आरक्षण पर बोले रामविलास, कहा- गरीब सवर्णों के आरक्षण के लिए संघर्ष करेंगे, इंडियन ज्यूडिशियल सर्विसेज की रखी मांग

Updated at : 07 Sep 2018 10:52 PM (IST)
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आरक्षण पर बोले रामविलास, कहा- गरीब सवर्णों के आरक्षण के लिए संघर्ष करेंगे, इंडियन ज्यूडिशियल सर्विसेज की रखी मांग

पटना : केंद्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ गुरुवार को किये गये भारत बंद की निंदा की और कहा कि इसका असर तीन-चार राज्यों में कुछ जगहों पर रहा. उन्होंने कहा कि लोजपा गरीब सवर्णों को आरक्षण देने का हमेशा ही समर्थन करती रही है. गरीब सवर्णों को 15 […]

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पटना : केंद्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ गुरुवार को किये गये भारत बंद की निंदा की और कहा कि इसका असर तीन-चार राज्यों में कुछ जगहों पर रहा. उन्होंने कहा कि लोजपा गरीब सवर्णों को आरक्षण देने का हमेशा ही समर्थन करती रही है. गरीब सवर्णों को 15 फीसद आरक्षण मिलना चाहिए. इसके लिए लोजपा संघर्ष करेगी. ऊंच वर्ग के लोग प्रबुद्ध वर्ग के लोग हैं. ऊंच जाति के लोगों ने ही उनके लिए लड़ने का काम किया. सब अंग मजबूर रहे और पांव में लकवा मार देगा तो आदमी चलेगा कैसे. यह हजारों साल की बुराई है, इसलिए संविधान निर्माताओं ने ये किया.

उन्होंने कहा कि दलितों के दो अप्रैल के भारत बंद को विपक्ष द्वारा जम कर हवा दी गयी थी और सफलता का क्रेडिट लिया गया था. लेकिन, विपक्ष सवर्णों के भारत बंद में चुप्पी क्यों साधे है? राहुल गांधी, मायावती एवं मुलायम सिंह यादव ने कोई बयान क्यों नहीं दिया. पासवान ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट को लेकर समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है. कानून का इस्तेमाल गलत के खिलाफ होता है. इसलिए एससी-एसटी कानून को लेकर डरने की आवश्यकता नहीं है. मंत्री ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट 1989 में बना था. उस समय इसमें 22 अपराध शामिल किये गये थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एक्ट को नहीं बनाया, बल्कि इसमें 25 और अपराध जोड़े. इस तरह 47 अपराध शामिल हो गये.

रामविलास पासवान ने कहा, कि हमलोग मांग करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इंडियन ज्युडिशियल सर्विस बनाओ. वहां भी आरक्षण की व्यवस्था हो. वहां भी हरेक जाति का जज रहे. सभी जजों की राय अलग-अलग होती है. मंडल कमीशन में भी जजों की अलग अलग राय आयी. जब यह फैसला आया तो एससी एसटी नौजवानों में गुस्सा आया. गुस्सा इसलिए आया कि इस सरकार ने हमको कुछ दिया नहीं. कानून 29 साल पहले बना. सुप्रीम कोर्ट ने हमारे हाथ से थाली छिन लिया है.

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