विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी बोले विशेष राज्य के दर्जे के लिए फिट है बिहार

Updated at : 02 Oct 2018 8:26 AM (IST)
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विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी बोले विशेष राज्य के दर्जे के लिए फिट है बिहार

पटना : बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बिहार विशेष राज्य के दर्जे और विशेष सहायता के लिए हर तरह से फिट है. हर दृष्टिकोण से बिहार विशेष सहायता का हकदार है. उन्होंने पूरजोर तरीके से 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष से कहा कि बिहार की सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार […]

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पटना : बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बिहार विशेष राज्य के दर्जे और विशेष सहायता के लिए हर तरह से फिट है. हर दृष्टिकोण से बिहार विशेष सहायता का हकदार है. उन्होंने पूरजोर तरीके से 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष से कहा कि बिहार की सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें. तभी बिहार के साथ न्याय होगा.
इस बार तो आयोग के अध्यक्ष भी ऐसे व्यक्ति को बनाया गया है, जो बिहार को अच्छे से जानते हैं. बावजूद इसके कहीं बिहार विशेष राज्य के दर्जे प्राप्त करने से वंचित न रह जाये. वह आद्री की तरफ से एक निजी होटल में आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि बिहार विशेष दर्जे के लिए तय तमाम मानकों में हर तरह से फिट बैठता है.
चाहे वह भौगोलिक विषमता की बात हो या अंतर जिला या अंतर राज्य विषमता की, हर आयामों पर बिहार इसके लिए पूरी तरह से फिट है. यहां का 73 फीसदी भूभाग बाढ़ से ग्रसित रहता है. क्षेत्रीय विषमता से जुड़े मामलों का अध्ययन करने के लिए बिहार सबसे उपर्युक्त स्थान है. उन्होंने कहा कि बिहार ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद बिजली समेत अन्य क्षेत्रों में बेहतर मॉडल स्थापित किया है. महिला सशक्तीकरण में भी बिहार नजीर है.
तमाम कमी के बाद भी बेहतर ग्रोथ हासिल किया गया है. अब राज्य का कितना इम्तिहान लिया जायेगा. उन्होंने कहा कि पहले योजना आयोग हुआ करता था, इससे लोग पूरी तरह से परिचित थे. इसके स्थान पर वित्त आयोग आ गया है. बीआरजीएफ (बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड) के स्थान पर एस्पायरेशनल (अाकांक्षी) डिस्ट्रिक्ट आ गये हैं. इस तरह से कई नये शब्दों का मायाजाल इन दिनों फैल रहा है.
कहीं इन भारी-भरकम शब्दों के चक्कर में वास्तविक टारगेट ही नहीं छूट जाये. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बिहार में प्रत्येक साल नेपाल से पानी आता है और इससे तबाही होती है. इसमें बिहार की गलती नहीं है. नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता के कारण वहां की सरकार से इस मसले पर कभी बात नहीं हो पायी. इन बातों पर गौर किये बिना विकास संभव नहीं है.
भूमंडलीकरण का प्रभाव भी समाज के विकास पर पड़ा है : शैबाल गुप्ता
कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में आद्री के सदस्य सचिव शैबाल गुप्ता ने कहा कि बिहार जैसे राज्यों के लिए इस सेमिनार का विषय बेहद मौजू है. भूमंडलीकरण का प्रभाव भी समाज के विकास पर पड़ा है.
वित्त विभाग की प्रदान सचिव सुजाता चतु‌र्वेदी ने कहा कि देश में आर्थिक विकास की लंबी अवधारणा रही है. समय और जरूरत के हिसाब से योजनाएं चलायीं और बंद की जाती हैं. बीआरजीएफ को 2007 में शुरू करके 2015 में बंद कर दिया गया. वर्तमान वित्त आयोग पर तमाम समस्याओं और आर्थिक विसंगति को दूर करने की जिम्मेदारी है. पिछड़ेपन के सही कारणों का पता लगाकर इन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है. क्षेत्रीय विषमता को दूर करने के लिए टिकाऊ प्लान की जरूरत है.
विषमता के लिए सिर्फ नीति ही नहीं, राजनीति भी दोषी
झारखंड के संसदीय कार्य सह खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने कहा कि अंतर राज्य और अंतर जिला विषमता के लिए सिर्फ नीति ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि राजनीतिक विद्वेष भी इसके लिए उतनी ही जिम्मेदार है. विषमता से जुड़ा यह विषय नया नहीं है, जैसी स्थिति 40 साल पहले थी, वही स्थिति आज भी है.
क्षेत्रीय विषमता के गैप या अंतर को अब तक पाटा नहीं जा सका है. योजनाएं या वित्त आयोग की जो भी अनुशंसाएं होती हैं, उनका क्रियान्वयन जमीन पर होना चाहिए. बिहार-झारखंड जैसे राज्य अपने हिस्से के संसाधनों का उपयोग अपने लिए नहीं कर पाये हैं. इन राज्यों में आधारभूत संरचनाओं का विकास नहीं होने की वजह से संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो पाया है.
नीतियों के क्रियान्वयन में कमी के कारण सही तरीके से विकास नहीं हो पाया है. बिहार, झारखंड, ओिडशा और पश्चिम बंगाल में पूरे संसाधनों का 65 से 70 फीसदी हिस्सा मौजूद है, लेकिन उपयोग यहां नहीं हो पा रहा है. विकास पर्यावरण को ध्यान में रखकर करने की जरूरत है. इन राज्यों के विकास के लिए अलग से विंग बने.
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