पटना : मान्यता जाने के बाद दूसरे प्राइवेट स्कूलों से सांठगांठ कर भरवाते हैं परीक्षा फॉर्म
Updated at : 24 Sep 2018 8:38 AM (IST)
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पटना : बिहार-झारखंड में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पैटर्न के नाम पर ऐसे कई स्कूल चल रहे हैं, जो बोर्ड से संबद्ध नहीं हैं या फिर तीन-चार वर्ष पूर्व ही संबद्धता समाप्त हो चुकी है. बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध संबद्ध स्कूलों की सूची में उन स्कूलों के नाम भी शामिल हैं, जिनमें किसी […]
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पटना : बिहार-झारखंड में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पैटर्न के नाम पर ऐसे कई स्कूल चल रहे हैं, जो बोर्ड से संबद्ध नहीं हैं या फिर तीन-चार वर्ष पूर्व ही संबद्धता समाप्त हो चुकी है. बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध संबद्ध स्कूलों की सूची में उन स्कूलों के नाम भी शामिल हैं, जिनमें किसी की संबद्धता 31 मार्च, 2013, तो किसी की 31 मार्च, 2014 या उससे पहले समाप्त हो चुकी है.
बताया जाता है कि कुछ नामचीन व बड़े स्कूलों को छोड़ दिया जाये, तो कई अन्य स्कूल संबद्धता या एक्सटेंशन नहीं मिलने की स्थिति में दूसरे स्कूलों के साथ साठगांठ कर विद्यार्थियों का परीक्षा फाॅर्म भरवाते हैं.
दरअसल स्कूल चलता रहे, इस उद्देश्य से ऐसा किया जाता है. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों के साथ एक तरह से छल हो रहा है. रजिस्ट्रेशन या परीक्षा में किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं होने के कारण विद्यार्थी और अभिभावक भी आवाज नहीं उठाते. उल्लेखनीय है कि पिछले वर्षों के दौरान भी यहां के कुछ स्कूलों में संबद्धता बगैर विद्यार्थियों का परीक्षा फाॅर्म भरवाये जाने का मामला प्रकाश में आता रहा है. लेकिन, इस धंधे पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है. परिणाम यह है कि इन स्कूलों में अभिभावकों से मनमाना रकम की वसूली कर परीक्षा फाॅर्म भरवाये जाते हैं.
दूसरे जिलों के स्कूलों से दिलायी जाती है परीक्षा, 25 से 30 हजार रुपये फीस
इन स्कूलों में पढ़नेवाले विद्यार्थियों का सीबीएसइ से संबद्ध अन्य स्कूलों के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराया जाता है. फिर एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिडेट) भी उसी स्कूल से जमा कराया जाता है.
कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जिनकी आसपास के अन्य जिलों में स्थित स्कूलों से साठगांठ है. इस कारण विद्यार्थियों को अन्य जिलों में जाकर परीक्षा देनी पड़ती है. बताया जाता है कि इन स्कूलों में प्लस-टू की एडमिशन फीस से लेकर परीक्षा फीस भी संबद्धता प्राप्त स्कूलों की तुलना में अधिक है. एडमिशन के नाम पर 25 से 30 हजार रुपये तक लिये ही जाते हैं, परीक्षा फीस के रूप में भी तीन से चार गुणा अधिक राशि की वसूली की जाती है.
बिहार-झारखंड में 1292 संबद्ध स्कूल
सीबीएसइ की वेबसाइट पर बोर्ड से संबद्ध (एफिलिएटेड) स्कूलों की सूची उपलब्ध है. सूची को देख कर पता लगाया जा सकता है कि कौन सा स्कूल बोर्ड से संबद्ध है और कौन नहीं. पटना रीजन यानी बिहार-झारखंड में 1292 संबद्ध स्कूल हैं. जबकि, पटना जिले में यह संख्या 166 है.
पटना जिला स्थित संबद्ध स्कूलों की सूची में नोट्रेडम एकेडमी, लोयोला स्कूल समेत अन्य स्कूलों के भी नाम हैं, लेकिन जो संबद्धता की तिथि है वह लैप्स कर गयी है. हालांकि, इन स्कूलों की ओर से एक्सटेंशन के लिए आवेदन किया गया है. स्कूलों को आगामी दिनों में अथवा जल्द ही एक्सटेंशन मिलने की उम्मीद है. नोट्रेडम की प्राचार्या सिस्टर जेसी ने बताया कि इस संबंध में विद्यार्थियों व अभिभावकों को भी जानकारी दी जा चुकी है.
– सीबीएसई से तीन व पांच सालों के लिए संबद्धता मिलती है. संबद्धता की अवधि समाप्त होने के बाद जिन स्कूलों को एक वर्ष या अधिक समय तक एक्सटेंशन नहीं मिलता, उनमें कई स्कूल दूसरे स्कूलों से मिल कर विद्यार्थियों का परीक्षा फाॅर्म भरवाते हैं. हालांकि, यह सही नहीं है. लेकिन, स्कूल संचालन और छात्रहित में ऐसा किया जाता है.
ललिता सरीन, एजुकेशनल एक्टिविस्ट
– जिले में ऐसे कई स्कूल चल रहे हैं, जिनकी या तो संबद्धता नहीं है या फिर एक्सटेंशन नहीं मिला है. ऐसे स्कूल दूसरे स्कूलों से साठगांठ कर अपने विद्यार्थियों का परीक्षा फाॅर्म भरवाते हैं. उनसे दो-तीन गुना अधिक शुल्क वसूलते हैं. विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता है. बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है.
संजीव कुमार पाठक, प्रगतिशील अभिभावक संघ
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