पटना : बिचौलिये विजय ने उगले कई राज, फर्जी प्रमाणपत्र पर 100 से अधिक नौकरियां दिलायीं
Updated at : 31 Aug 2018 7:52 AM (IST)
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पटना : टीईटी पात्रता परीक्षा के बाद किस तरह से फर्जी प्रमाणपत्र बिहार बोर्ड से बनवाये गये हैं, इसका पूरा खुलासा होना अभी बाकी है. क्योंकि रूपसपुर थाना क्षेत्र के सुमित इन्क्लेव से गिरफ्तार किये गये बिहार बोर्ड के बिचौलिया विजय तिवारी उर्फ तिवारी ने कई ऐसे राज उगले हैं, जिनसे फर्जी प्रमाणपत्र पर नौकरी […]
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पटना : टीईटी पात्रता परीक्षा के बाद किस तरह से फर्जी प्रमाणपत्र बिहार बोर्ड से बनवाये गये हैं, इसका पूरा खुलासा होना अभी बाकी है. क्योंकि रूपसपुर थाना क्षेत्र के सुमित इन्क्लेव से गिरफ्तार किये गये बिहार बोर्ड के बिचौलिया विजय तिवारी उर्फ तिवारी ने कई ऐसे राज उगले हैं, जिनसे फर्जी प्रमाणपत्र पर नौकरी कर रहे 100 से अधिक शिक्षक और बोर्ड के कर्मचारियों के बारे में जानकारी मिली है.
पुलिस की पूछताछ में विजय तिवारी ने बताया कि बलिया के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के पद पर तैनात दीपक कुमार उसके साथ काम करता था. दीपक कैंडिडेट लाता था और पैसा वसूल कर विजय तिवारी को देता था.
इसके बाद विजय तिवारी बिहार बोर्ड के कंप्यूटर सेक्शन और लेखा विभाग में प्रमाणपत्र में संशोधन करा कर कैंडिडेट को पास करा देता था. इसके बाद विजय बोर्ड के कर्मचारियों को पैसा पहुंचाता था. उसने कबूल किया है कि वह प्रति कैंडिडेट 80 हजार से एक लाख रुपये की वसूली करता था.
कॉलेज संचालक द्वारा बोर्ड तक पहुंचा विजय तिवारी : एक कॉलेज संचालक के साथ विजय तिवारी ने बोर्ड में प्रवेश किया था. विजय का कहना है कि कॉलेज संचालक अब मुंबई में शिफ्ट हो गया है.
बोर्ड में उसने अमित वर्मा और अमितेश से दोस्ताना संबंध बना लिया. इसके बाद 2015 में टीईटी पात्रता परीक्षा होने के बाद उसने सेटिंग कर ली. फिर प्रमाणपत्र में संशोधन करा कर पैसा वसूलता था. विजय तिवारी ने कई लोगों का नाम बताया है, जिनकी तलाश तेज हो गयी है.
दलाली से विजय तिवारी ने कमाये करोड़ों, अब होगी संपत्ति की जांच
मूल रूप से औरंगाबाद जिले के ओबरा थाना क्षेत्र के खराटी गांव का रहने वाला विजय तिवारी पटना में करीब डेढ़ दशक से रहता है. विजय तिवारी ने बिहार बोर्ड में आना-जाना शुरू किया और लेखा विभाग व कंप्यूटर सेक्शन में अमितेश, अमित कुमार, जटाशंकर, रंजीत समेत अन्य लोगों से नजदीकियां बना लीं. इन लोगों से फोन पर भी बात करता था. धीरे-धीरे वह बोर्ड की दलाली करने लगा. छोटे-मोटे काम की सेटिंग करके वह खुद भी पैसा कमाता था और बोर्ड के कर्मचारियों को भी पैसा दिलवाता था.
टीईटी पात्रता परीक्षा के बाद उसने ही अमित कुमार और अमितेश से सेटिंग की. इस फर्जीवाड़ा मामले में विजय तिवारी को अब तक का सबसे बड़ा सेटर माना जा रहा है. पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि उसने दलाली से करोड़ों रुपये की कमाई की है और प्रॉपर्टी भी बनायी है. एसएसपी मनु महाराज का कहना है कि विजय की संपत्ति की जांच होगी.
क्या है मामला
टीईटी पात्रता परीक्षा का फर्जी प्रमाण पत्र बनवा कर नौकरी हासिल किये जाने के मामले में बोर्ड की तरफ से कोतवाली में मामला दर्ज कराया था. इसमें बोर्ड के लेखा विभाग और कंप्यूटर सेक्शन में तैनात कर्मचारियों का नाम आया था. पुलिस ने अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. इसमें फर्जी शिक्षक भी शामिल हैं. अब कुछ और बिचौलियों का नाम आया है उनकी तलाश की जा रही है.
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