परदेश’, ‘काली सुबह का सूरज’, ‘पंचमी तत्पुरुष’, ‘दाखिल-खारिज’, ‘टूटते दायरे’, अकाल संध्या (उपन्यास)’, ‘मरगंगा में दूब (आलोचना)’ प्रमुख हैं.
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श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में शुरू किया गया यह सम्मान ऐसे हिंदी लेखक को दिया जाता है, जिसकी रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन, हाशिए के लोग, विस्थापन आदि से जुड़ी समस्याओं, आकांक्षओं और संघर्षों के साथ-साथ भारत के बदलते हुए यथार्थ को अपने लेखन में उल्लेखित-चित्रित किया हो.
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