पटना : जाति बंधन तोड़ सात फेरे लेने वालों पर भारी सिस्टम का फेरा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Oct 2018 9:01 AM
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अनिकेत त्रिवेदी एक लाख मिलती है प्रोत्साहन राशि, जाति और आवास प्रमाण पत्र की जांच में लग जाते हैं वर्षों पटना : सामाजिक बंधनों को तोड़ कर अपनी मर्जी से शादी करने वाले, वर्षों तक मां-बाप से लेकर परिवार और समाज की नाराजगी का दंश झेलने वाले सरकारी सिस्टम के अागे पस्त होते जा रहे […]
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अनिकेत त्रिवेदी
एक लाख मिलती है प्रोत्साहन राशि, जाति और आवास प्रमाण पत्र की जांच में लग जाते हैं वर्षों
पटना : सामाजिक बंधनों को तोड़ कर अपनी मर्जी से शादी करने वाले, वर्षों तक मां-बाप से लेकर परिवार और समाज की नाराजगी का दंश झेलने वाले सरकारी सिस्टम के अागे पस्त होते जा रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि अंतरजातीय विवाह करने के बाद सैकड़ों युवाओं को सरकारी प्रोत्साहन योजना राशि लेने में बेहद लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.
कभी फंड की कमी, कभी जांच के नाम पर वर्षों से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में चक्कर काटती फाइल अंतरजातीय विवाह करने वालों को तत्काल राहत देने में बाधक साबित हो रही हैं. बीते पांच वर्षों से अब तक जिले में 331 से अधिक ऐसे मामले हैं, जिनकी जांच अब तक पूरी नहीं हो पायी हैं.
अगस्त से अब तक 51 आवेदन
अगस्त से अब तक 51
आवेदन आ चुके हैं. जिनको जांच के लिए विभिन्न सरकारी कार्यालयों में भेजा गया है.वहीं, वर्ष 2013-14 में 37, वर्ष 2014-15 में 49, वर्ष 2014-15 में 21, वर्ष 2016 में 72, वर्ष 2017 में 89 अौर इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक 63 मामले लंबित हैं.
लंबी होती है जांच प्रक्रिया
जिले में हर माह 20 से 25 आवेदन अंतरजातीय विवाह में योजना का लाभ लेने के लिए आते हैं. इसमें 30 फीसदी से अधिक मामलों में कागजात के अभाव में मामला पंजीकृत ही नहीं होता है. लेकिन, इस योजना में बड़ी बात है कि लाभ मिलने के लिए कोई समय सीमा तय ही नहीं की गयी है.
पहले आवेदन के बाद सामाजिक सुरक्षा कोषांग फौरी तौर पर कागजात की जांच करता है. इसके बाद लड़का व लड़की का आवासीय वेरिफिकेशन कराया जाता है. वहां से बीडीओ स्तर से रिपोर्ट आनी होती है. इसके अलावा शादी प्रमाणपत्र की जांच की जाती है. मैरेज रजिस्ट्रेशन नंबर की जांच होती है. फिर वहां से उप विकास आयुक्त स्तर पर जांच रिपोर्ट के आधार पर योजना के लाभ की स्वीकृति दी जाती है.
इसके बाद योजना राशि के लिए विभाग में फाइल भेज दी जाती है. इसके बाद वहां से राशि मिलने के बाद शादी करने वाले दंपत्ति को राशि दी जाती है. कुल मिला कर इतनी प्रक्रिया होने में कभी-कभी छह माह तो कभी उससे भी अधिक समय लग जाता है. कई बार जांच फाइनल भी नहीं हो पाती है.
स्थानीय जिले का होना चाहिए लड़का
अंतरजातीय विवाह योजना का लाभ लेने के लिए लड़का को स्थानीय जिले यानी पटना का होना चाहिए. लड़की किसी भी जिले की हो सकती है. विवाह का किसी भी जिले से निबंधन होना चाहिए. योजना का लाभ शादी के दो वर्ष के भीतर ही मिल सकता है. जुलाई के अंत में सात विवाहित जोड़ों को इसका लाभ मिला था. पहले जिले के बाल संरक्षण इकाई में आवेदन किया जाता था. अब सामाजिक सुरक्षा कोषांग स्तर से लिये जाते हैं.
प्रमाणपत्रों की जांच में समय लगता है. फिर भी जो मामले लटके हैं, उनकी जांच करा जल्द-से-जल्द पूरा करने का निर्देश दिया जायेगा. फंड की कमी नहीं है, विभाग से आने के बाद राशि दी जाती है.
– कुमार रवि, जिलाधिकारी
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