फुलवारीशरीफ : ‘जीने का दर्द’ में दिखा शहर में है छल-फरेब व लूटखसोट
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Aug 2018 9:05 AM
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फुलवारीशरीफ : सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच (एसएसएम) की साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक शृंखला में महेश चौधरी द्वारा लिखित एवं राकेश प्रेम द्वारा निर्देशित नुक्कड़ नाटक ‘जीने का दर्द’ की प्रस्तुति वाल्मी स्थित एक मार्केट परिसर में की गयी. नाटक की शुरुआत सौरव राज के स्वरबद्ध गीत- ये कैसा जीवन है, जीने का दर्द सुनो सुनो से की […]
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फुलवारीशरीफ : सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच (एसएसएम) की साप्ताहिक नुक्कड़ नाटक शृंखला में महेश चौधरी द्वारा लिखित एवं राकेश प्रेम द्वारा निर्देशित नुक्कड़ नाटक ‘जीने का दर्द’ की प्रस्तुति वाल्मी स्थित एक मार्केट परिसर में की गयी. नाटक की शुरुआत सौरव राज के स्वरबद्ध गीत- ये कैसा जीवन है, जीने का दर्द सुनो सुनो से की गयी.
इस नाटक में दिखाया गया है कि एक ग्रामीण बेरोजगार युवक को जब नौकरी नहीं मिल पाती है तब वह शहर में कारोबार करने का सपना संजोकर पत्नी के सारे गहने को बंधक रखकर पैसों का इंतजाम करता है.
फिर वह शहर में चला जाता है. शहर में एक कंपनी से सामान लेकर शहर के गली-गली में बेचने के लिए निकल पड़ता है. एक लफंगा उसके पीछे पड़ जाता है और फिर उसका सारा सामान छीन लेता है. पीड़ित युवक पुलिस से सहायता मांगता है, लेकिन उसे वहां से भी मदद नहीं मिल पाती है. इसके बाद वह वहां के नेता से अपनी सामग्री वापसी के लिए पैर पकड़ता है, पर नेता उसकी कोई मदद नहीं कर पाता.
इस पीड़ा के कारण उसका शहर में जीने का सपना भी टूट जाता है. वह निराश होकर फिर अपने गांव लौटता है और अपने खेत में कड़ी मेहनत कर फसल उपजाता है. फसल को बेच कर वह पत्नी के गहने को वापस लाता है. नाटक में मोनिका, रजनीश, अंजनी, छोटू, श्रवण,संजय, पूजा, रिचा, सुनील आदि कलाकारों के अभिनय को लोगों ने खूब सराहा.
‘मैकू’ने शराब छोड़ने के लिए किया जागरूक
खगौल. नाट्य संस्था संपूर्ण कल्याण विकास समिति की ओर से डाक बंगला परिसर में ‘मैकू’ आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया. मुंशी प्रेमचंद की कृति का नाट्य रूपांतरण किया गया़ लेखक अंबिका प्रसाद सिन्हा व ज्ञानी प्रसाद द्वारा निर्देशित नाटक ‘मैकू’ के माध्यम से आम लोगों को शराब छोड़ने के लिए जागरूक किया गया. शराब से होने वाली परेशानी को दर्शाया गया. शराबियों से शराब की लत को छुड़ाने के लिए कुछ स्वयंसेवक शराब की दुकान के बाहर शराबियों से हाथ जोड़ कर मान-मनौव्वल कर कहते हैं.
इसी बीच मैकू वहां हाजिर होता है.स्वयंसेवक उसे भी रोकते हैं. मैकू अपना आपा खो बैठता है और एक स्वयंसेवक के गाल पर चांटा जड़ देता है. मैकू को बड़ी ग्लानि होती है और वह वहां शराब पी रहे लोगों को डंडे से पीटता है. साथ ही यह भी कहता आज के बाद यहां नजर नहीं आना.
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